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भोपाल, May 29, 2026

मानसून पर ताजा अपडेट, मध्यप्रदेश में देर से होगी एंट्री, जानिए कब बरसेगा पानी

MP Monsoon update 2026: मौसम विभाग के अनुसार मानसून के केरल तट की ओर बढ़ने से देश के कई हिस्सों में प्री-मानसून गतिविधियां तेज होने के आसार हैं लेकिन एमपी में मानसून की एंट्री अपने तय समय पर नहीं होगी। जानिए कब बरसेगा एमपी में पानी...।

Monsoon Rain

Monsoon Rain: Photo- Patrika

MP Monsoon Update 2026: उत्तर-पश्चिम भारत में सक्रिय नए पश्चिम विक्षोभ, चक्रवाती परिसंचरणों व प्री-मानसून गतिविधियों के प्रभाव से गुरुवार को मध्यप्रदेश का मौसम बदला। मध्यप्रदेश में भीषण गर्मी के बीच भिंड, दमोह सहित कुछ जिलों में आंधी बारिश व ओले गिरे वहीं खजुराहो, राजगढ़ सहित कई जिले 45 डिग्री तक तपे। मौसम विभाग के अनुसार मानसून के केरल तट की ओर बढ़ने से देश के कई हिस्सों में प्री-मानसून गतिविधियां तेज होने के आसार हैं। वहीं प्रदेश में मानसून की एंट्री तय समय से 5 से 8 दिन देरी से, यानी 20 जून के बाद होने की संभावना जताई गई है। शुक्रवार को ग्वालियर समेत एमपी के कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश हुई।

30 मई के बाद प्री मानसून की आहट

मौसम वैज्ञानिक(MP Weather) बीएस यादव के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से प्रदेश के मौसम में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। 30 मई के बाद प्री- मानसूनी गतिविधियां तेज होंगी, जिससे बादल छाने, तेज हवाएं चलने और कहीं-कहीं हल्की बारिश की संभावना बन सकती है। इसका असर भोपाल समेत आसपास के जिलों में भी दिखाई देगा। अनुमान है कि तापमान में तीन से चार डिग्री तक गिरावट आ सकती है, जिससे गर्मी से कुछ राहत मिलेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल दोपहर के समय बाहर निकलने से बचना चाहिए, क्योंकि तेज धूप और लू का असर स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकता है।

इस साल एमपी ऐसा रहेगा मानसून

  • ग्वालियर, भिंड, नीमच, दमोह, अनूपपुर, उज्जैन, आलीराजपुर और बड़वानी में सामान्य या इससे ज्यादा पानी गिर सकता है।
  • अशोकनगर, सागर, नर्मदापुरम, रायसेन, मंडला, डिंडौरी, खरगोन, बुरहानपुर, नरसिंहपुर में सामान्य बारिश की तुलना में 10 से 15 प्रतिशत तक कम बारिश हो सकती है।
  • बाकी जिलों में 90 प्रतिशत तक बारिश होने का अनुमान है।

30 और 31 मई का मौसम

मध्यप्रदेश के मौसम को प्रभावित करने वाली प्रमुख मौसम प्रणालियाँ

मध्य पाकिस्तान से ओडिशा तक विस्तृत ट्रफ (द्रोणिका)

सबसे महत्वपूर्ण प्रणाली 0.9 किमी ऊँचाई पर बनी ट्रफ है, जो मध्य पाकिस्तान से राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तर छत्तीसगढ़ होते हुए आंतरिक ओडिशा तक फैली हुई है। यह ट्रफ मध्यप्रदेश के ऊपर नमी और अस्थिरता (Instability) बढ़ा रही है। इसके प्रभाव से प्रदेश में कहीं-कहीं गरज-चमक, धूलभरी आँधी तथा हल्की से मध्यम वर्षा की गतिविधियाँ देखने को मिल सकती हैं। पूर्वी एवं दक्षिण-पूर्वी जिलों में इसका प्रभाव अपेक्षाकृत अधिक रहने की संभावना है।

मध्य पाकिस्तान एवं आसपास का ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण

1.5 किमी ऊँचाई तक बना यह परिसंचरण पश्चिमी एवं उत्तर-पश्चिमी भारत के मौसम को प्रभावित कर रहा है। इसके कारण राजस्थान से होकर मध्यप्रदेश तक गर्म एवं शुष्क हवाओं का प्रवाह बना हुआ है। इससे प्रदेश के कई भागों में तापमान सामान्य से ऊपर बना रह सकता है। नौतपा जैसी तीव्र गर्मी की स्थिति को यह प्रणाली समर्थन दे रही है।

पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance)

75°E देशांतर के आसपास 5.8 किमी ऊँचाई पर सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत में मौजूद है। इसका प्रत्यक्ष प्रभाव मध्यप्रदेश पर सीमित है। हालांकि यह पश्चिमी एवं मध्य भारत में वायुमंडलीय अस्थिरता बढ़ाकर कहीं-कहीं आंधी-तूफान की परिस्थितियाँ बना सकता है। उत्तर-पश्चिम मध्यप्रदेश में इसका अप्रत्यक्ष प्रभाव महसूस हो सकता है।

अरब सागर एवं बंगाल की खाड़ी के चक्रवाती परिसंचरण

अरब सागर एवं बंगाल की खाड़ी के चक्रवाती परिसंचरण दक्षिण-पूर्व अरब सागर पर सक्रिय ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण।पूर्व-मध्य एवं दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी पर विस्तृत चक्रवाती परिसंचरण। ये दोनों प्रणालियाँ दक्षिण-पश्चिम मानसून को आगे बढ़ाने में सहायक हैं तथा आगामी दिनों में नमी की उपलब्धता बढ़ा सकती हैं।

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