
सहजन की खेती लेता किसान। फोटो- पत्रिका
बाड़मेर। जिले के किसान अब पारंपरिक खेती से आगे बढ़ते हुए बागवानी और औषधीय खेती में भी रुचि लेने लगे हैं। मिट्टी, पानी और जलवायु अनुकूल होने के कारण सहजन (मोरिंगा) की खेती क्षेत्र में खूब फल-फूल रही है। सहजन से अच्छी आमदनी मिलने पर किसान इसकी बुवाई की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
वर्तमान में जिले के 12 से 15 गांवों में किसानों ने 100 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में सहजन की बुवाई की है। बेहतर पैदावार के कारण प्रेरित अन्य किसान भी अब इस फसल को अपनाने लगे हैं। सहजन की खेती गर्म और शुष्क जलवायु में अच्छी होती है। इसके लिए अच्छी जल निकास वाली हल्की दोमट मिट्टी उपयुक्त मानी जाती है।
बुवाई फरवरी-मार्च तथा जून-जुलाई में बीज या कटिंग के माध्यम से की जाती है। फसल की बेहतर बढ़वार के लिए सप्ताह में दो से तीन बार निराई-गुड़ाई की आवश्यकता रहती है। बुवाई के 6 से 8 महीने बाद फलियों की तुड़ाई शुरू होती है, जबकि 60 से 70 दिन में पत्तियों की कटाई की जा सकती है। कम लागत में अधिक उपज और बेहतर मुनाफा मिलने से सहजन किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रहा है।
जिले के बारूदी देशांतरी नाड़ी, रामजी का गोल, गांधव कला, दबोई, अरणियाली, गुड़ामालानी, आलमपुरा, ओगाला, बोराला, भेडाणा सहित एक दर्जन से अधिक गांवों में किसानों ने सहजन की खेती की है। इन क्षेत्रों में 100 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर सहजन के पौधे इन दिनों लहलहा रहे हैं। अच्छी उपज मिलने से किसान उत्साहित हैं और उनसे प्रेरित होकर अन्य किसान भी इसकी बुवाई कर रहे हैं।
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बागवानी के बाद अब सहजन की खेती किसानों के लिए एक बेहतर विकल्प बनकर उभरी है। जिले की मिट्टी, पानी और जलवायु इसके अनुकूल है। राजस्थान के साथ गुजरात में सहजन की अच्छी मांग है। भविष्य में जिले में बड़े पैमाने पर सहजन की खेती होने की संभावना है।
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Published on:
12 Jan 2026 05:50 pm
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