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भरतपुर, May 28, 2026

Rajasthan Highway : हाईवे किनारे भूमि खरीदना अब जोखिम भरा! 75 मीटर नियम ने खरीद-फरोख्त पर लगाया ब्रेक

Rajasthan Highway : राजस्थान सरकार की ओर से हाई-वे के दोनों ओर 75-75 मीटर दूरी अनिवार्य किए जाने के बाद भरतपुर से सटे हाईवे के आस-पास जमीनों की खरीद-फरोख्त लगभग थम गई है। जमीनों के भाव गिरने लगे हैं।

Rajasthan Highway Buying land now risky 75 meter rule selling brake Bharatpur prices fell

फाइल फोटो पत्रिका

Rajasthan Highway : सरकार की ओर से हाई-वे और स्टेट हाई-वे के दोनों ओर 75-75 मीटर दूरी अनिवार्य किए जाने के बाद भरतपुर से सटे हाईवे के आस-पास जमीनों की खरीद-फरोख्त लगभग थम गई है। हाई-वे के आस-पास जमीनों के भाव गिरने लगे हैं और निवेशक असमंजस की स्थिति में है। नई गाइडलाइन के तहत हाईवे के निर्धारित दायरे में किसी भी प्रकार का निर्माण अवैध माना जाएगा। ऐसे में हाईवे किनारे प्लॉट खरीदना अब जोखिम भरा माना जा रहा है। प्रॉपर्टी कारोबारियों का कहना है कि नियम लागू होने के बाद कई सौदे रुक गए हैं और बाजार में मंदी साफ दिखाई देने लगी है। कई भू-कारोबारियों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि उन्होंने पहले ही भारी निवेश कर रखा है, लेकिन अब जमीन बिक नहीं रही और आर्थिक संकट गहराने लगा है।

नियमों की अनदेखी पड़ सकती है भारी

विशेषज्ञों के अनुसार यह व्यवस्था सड़क सुरक्षा और भविष्य की यातायात जरूरतों को ध्यान में रखकर लागू की गई है। पहले हाई-वे किनारे अनियोजित निर्माण के कारण दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ रहा था और सड़क चौड़ीकरण कार्य में भी बाधाएं आती थीं। अब प्रशासन सख्ती से नियमों की पालना करवाने की तैयारी में है। नई नीति से सबसे ज्यादा प्रभावित वे लोग हैं, जिन्होंने हाल ही में भूखंड खरीदे हैं या खरीदने की योजना बना रहे थे। अब निवेशक मास्टर प्लान, भूमि उपयोग, ग्रीन कवर और राजस्व रिकॉर्ड की पूरी जांच के बाद ही निर्णय ले रहे हैं। बिना जांच के निवेश करना नुकसान का कारण बन सकता है।

चार माह पहले जारी हो चुके आदेश

राजस्थान हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने फरवरी माह में ही सभी कलेक्टरों को पत्र जारी किया था। इसमें हाई-वे सीमा में आने वाले अवैध निर्माणों को चिह्नित करने और उन पर तत्काल नोटिस देकर हटाने की कार्रवाई करने के लिए कहा था। हाईकोर्ट ने यह आदेश हिम्मत सिंह गहलोत बनाम राजस्थान सरकार मामले की सुनवाई के दौरान दिए थे। आदेश में कहा है कि हाई-वे के आस-पास अवैध और अनियंत्रित निर्माणों की वजह से सड़क दुर्घटनाओं में लगातार इजाफा हो रहा है, जिससे आम लोगों की जान जोखिम में पड़ रही है।

इसके बाद पीडब्ल्यूडी ने एक आदेश जारी किया था। इसमें कहा गया है कि नेशनल हाईवे के सेंटर पॉइंट से 75 मीटर की दूरी तक किसी भी तरह का कॉमर्शियल या आवासीय निर्माण कानूनी रूप से मान्य नहीं होगा। इस दायरे में आने वाले सभी अवैध ढांचे (होटल, ढाबे, दुकानें, सर्विस सेंटर, भवन इत्यादि) हटाए जाएं।

यह भी बड़ा कारण

हाई-वे किनारे बेतरतीब शहरीकरण और अवैध निर्माणों के कारण हाइ-वे के विस्तार (चौड़ीकरण और विकास कार्य) प्रभावित हो रहे थे। कई जगहों पर सर्विस रोड, फ्लाईओवर के काम प्रभावित हो रहे है। क्योंकि भूमि पर अवैध कब्जे हो गए है। कोर्ट ने साफ कहा कि सेफ्टी ओवर प्रॉपर्टी यानी संपत्ति से ज्यादा लोगों की सुरक्षा महत्वपूर्ण है।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया थाकि यदि किसी निर्माण को किसी नगर निकाय या पंचायत ने अनुमति दी भी हो, तो वह अनुमति हाई-वे नियमों के खिलाफ होने पर अमान्य मानी जाएगी और ऐसे निर्माणों को अवैध माना जाएगा।

होटल-ढाबा संचालकों को चिंता

हाई-वे किनारे संचालित होटल, ढाबा और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के संचालकों में भी चिंता बढ़ गई है। उन्हें डर है कि भविष्य में सख्ती बढ़ने पर उनके निर्माणों पर कार्रवाई हो सकती है। कई लोग नए निर्माण से बच रहे हैं, वहीं कई भूखंड मालिकों को खरीदार नहीं मिल रहे। कुछ मामलों में तो तय सौदे भी निरस्त हो चुके हैं।

कुल मिलाकर नई गाइडलाइन ने हाईवे किनारे जमीन बाजार की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। जहां निवेशकों की सतर्कता बढ़ी है, वहीं कारोबारियों और जमीन मालिकों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।

कर रहे कार्रवाई

जहां संबंधित विभागों की ओर से भूमि अधिग्रहण किया जा रहा है। वहां स्टेट हाई-वे पर नियमों की पालना कराई जा रही है। साथ ही जिन स्थानों पर अतिक्रमण चिन्हित किए गए हैं। वहां अतिक्रमणकारियों को नोटिस दिए जा रहे हैं। हाइकोर्ट के आदेशों की पालना में समुचित कार्रवाई की जा रही है।
कमर चौधरी, जिला कलक्टर, भरतपुर

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