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बाड़मेर बॉर्डर पर विकास क्यों रुका? MP बेनीवाल ने 1996 की उस पाबंदी पर उठाए सवाल, जिसने रोक दी थार की रफ्तार

बाड़मेर सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल ने सीमावर्ती क्षेत्र के विकास में 1996 की अधिसूचना से लगे प्रतिबंध को बड़ी बाधा बताया है। उन्होंने कहा कि प्रतिबंध हटाकर भारतमाला परियोजना को आधार बनाया जाए, तभी बॉर्डर क्षेत्र का समुचित विकास संभव होगा।

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MP Ummedaram Beniwal (Patrika Photo)

बाड़मेर: प्रतिबंध के कारण बाड़मेर के बॉर्डर का समुचित विकास नहीं होने के मुद्दे पर सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल ने पैरवी करते हुए कहा है कि भारतमाला को आधार बनाया जाना चाहिए। जब तक प्रतिबंध नहीं हटेगा, तब तक बॉर्डर के लिए बनने वाली योजनाओं को रोकने का अवसर तलाश लिए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि बाड़मेर के बॉर्डर पर अल्पसंख्यक आबादी ज्यादा है। इसलिए तुष्टीकरण की नीति के चलते यह नहीं किया जा रहा है। पत्रिका से बातचीत में उम्मेदाराम ने बॉर्डर डेवलपमेंट पर अपना पक्ष रखा।

पत्रिका- बॉर्डर पर 1996 की अधिसूचना से लगे प्रतिबंध पर आप क्या कहेंगे?

उम्मेदाराम- यह प्रतिबंध लगा होने से लोगों को परेशानी हो रही है। व्यवहारिक तौर पर इतनी सख्ती नहीं है। फिर भी सरकारी कामकाज, जमीन खरीद फरोख्त और अन्य मामलों में परेशानी आती है। यह प्रतिबंध अब हटना चाहिए। इसके भारतमाला के उत्तरी हिस्से तक ही रखा जाना उचित रहेगा।

पत्रिका- वाइब्रेंट विलेज योजना का लाभ नहीं मिला है, इस पर क्या कहेंगे?

उम्मेदाराम- बीएडीपी और बीआरजीएफ दो योजनाएं बाड़मेर बॉर्डर के विकास के लिए बहुत ही बेहतरीन रही है। इन योजनाओं को बंद कर दिया गया। संसद में इस मांग को उठाया गया तो कहा कि वाइब्रेंट विलेज योजना से जोड़ा जाएगा। लेकिन वाइब्रेंट विलेज योजना से भी अब तक कोई लाभ नहीं दिया है।

पत्रिका- बाघा बॉर्डर पर रिट्रीट सेरेमनी हो रही है, लेकिन बाड़मेर के मुनाबाव में नहीं, ऐसा क्यों है?

उम्मेदाराम- बाड़मेर के बॉर्डर पर टूरिज्म विकास का यह सबसे मुख्य बिन्दु है। यहां पर रेल का गेट है। बीएसएफ भी है और केवल एक स्टेडियम बनाकर इसको शुरू किया जा सकता है, लेकिन इसको नहीं कर रहे हैं। तनोट में रिट्रीट सेरेमनी करवाने की पैरवी की है। बाड़मेर के बॉर्डर विकास का यह मुख्य आधार बन जाता। मैंने इसकी मांग संसद में भी की है।

पत्रिका- बॉर्डर के विकास को लेकर इन स्थितियों का कारण क्या है?

उम्मेदाराम- बाड़मेर के बॉर्डर पर अल्पसंख्यक आबादी रहती है। भाजपा की हमेशा से तुष्टीकरण की नीति रही है। इसी कारण इस इलाके का विकास नहीं किया जा रहा है। अल्पसंख्यक आबादी के लिए रोजगार और अन्य संसाधन मिल जाएंगे। इसलिए इस बॉर्डर का विकास नहीं कर रहे। यह सब वोटबैंक की राजनीति के कारण हो रहा है।

पत्रिका- थार एक्सप्रेस बंद पड़ी है, इसको शुरू करवाने को लेकर पैरवी हुई है?

उम्मेदाराम- थार एक्सप्रेस को पुन: शुरू करवाने की मांग भी संसद में की गई थी। ऑपरेशन सिंदूर के बाद में इसको शुरू किया जा सकता था। बाघा बॉर्डर की तर्ज पर यहां पर भी वीजा देकर लोगों के आने-जाने का रास्ता खोल देना चाहिए।

पत्रिका- राजस्थान पत्रिका के इस मुद्दे के लिए आप कैसे पैरवी करेंगे?

उम्मेदाराम- मैं केंद्र सरकार को पत्र लिखूंगा और इसको लेकर संसद में भी पत्रिका के समाचारों के साथ में मुद्दा उठाऊंगा। वास्तव में यह जनहित से जुड़ा हुआ मुद्दा है।

प्रधानमंत्री को लिखा पत्र, हटे प्रतिबंध और मिले वाइब्रेंट

भाजपा नेता व शिव विधानसभा से प्रत्याशी रहे स्वरूप सिंह राठौड़ खारा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर वाइब्रेंट विलेज योजना में बाड़मेर को शामिल कर बजट जारी करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने प्रतिबंधित इलाके को लेकर भी पुनर्विचार का आग्रह किया है।

पत्र में उल्लेख किया कि वाइब्रेंट विलेज योजना में अब तक उत्तर भारत के राज्यों तक ही विकास के कार्य हुए है। बीएडीपी और बीआरजीएफ जैसी दो बड़ी योजनाएं बंद होने के बाद में वाइब्रेंट विलेज योजना से बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। इस योजना से बॉर्डर का समुचित विकास होगा।

इसलिए इस योजना को बाड़मेर-जैसलमेर सहित राजस्थान के सारे बॉर्डर के गांवों को जोड़े जाने की दरकार है। उन्होंने मांग की है कि प्रतिबंधित क्षेत्र को लेकर 1996 की अधिसूचना लागू है। इसको अब पुनर्विचार कर बदलने की जरूरत है। नियमों में शिथिलता देते हुए भारतमाल को आधार बनाया जा सकता है। इससे सीमांत क्षेत्र का विकास होगा।