
Mahashivratri 2026 (Photo Source - Patrika)
Mahashivratri 2026: मध्यप्रदेश में ऐसे कई प्राचीन शिवालय हैं जो शिव गाथा सुनाते हैं। इनकी अपनी एक विशेषता है। उज्जैन में स्थित रामेश्वर महादेव का शिवलिंग अपनी धूरी पर घूमता है तो वहीं जबलपुर में कल्चुरीकालीन दसमुखी भोलेनाथ का मंदिर स्थापित है, जो 30 स्तंभों पर बना हुआ। जहां प्राचीन प्रतिमाएं दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। आज महाशिवरात्रि पर मंदिरों में भक्तों का हुजूम उमड़ेगा। शिवालयों को विशेष रूप से सजाया गया है। इस मौके पर जानिए कई मंदिरों की विशेषताएं ….
उज्जैन के योगीपुरा स्थित रामेश्वरम महादेव मंदिर अपनी अद्वितीयता के लिए प्रसिद्ध है। स्कंद पुराण के उल्लेखानुसार, वनवास काल के दौरान जब भगवान श्री राम, माता सीता और लक्ष्मण शिप्रा तट पर आए थे, तब उन्होंने यहीं अपने पिता राजा दशरथ का पिंडदान किया था।
मान्यता है कि शिप्रा को प्रणाम करने के बाद हुई आकाशवाणी के निर्देश पर प्रभु श्री राम और माता सीता ने हाथों से इस शिवलिंग की स्थापना की थी। मंदिर तंत्र और विज्ञान की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह शिवलिंग ऊध्र्व और कर्क रेखा के मध्य में स्थापित है। डमरू यंत्र पर स्थित होने के कारण यह अपनी धुरी पर घूमने में सक्षम है। श्रद्धालु यहां दर्शन करने दूर-दूर से आते हैं।
मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां का शिवलिंग अपनी धुरी पर 360 डिग्री पर घूमता है। मुख्य पुजारी डॉ. विशाल लक्ष्मीकांत शुक्ल के अनुसार, यह विश्व का एकमात्र ऐसा शिवलिंग है, जो डमरू यंत्र पर विराजमान है। जब इसकी जलाधारी पश्चिम की ओर जाती है, तो इसका स्वरूप बिल्कुल एक डमरू जैसा दिखाई देता है।
नर्मदापुरम में सेठानी घाट पर स्थित काले महादेव मंदिर के गर्भगृह में विराजित शिवलिंग के पास फर्श पर कान लगाने पर कभी डमरू तो कभी शंख की ध्वनि भी सुनाई देती है। आमतौर पर शिवलिंग सफेद, हल्का कत्थई या हल्के भूरे रंग का होते हैं। लेकिन काले महादेव में स्थित शिवलिंग पूर्ण काले रंग का है जो अत्यंत विरले हैं। पूर्ण काले रंग का शिवलिंग प्रदेश में अन्य जगह नहीं है। काले महादेव के नाम से विख्यात मंदिर करीब 200 साल से अधिक पुराना है। शिव मंदिरों में प्रमुख और चमत्कारी शिव मंदिर है। ऐसी मान्यता है कि भक्त जिस भावना से मंदिर में आते हैं सभी मनोकामना पूर्ण होती है।
समिति सदस्य अभिषेक पटवा ने बताया, हर साल मां नर्मदा सावन माह में एक बार मां नर्मदा भगवान शंकर का अभिषेक करने आती हैं। अभिषेक के बाद मां का वेग कम होने लगता है। मंदिर में पहले टीन शेड था। 2013 की बाढ़ में टीन शेड बह गया। इसके बाद समिति ने भव्य मंदिर निर्माण का संकल्प लिया।
जबवलपुर में कल्चुरी काल के अनेक ऐतिहासिक शिवालय संस्कारधानी की समृद्ध धार्मिक विरासत हैं। गौरीघाट रोड स्थित बादशाह हलवाई का कल्चुरीकालीन शिवालय इनमें से एक है। 800 वर्ष पुराने शिवालय के गर्भगृह में भगवान शिव की दसभुजी प्रतिमा विराजमान है। 16 भुजाओं वाले गणेश व 27 नक्षत्रों की प्रतिमाएं मंदिर में विशेष आकर्षण का केन्द्र हैं। मान्यता है कि रानी दुर्गावती मदनमहल किले से गुफा के जरिए इस मंदिर में शिवपूजन के लिए आती थीं। पुजारी धर्मेंद्र दुबे बताते हैं कि मंदिर के पिछले हिस्से में एक गुफा है। इसे फिलहाल बंद कर दिया गया है। महाशिवरात्रि पर दर्शन करने यहां भक्तों की भीड़ जुटेगी।
Published on:
15 Feb 2026 12:29 pm
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