
फोटो सोर्स- पत्रिका
MP Politics: मध्यप्रदेश की सियासी हवा का रूख जल्द बदल सकता है, क्योंकि राज्यसभा सांसद और पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह एक बार फिर से प्रदेश की राजनीति में एक्टिव हो सकते हैं। वह दो बार के राज्यसभा सांसद रह चुके हैं। सूत्रों के मुताबिक, अब तीसरी बार वह राज्यसभा नहीं जाएंगे। वह प्रदेश स्तरीय राजनीति में सक्रिय होकर कांग्रेस की जमीन को मजबूत करेंगे।
साल 2028 में विधानसभा चुनाव और साल 2029 में लोकसभा चुनाव हैं। पार्टी सूत्रों की मानें तो दिग्विजय सिंह की नर्मदा यात्रा का साल 2018 के विधानसभा चुनावों में गहरा प्रभाव था। जिसमें उन्होंने गांव-गांव पैदल यात्रा की थी। उस दौरान कांग्रेस की सत्ता में वापसी भी हो पाई थी। इन्हीं कारणों को देखते हुए पार्टी आलाकमान से दिग्विजय सिंह ने कहा कि वह प्रदेश की राजनीति में अपना पूरा समय देना चाहते हैं। जिस पर पार्टी आलाकमान ने भी मुहर लगा दी है। हालांकि, अभी औपचारिक ऐलान नहीं हुआ है।
पिछले महीने ही दिल्ली कांग्रेस मुख्यालय में दिग्विजय सिंह प्रजेंटेशन दे चुके हैं। जिसमें उन्होंने सुझाव दिया था कि कांग्रेस की जमीन को मजबूत करने के लिए बूथ, मंडल, ब्लॉक और जिला स्तर पर मजबूत होना होगा। इस दौरान उन्होंने बताया था कि बूथ से जिला स्तर तक एक्टिव होने पर सीधा कार्यकर्ताओं से जुड़ाव होगा।
दिग्विजय सिंह की जगह राज्यसभा जाने की रेस में कमलनाथ, अरूण यादव, मीनक्षी नटराजन और कमलेश्वर पटेल समेत कई नेता रेस में हैं। राजनीतिक जानकारों की मानें तो प्रबल संभावना है कि कमलनाथ को दिग्विजय सिंह की जगह राज्यसभा भेजा जा सकता है। साथ ही उन्हें सक्रिय भूमिका भी दी जा सकती है।
बता दें कि, अप्रैल में राज्यसभा सीट खाली हो रही है। कमलनाथ छिंदवाड़ा से नौ बार के सांसद रह चुके हैं। वह 2018 से मार्च 2020 तक मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। इसके अलावा केंद्र सरकार में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री, केंद्रीय शहरी विकास मंत्री, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री, केंद्रीय पर्यावरण एवं वन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और केंद्रीय पर्यटन मंत्री (अतिरिक्त प्रभार) कई महत्तवपूर्ण पद संभाल सकते हैं।
प्रदेश कांग्रेस एससी विभाग के प्रदेश अध्यक्ष ने दिग्विजय सिंह को पत्र लिखते हुए कि यह सर्वविदित है कि आपके मुख्यमंत्रित्व काल को सामाजिक न्याय और दलित उत्थान के लिए सदैव याद किया जाएगा।
आगे मिथुन अहिरवार ने कहा कि मध्यप्रदेश की लगभग 17 प्रतिशत अनुसूचित जाति आबादी की भावना और अपेक्षा को आपके समक्ष रखते हुए मैं आपसे यह आग्रह करता हूँ कि इस बार राज्यसभा में अनुसूचित जाति वर्ग से प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए। यह न केवल सामाजिक संतुलन और संवैधानिक भावना के अनुरूप होगा, बल्कि दलित समाज के आत्मसम्मान और राजनीतिक सहभागिता को भी सुदृढ़ करेगा।
Updated on:
13 Jan 2026 05:25 pm
Published on:
13 Jan 2026 02:26 pm
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