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कूनो के चीतों की सुरक्षा पर मंडराया बड़ा खतरा, राजस्थान से मध्य प्रदेश पहुंचा टाइगर RBT-2512

रणथंभौर से लापता बाघिन टी-107 सुल्ताना का शावक आरबीटी-2512 कूनो राष्ट्रीय उद्यान में देखा गया है। कूनो में टाइगर की मौजूदगी अब वहां रह रहे चीतों की सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बन गई है।

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टाइगर RBT-2512। फोटो- पत्रिका नेटवर्क

भरतपुर। राजस्थान में सवाईमाधोपुर जिले के रणथंभौर बाघ अभयारण्य से करीब चार महीने पहले लापता हुई रणथंभौर की बाघिन टी-107 सुल्ताना का शावक आरबीटी-2512 कूनो राष्ट्रीय उद्यान में देखा गया है। उद्यान के टिकटोली द्वार क्षेत्र में बाघ के देखे जाने की पुष्टि करते हुए वन विभाग के सूत्रों ने शनिवार को बताया कि कूनो में एक बाघ की मौजूदगी की सूचना पिछले कुछ महीनों से मिल रही थी, लेकिन यह पहली बार पर्यटकों को दिखाई दिया है।

पर्यटकों को दिखा था बाघ

इसे अब कूनो के चीतों की सुरक्षा पर मंडराते खतरे के रूप में देखा जा रहा है। सूत्रों ने बताया कि टिकटोली द्वार से फ्लाइंग कैट सफारी पर निकले पर्यटकों को जंगल में एक बाघ नजर आया। बाघ पहले बैठा हुआ था, लेकिन जिप्सी को देखकर चल पड़ा और कुछ ही देर में जंगल में ओझल हो गया। उल्लेखनीय है कि करीब तीन वर्षीय बाघ आरबीटी-2512 अपना क्षेत्र बनाने की तलाश में अपनी मां से अलग होकर रणथंभौर से निकला था।

चीतों के लिए गंभीर खतरा

रणथंभौर में बाघों की युवा पीढ़ी अब नई टेरिटरी की तलाश में इधर-उधर भटक रही है। यही कारण है कि ये बाघ रणथंभौर से निकलकर मध्य प्रदेश के जंगलों का रुख कर रहे हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार चीता, टाइगर की तुलना में काफी छोटा और कमजोर शिकारी होता है। टाइगर अपनी टेरिटरी में किसी अन्य मांसाहारी को सहन नहीं करता। ऐसे में कूनो में टाइगर की मौजूदगी चीतों के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।