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एमएलवी कॉलेज में ‘कालीबाई’ नाटक: वीरांगना के बलिदान को देख नम हुई आंखें

माणिक्यलाल वर्मा राजकीय महाविद्यालय में जब 13 वर्षीय आदिवासी बालिका अपने गुरु को बचाने के लिए अंग्रेजों की बंदूक के सामने सीना तानकर खड़ी हुई, तो पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। मौका था महाविद्यालय में डॉ. सौरभ सिंह द्वारा रचित और निर्देशित नाटक ‘कालीबाई’ के मंचन का। नाटक के जरिए आजादी के […]

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'Kalibai' play at MLV College: Tears well up after witnessing the sacrifice of the brave woman

'Kalibai' play at MLV College: Tears well up after witnessing the sacrifice of the brave woman

  • - मंच पर जीवंत हुआ रास्तापाल का संघर्ष

माणिक्यलाल वर्मा राजकीय महाविद्यालय में जब 13 वर्षीय आदिवासी बालिका अपने गुरु को बचाने के लिए अंग्रेजों की बंदूक के सामने सीना तानकर खड़ी हुई, तो पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। मौका था महाविद्यालय में डॉ. सौरभ सिंह द्वारा रचित और निर्देशित नाटक 'कालीबाई' के मंचन का। नाटक के जरिए आजादी के दौर में डूंगरपुर जिले के रास्तापाल गांव की उस ऐतिहासिक घटना को जीवंत किया गया] जिसने गुरु-शिष्य परंपरा और बलिदान की नई इबारत लिखी थी। नाटक में दिखाया गया कि किस प्रकार एक नन्ही भील बालिका कालीबाई ने ब्रिटिश और सामंती गठजोड़ का प्रतिरोध करते हुए अपने शिक्षक सेंगाभाई के प्राणों की रक्षा के लिए खुद की आहुति दे दी। नाटक का लेखन और निर्देशन महाविद्यालय के सह आचार्य डॉ. सौरभ सिंह ने किया। नाटक का कॉस्ट्यूम डिजाइन डॉ. अनंत दाधीच ने की, जबकि क्राफ्ट की जिम्मेदारी डॉ. नारायण माली और डॉ. प्रवीण जोशी ने संभाली। डॉ. मनीष रंजन ने ध्वनि (साउंड) प्रभाव से नाटक में जान फूंक दी।

बालिका शिक्षा के लिए मील का पत्थर है यह संदेश

एमएलवी कॉलेज के प्राचार्य प्रो. संतोष आनंद ने बताया कि यह नाटक महज एक प्रस्तुति नहीं, बल्कि नारी शक्ति और शिक्षा के प्रति समर्पण का प्रतीक है।

इन्होंने निभाया किरदार

नाटक में युगांशी पालीवाल, युवराज सिंह राठौड़, चित्रांश, प्रियंका शर्मा, निरमा कुमावत, कन्हैयालाल कुमावत, निलय जौहरी, दुर्गा शर्मा, खुशी प्रजापत, मनीष गवारिया, हरिप्रकाश गुंडालिया, युवराज खटीक, भावना सेन, राजकुमारी शर्मा और प्रिंस पायक सहित 15 विद्यार्थियों ने अपने सशक्त अभिनय की छाप छोड़ी।