28 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika Logo
Switch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

नदियों से बजरी निकालने के लिए एक लीज के अब बनाने होंगे 5 ब्लॉक

नदियों में अंधाधुंध बजरी खनन पर अंकुश लगाने के लिए राजस्थान उच्च न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य में नदी से बजरी निकालने की अनुमति देने से पहले (रिप्लेनिशमेंट स्टडी) प्रक्रिया का अध्ययन करना अनिवार्य होगा। कोर्ट ने कड़े शब्दों में कहा कि जिस तरह जंगलों को बचाने के लिए पेड़ों की कटाई […]

2 min read
Google source verification
To extract gravel from rivers, a lease will now have to be divided into 5 blocks.

To extract gravel from rivers, a lease will now have to be divided into 5 blocks.

  • हर साल एक-एक ब्लॉक में ही हो सकेगा खनन
  • राजस्थान उच्च न्यायालय ने चार अधिकारियों के नाम लेकर की निंदा

नदियों में अंधाधुंध बजरी खनन पर अंकुश लगाने के लिए राजस्थान उच्च न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य में नदी से बजरी निकालने की अनुमति देने से पहले (रिप्लेनिशमेंट स्टडी) प्रक्रिया का अध्ययन करना अनिवार्य होगा। कोर्ट ने कड़े शब्दों में कहा कि जिस तरह जंगलों को बचाने के लिए पेड़ों की कटाई से पहले उनकी ग्रोथ रेट मापना जरूरी है। उसी तरह नदियों का प्राकृतिक संतुलन जरूरी है कि रेत की भरपाई किस रफ़्तार से हो रही है। कोर्ट ने स्वीकार किया कि निर्माण कार्यों के लिए रेत एक जरूरी संसाधन है और इस पर पूरी तरह बैन लगाना व्यावहारिक नहीं है।

नीलामी सुप्रीम कोर्ट की सीईसी रिपोर्ट के अनुसार

हाईकोर्ट ने निर्देश दिए कि भविष्य होने वाली नीलामी सुप्रीम कोर्ट की सीईसी रिपोर्ट के अनुसार ही होगी। इसके तहत पूरे लीज एरिया को 5 सालाना ब्लॉक में बांटना होगा। एक साल में केवल एक ब्लॉक से ही बजरी निकाली जा सकेगी। बाकी 4 ब्लॉक को अगले 4 सालों के लिए खाली छोड़ना होगा ताकि कुदरती रूप से बजरी जमा हो सके। यह नियम 100 हेक्टेयर से कम के छोटे प्लॉट पर भी लागू होगा।

अफसरों को लगाई कड़ी फटकार

कोर्ट ने साफ किया कि राज्य सरकार और खनन विभाग ने सुप्रीम कोर्ट के उन आदेशों का मजाक बनाया है, जो पर्यावरण की सुरक्षा और रिप्लेनिशमेंट स्टडी के लिए दिए गए थे। न्यायालय ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि अधिकारियों का अड़ियल रवैया न केवल अदालत की अवमानना है, बल्कि नदियों के अस्तित्व को खत्म करने की एक खुली कोशिश है।

अफसरों के नाम लेकर की निंदा

अदालत ने खनन विभाग के चार वरिष्ठ अधिकारियों अतिरिक्त निदेशक महेश माथुर, अविनाश कुलदीप, आलोक जैन और अधीक्षण खनन अभियंता एनएस. शक्तावत के खिलाफ नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि इन अधिकारियों ने जानबूझकर गुमराह करने वाली रिपोर्ट पेश की ताकि 100 हेक्टेयर से कम के भूखंडों को नियमों से बाहर रखा जा सके। भीलवाड़ा की 46 लीज को रद्द किया है। सभी ठेकेदारों को बिना ब्याज राशि लौटाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अगले 4 महीने में नया प्लान बनाकर पेश करना होगा, तब तक इन क्षेत्रों में खनन पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।

इन ब्लॉक पर लगी रोक

खनिज विभाग के नीलाम 34 बजरी के ब्लॉक में से 31 को रद्द किया है। इनमें बीजे 01, 02, 03, 04, 05, 06, 07, 08, 09, 13, 14, 15, 16, 18, 19, 20, 21, 22, 23, 26, 27, 28, 34, 35, 36, 37, 38, 39, 40, 41 तथा बीजे 42 नंबर का शामिल है। यह ब्लॉक बनास नदीं में है। कोठारी नदी के तीन ब्लॉक बीजे 43, 44 व 47 जो मांडल क्षेत्र में आते हैं उन पर कोई निर्णय नहीं किया है। इसमें दो ब्लॉक राजनेता के है। बिजौलियां क्षेत्र में बीजे 01, 02, 04, 06, 08, 09, 10, 11, 12, 14, 15, 16, 17, 18 तथा बीजे 19 ब्लॉक शामिल है। इन सभी को रद्द कर दिए गए हैं।