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Tele Law: अब बस्तर के गांवों में वीडियो कॉल पर मिलेंगे वकील, ‘टेली-लॉ’ योजना से घर बैठे सुलभ हुआ न्याय

Tele Law: इस योजना का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कानूनी सलाह के लिए अब ग्रामीणों को जिला मुख्यालय या बड़े शहरों की लंबी दौड़ न लगानी पड़े, बल्कि उन्हें अपने गाँव में ही यह सुविधा मिल सके।

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बस्तर

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Love Sonkar

Jan 12, 2026

Tele Law: अब बस्तर के गांवों में वीडियो कॉल पर मिलेंगे वकील, 'टेली-लॉ' योजना से घर बैठे सुलभ हुआ न्याय

Tele Law: भारत सरकार के कानून एवं न्याय मंत्रालय द्वारा संचालित 'डिजिटल इंडिया' की एक महत्वाकांक्षी पहल अब बस्तर संभाग के दूरस्थ अंचलों में भी न्याय को सरल और सुगम बना रही है। सीएससी टेली-लॉ योजना' के विस्तार के साथ ही बस्तर जैसे संवेदनशील और आदिवासी बाहुल्य जिलों के नागरिकों के लिए न्याय तक पहुँच अब बेहद आसान हो गई है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कानूनी सलाह के लिए अब ग्रामीणों को जिला मुख्यालय या बड़े शहरों की लंबी दौड़ न लगानी पड़े, बल्कि उन्हें अपने गाँव में ही यह सुविधा मिल सके।

इस क्रांतिकारी बदलाव के तहत, नागरिक अब अपने घर के नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर पर जाकर देश के अनुभवी वकीलों से सीधे संवाद स्थापित कर सकते हैं। वीडियो कॉल या फोन कॉल के जरिए मिलने वाली यह अत्याधुनिक सुविधा न केवल ग्रामीणों के समय की बचत कर रही है, बल्कि उन्हें शहर आने-जाने के भारी-भरकम खर्च से भी मुक्ति दिला रही है। शासन द्वारा निर्धारित पात्र श्रेणियों के लिए यह कानूनी सहायता पूरी तरह से निःशुल्क है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

टेली-लॉ योजना का दायरा अत्यंत व्यापक रखा गया है ताकि आम आदमी के जीवन से जुड़े हर पहलू को कानूनी सुरक्षा मिल सके। योजना के तहत अब पारिवारिक कानूनों से जुड़े मसले जैसे विवाह, तलाक, गुजारा भत्ता और घरेलू विवादों का समाधान घर बैठे मिल रहा है। इसके साथ ही, बस्तर क्षेत्र में अक्सर देखने में आने वाले भूमि एवं संपत्ति विवाद, जमीन पर कब्जा, नामांतरण और बंटवारे जैसे मामलों में भी विशेषज्ञ वकीलों द्वारा सटीक मार्गदर्शन दिया जा रहा है। योजना में समाज के कमजोर वर्गों का विशेष ध्यान रखते हुए महिला एवं बाल अधिकारों के तहत घरेलू हिंसा और भरण-पोषण जैसे संवेदनशील मुद्दों को प्राथमिकता दी गई है, वहीं वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण और संपत्ति अधिकारों के संरक्षण की भी व्यवस्था है।

योजना की व्यापकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें दीवानी और फौजदारी दोनों तरह के मामलों को शामिल किया गया है। जहाँ एक ओर नागरिक एफआईआर, जमानत और पुलिस कार्यवाही जैसे फौजदारी मामलों में सलाह ले सकते हैं, वहीं नोटिस, वसूली और अनुबंध विवाद जैसे सिविल मामलों में भी उन्हें सहायता मिल रही है। इसके अतिरिक्त, श्रम कानूनों के तहत वेतन और सेवा शर्तों से जुड़ी समस्याएं, उपभोक्ता संरक्षण के तहत धोखाधड़ी या खराब उत्पाद की शिकायतें, और सामाजिक कल्याण योजनाओं जैसे पेंशन व राशन से जुड़े अधिकारों के लिए भी ग्रामीण अब सीधे वकीलों से जुड़ सकते हैं।

इतना ही नहीं, किरायेदारी विवादों और कानूनी दस्तावेजों की ड्राफ्टिंग, जैसे नोटिस या शपथ पत्र बनवाने में भी यह योजना मददगार साबित हो रही है।
योजना के जमीनी क्रियान्वयन में कॉमन सर्विस सेंटर के ग्राम स्तरीय उद्यमियों की भूमिका रीढ़ की हड्डी के समान है। सीएससी मैनेजर प्रदीप कुमार ने बताया कि इस पहल का लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों में एक सरल, सुरक्षित और भरोसेमंद कानूनी सहायता तंत्र विकसित करना है। उन्होंने बताया कि वीएलई नागरिकों का पोर्टल पर पंजीकरण करते हैं और वकीलों के साथ ऑनलाइन परामर्श की समय-सारणी तय कर ग्रामीणों का मार्गदर्शन करते हैं।

उन्होंने क्षेत्र के सभी वीएलई से अपील की है कि वे "एक कॉल – एक समाधान" के मंत्र को सार्थक करते हुए अधिक से अधिक नागरिकों को इस योजना से जोड़ें, ताकि समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय की समान पहुँच सुनिश्चित की जा सके। प्रशासन ने भी नागरिकों से आह्वान किया है कि वे अपनी किसी भी कानूनी समस्या के लिए अपने नजदीकी सीएससी केंद्र से संपर्क कर इस सुविधा का लाभ उठाएं।

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