12 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

एम्स भोपाल में कम खर्च में होगा बेहतर इलाज, जल्दी आएंगे जांच के नतीजे

AIIMS Bhopal: एम्स भोपाल में बहुविषयक अनुसंधान इकाई और स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी मूल्यांकन संसाधन केंद्र का उद्घाटन। यहां अब कम खर्च में बेहतर इलाज होगा और जांच के परिणाम भी जल्दी आएंगे।

2 min read
Google source verification

भोपाल

image

Akash Dewani

Jan 12, 2026

AIIMS Bhopal offers lower cost better treatment mp news

AIIMS Bhopal offers lower cost better treatment (फोटो- Patrika.com)

MP News: एम्स भोपाल (AIIMS Bhopal) में चौथे अनुसंधान दिवस पर स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सचिव एवं आइसीएमआर के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने एम्स भोपाल की बहुविषयक अनुसंधान इकाई (Research Unit) और स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी मूल्यांकन संसाधन केंद्र (Health Technology Assessment Resource Center) का उद्घाटन किया। इससे अनुसंधान आधारित उपचार को नई मजबूती मिली है। इसका सीधा लाभ रोगी देखभाल और किफायती इलाज से जुड़ा है।

कम खर्च पर मिलेगा बेहतर इलाज

स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी मूल्यांकन संसाधन केंद्र चिकित्सा उपकरणों और तकनीकों की उपयोगिता व लागत का आकलन करेगा। इससे इलाज की गुणवत्ता बनाए रखते हुए अनावश्यक खर्च पर रोक लगेगी और मरीजों को कम लागत में बेहतर उपचार मिल सकेगा। एम्स भोपाल ने इलाज के साथ शोध और नवाचार को भी अपनी प्राथमिकता बताया। इस अवसर पर संस्थान के प्रभारी कार्यकारी निदेशक प्रो. डॉ. माधवनानंद कर और डॉ. पीयूष गुप्ता (प्रधान संपादक, इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च) विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

इलाज में वैज्ञानिक निर्णय होंगे तेज

आरसी-एचटीए के जरिए नई स्वास्थ्य तकनीकों और उपचार पद्धतियों का मूल्यांकन होगा। इससे मरीजों के इलाज में सटीक और व्यावहारिक फैसले लिए जा सकेंगे।

नवाचार और तकनीक का प्रदर्शनः डॉ. बहल ने बानी हेल्थ बायो-इन्क्युबेशन गैलरी, कम्प्यूटेशनल त्रि-आयामी मॉडलिंग प्रयोगशाला और अनुसंधान दिवस पुरस्कार दीर्घा का अवलोकन किया। कार्यक्रम में पोस्टर प्रस्तुतियां, पुरस्कार वितरण और हेल्थ रिसर्च एंड इनोवेशन स्टूडेंटशिप प्रोग्राम की एसओपी का विमोचन हुआ।

युवा वैज्ञानिकों और नवाचार को मंचः एम्स भोपाल में चौथे अनुसंधान दिवस पर आयोजित वैज्ञानिक सत्रों में स्नातक, पोस्टग्रेजुएट और पीएचडी स्तर के शोध प्रमुखता से प्रस्तुत किए गए। 'क्यूरियोसिटी एंड क्रिएटिविटी', पोस्टग्रेजुएट रिसर्च की क्षमता और 'एथिक्स इन रिसर्च' जैसे सत्रों ने नवाचार और शोध में नैतिकता पर जोर दिया। सर्वश्रेष्ठ शोध प्रबंध और पीएचडी पुरस्कार वितरण ने विद्यार्थियों और संकाय के उत्कृष्ट काम को सम्मानित किया।

रिसर्च पर फोकस किया तो दो अंक की मिली बढ़त

शोध के क्षेत्र में एम्स भोपाल लगातार अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। इसका असर नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआइआरएफ) में साफ दिख रहा है। मेडिकल संस्थानों के रिसर्च प्रदर्शन के आधार पर तय रैंकिंग में एम्स भोपाल ने दो पायदान की छलांग लगाई है। वर्ष 2025 की एनआईआरएफ रैंकिंग में एम्स भोपाल 25वें स्थान पर पहुंच गया है। कुछ साल पहले यह 38वें स्थान पर था, जबकि पिछले वर्ष रैंक 27 रही।

एक हजार से ज्यादा रिसर्च

बीते वर्ष एम्स भोपाल में एक हजार से अधिक रिसर्च प्रोजेक्ट्स संचालित किए गए। आईसीएमआर के अनुसार, देशभर में चल रहे कुल रिसर्च प्रोजेक्ट्स का एक प्रतिशत एम्स भोपाल में हो रहा है। हालांकि, आईसीएमआर के कुल रिसर्च फंड में से संस्थान को फिलहाल एक प्रतिशत ही मिल पा रहा है। आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल के अनुसार, संस्थान के आकार और उम्र को देखते हुए यह बड़ी उपलब्धि है। भोपाल एम्स रिसर्च और बढ़ाए और अच्छे प्रोजेक्ट भेजे, तो उसे मिलने वाल फंड आसानी से दोगुना हो सकता है। (MP News)


मकर संक्रांति