
बैतूल। नगर पालिका परिषद का साधारण सम्मेलन बुधवार को प्रशासनिक लापरवाही की वजह से हंगामे की भेंट चढ़ गया। पार्षदों से चर्चा किए बिना तैयार किया गया एजेंडा, उस पर अध्यक्ष और सीएमओ की असहज चुप्पी तथा जवाबों की कमी ने परिषद की गंभीरता पर ही सवाल खड़े कर दिए। नतीजतन 33 मुद्दों वाली बैठक बिना किसी निर्णय के हंगामे में तब्दील होकर स्थगित करनी पड़ी, यह स्थिति न सिर्फ नगर पालिका प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि शहर से जुड़े अहम मुद्दों पर गंभीरता से चर्चा करने के बजाय परिषद औपचारिकता तक सीमित रह गई है। बैठक में नपाध्यक्ष पार्वती बाई बारस्कर, उपाध्यक्ष महेश राठौर, सीएमओ सतीश मटसेनिया सहित अन्य पार्षदगण शामिल थे।
नेता प्रतिपक्ष ने एजेंडे की वैधता पर उठाए सवाल
नेता प्रतिपक्ष राजकुमार दीवान ने सबसे पहले एजेंडे की वैधता पर सवाल उठाते हुए अध्यक्ष और सीएमओ से पूछा कि जब पार्षदों से कोई सहमति या सुझाव नहीं लिया गया, तो एजेंडा आखिर किसने तैयार किया। चौंकाने वाली बात यह रही कि अध्यक्ष और सीएमओ दोनों ने ही एजेंडे के विषयों को लेकर अनभिज्ञता जाहिर कर दी। यह स्वीकारोक्ति अपने आप में नगर पालिका की प्रशासनिक कमजोरी और गैर-जिम्मेदाराना रवैये को उजागर करती है। एजेंडे में पार्षदों के मुद्दे शामिल न होने से नाराज नेता प्रतिपक्ष ने हंगामा करते हुए बैठक स्थगित करने की मांग रखी, जिसे सत्ता पक्ष के कई पार्षदों का भी समर्थन मिल गया। अंतत: पार्षदों की सर्वसम्मति से सीएमओ ने बैठक स्थगित करने का निर्णय लिया और अधिकारियों को निर्देश दिए कि आगे से एजेंडा बनाते समय पार्षदों से विचार-विमर्श कर उनके मुद्दों को प्राथमिकता दी जाए। हालांकि सवाल यह है कि क्या यह निर्देश जमीन पर अमल में भी आएंगे या सिर्फ कागजी कार्रवाई बनकर रह जाएंगे।
एजेंडे पर चर्चा से पहले बिजली का मुद्दा गरमाया
बैठक में एजेंडे पर चर्चा शुरू होने से पहले ही स्ट्रीट लाइट का मुद्दा छाया रहा। करीब डेढ़ घंटे तक सत्ता पक्ष और विपक्ष के पार्षदों ने अपने-अपने वार्डों में फैले अंधेरे और खराब स्ट्रीट लाइट व्यवस्था को लेकर शिकायतों का अंबार लगा दिया। शंकर वार्ड की पार्षद ममता मालवी ने स्ट्रीट लाइट की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए विद्युत शाखा के इंजीनियर जतीन पाल को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि इंजीनियर होने के बावजूद वे कभी वार्डों में नजर नहीं आते, जिससे यह स्पष्ट है कि फील्ड स्तर पर निगरानी नाम मात्र की है। नेता प्रतिपक्ष राजकुमार दीवान, अशोक निराले, अब्दुल नफीस और नंदनी तिवारी सहित कई पार्षदों ने आरोप लगाया कि शिकायत दर्ज कराने के बाद भी महीनों तक लाइटें बंद पड़ी रहती हैं। नई लगाई गई लाइटें पंद्रह दिन में ही खराब हो जाती हैं, जिससे घटिया सामग्री खरीदे जाने की आशंका मजबूत होती है। जवाब में विद्युत शाखा के अधिकारियों ने 27 हजार स्ट्रीट लाइटों और मात्र 25 लाख रुपए के बजट का हवाला देकर जिम्मेदारी से पल्ला झाडऩे की कोशिश की, जबकि यह बजट एक महीने में ही खर्च हो जाने की बात स्वीकार कर ली गई। वहीं नेता प्रतिपक्ष राजकुमार दीवान ने बैठक के दौरान पत्रिका में छपी खबर दिखाते हुए कहा कि जेल की करोड़ों की जमीन कौडिय़ों के भाव देने से नपा को वित्तीय नुकसान होने पर कॉलोनी विकास की अनुज्ञा निरस्त किए जाने की मांग की। साथ ही आगामी परिषद की बैठक के एजेंडे में जेल की जमीन के मुद्दे को भी शामिल किए जाने के लिए कहा।
पानी के मुद्दे पर भी हुई बहस
बैठक के दौरान पेयजल और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता भी सवालों के घेरे में रही। कांग्रेस पार्षद नंदनी तिवारी ने हमलापुर क्षेत्र में पाइपलाइन से गंदे पानी के रिसाव का मुद्दा उठाते हुए चेतावनी दी कि समय रहते सुधार नहीं हुआ तो इंदौर जैसी गंभीर घटना बैतूल में भी हो सकती है। वहीं अन्य पार्षदों ने भी गर्मी के दौरान पेयजल सप्लाई को लेकर नपा की तैयारियों को लेकर सवाल दागे। जवाब मिला कि पेयजल सप्लाई की नियमिति मॉनीटरिंग की जा रही हैं। शिकायतों के निवारण के लिए कंट्रोल रूम बनाया गया हैं। पानी के सैंपल वार्डों रोजाना लिए जा रहे हैं। गर्मी के सीजन को देखते हुए पानी की व्यवस्था के लिए तैयारियां कर रहे हैं। वहीं निर्माण कार्यों को लेकर पार्षदों ने आरोप लगाया कि ठेकेदार मनमर्जी से काम कर रहे हैं और इंजीनियर मौके पर जाकर निरीक्षण तक नहीं करते। नेता प्रतिपक्ष ने तो इंजीनियरों पर कमीशनखोरी जैसे गंभीर आरोप भी लगाए। कुल मिलाकर 33 विषयों वाला एजेंडा ढाई घंटे की बैठक में बिना चर्चा के ही दबा रह गया। परिषद की यह बैठक शहर की समस्याओं के समाधान का मंच बनने के बजाय प्रशासनिक लापरवाही और जवाबदेही के अभाव का आईना बनकर रह गई।
Published on:
21 Jan 2026 09:20 pm
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