
Digvijaya Singh UGC Rules Statement (फोटो- Patrika.com)
UGC Rules Supreme Court Stay: UGC के नए नियमों पर मध्य प्रदेश सहित देशभर में शुरू हुए विवाद और सामान्य वर्ग के छात्रों और शिक्षकों के विरोध के बाद इस पर सिफारिशें देने वाली संसदीय समिति भी घेरे में आ गई है। शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल संबंधी संसदीय स्थायी समिति के वर्तमान अध्यक्ष कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) हैं। लगातार बढ़ रहे विरोध के बीच दिग्विजय सिंह ने इस पर सफाई देते हुए कहा है कि समिति की सभी सिफारिशें UGC ने नहीं मानी हैं। उन्होंने कहा कि झूठे मामलों पर सजा हटाने का फैसला UGC का था, इसका संसदीय समिति से कोई संबंध नहीं है। सामान्य वर्ग को सूची से बाहर रखने पर भी समिति ने कोई टिप्पणी नहीं की थी। (MP News)
उन्होंने कहा कि यदि UGC ने भेदभाव की स्पष्ट परिभाषा और उदाहरण तय कर दिए होते, तो इससे न केवल वंचित वर्गों को सुरक्षा मिलती बल्कि फर्जी मामलों की आशंका भी काफी कम हो जाती। यही बात संसदीय समिति ने कही, लेकिन उसे नजरअंदाज कर दिया गया। उन्होंने कहा कि फरवरी 2025 में रोहित वेमुला और पायल तड़वी की माताओं की पहल और सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद केंद्र सरकार और UGC ने उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव रोकने के लिए ड्राफ्ट इक्विटी रेगुलेशंस जारी किए थे। इसका उद्देश्य कैंपस में जाति, सामाजिक और अन्य आधारों पर होने वाले भेदभाव को रोकना था। समिति ने माना कि नियम सही दिशा में हैं, लेकिन उन्हें सकत व स्पष्ट बनाए जाने की जरूरत है।
दिग्विजय दिग्विजय के अनुसार, UGC ने तीन सिफारिशें को स्वीकार किया लेकिन, इक्विटी कमेटी में एससी- एसटी-ओबीसी प्रतिनिधित्व बढ़ाने और भेदभाव की विस्तृत परिभाषा तय करने जैसी सिफारिशों को नजरअंदाज कर दिया। सिंह ने कहा कि वास्तव में, यह स्पष्ट करना कि किन कृत्यों और मामलों को भेदभाव माना जाएगा, न केवल छात्रों के लिए सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि विनियमों का दुरुपयोग करके फर्जी मामले दर्ज करने की संभावना को भी कम करेगा। समिति ने UGC से यही करने का अनुरोध किया लेकिन यूजीसी ने इसे नजरअंदाज किया। कहा, इस मुद्दे का समाधान यूजीसी और शिक्षा मंत्रालय पर निर्भर है।
Published on:
30 Jan 2026 12:34 am

बड़ी खबरें
View Allभोपाल
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
