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प्रभात फेरी के रास्ते पर बवाल, पुलिस पर लाठीचार्ज का आरोप, महिलाओं समेत कई घायल, छावनी बना गांव

शुक्रवार तड़के प्रभात फेरी के पुराने मार्ग को लेकर विवाद खड़ा हो गया, जब पुलिस ने रास्ता विवादित बताकर फेरी को रोक दिया। विरोध बढ़ने पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जिसमें महिलाएं और युवक घायल हो गए, जबकि हालात काबू में करने के लिए कई थानों की फोर्स और पीएसी तैनात करनी पड़ी।

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बदायूं। जिले के इस्लामनगर थाना क्षेत्र के गांव ब्योर कासिमाबाद में शुक्रवार तड़के माघ माह की प्रभात फेरी को पुलिस ने विवादित रास्ता बताकर रोक दिया। ग्रामीणों का कहना है कि प्रभात फेरी पिछले करीब 50 वर्षों से इसी रास्ते से निकलती आ रही है। फेरी रोके जाने की खबर फैलते ही गांव में तनाव फैल गया और लोग विरोध पर उतर आए।

एक दिन पहले दूसरे समुदाय के लोगों ने प्रभात फेरी के पुराने मार्ग से निकलने पर आपत्ति जताते हुए पुलिस से शिकायत की थी। इसी शिकायत के बाद शुक्रवार सुबह करीब पांच बजे इस्लामनगर पुलिस गांव पहुंची। ग्रामीण प्रभात फेरी निकालने पर अड़े रहे, जिससे स्थिति और बिगड़ गई। ग्रामीणों की भीड़ और बढ़ते गुस्से को देखते हुए पुलिस ने बिल्सी और उघैती थानों की फोर्स के साथ पीएसी को भी मौके पर बुला लिया। देखते ही देखते गांव पुलिस छावनी में तब्दील हो गया। हालात संभालने के लिए एसडीएम बिसौली राशि कृष्णा और सीओ बिल्सी भी गांव पहुंच गए।

सुबह आठ बजे चला लाठीचार्ज, मची भगदड़

आरोप है कि करीब आठ बजे हालात काबू से बाहर होते देख पुलिस ने प्रभात फेरी में शामिल लोगों पर लाठीचार्ज कर दिया। अचानक हुए लाठीचार्ज से गांव में भगदड़ मच गई। आरोप है कि पुलिस की मार से कई महिलाएं और युवक घायल हो गए। घायलों को इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया। लाठीचार्ज की सूचना मिलते ही गांव में आक्रोश और बढ़ गया। मौके पर पहुंचे एसपी देहात डॉ. हृदेश कठेरिया ने ग्रामीणों को समझाने की कोशिश की, लेकिन लोग प्रभात फेरी रोकने वाले पुलिसकर्मियों और अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग पर अड़ गए।

बैकफुट पर आई पुलिस, पुराने रास्ते से निकली फेरी

काफी देर तक चली गहमागहमी के बाद पुलिस बैकफुट पर आ गई। ग्रामीणों की मांग मानते हुए प्रभात फेरी को पुलिस की मौजूदगी में उसी पुराने मार्ग से निकलवाया गया, जिस रास्ते से वर्षों से फेरी निकलती रही है। एसपी देहात डॉ. हृदेश कठेरिया ने कहा कि शुरुआत में प्रभात फेरी को लेकर विरोध की जानकारी मिली थी, इसी कारण उसे रोका गया। बाद में पता चला कि फेरी कई वर्षों से इसी रास्ते से निकलती आ रही है, जिसके बाद उसे निकलवाया गया। उन्होंने कहा कि आगे प्रभात फेरी पर कोई रोक नहीं रहेगी।

सपा सरकार में बदला गया था मार्ग

ग्रामीणों के मुताबिक, करीब दस साल पहले सपा सरकार के दौरान एक समुदाय विशेष की आपत्ति के बाद प्रभात फेरी का मार्ग बदल दिया गया था। इस बार ग्रामीणों ने फिर से परंपरागत पुराने मार्ग से प्रभात फेरी निकालनी शुरू की, जिस पर विवाद खड़ा हो गया। गौरतलब है कि इससे एक दिन पहले गुरुवार की भोर में भी प्रभात फेरी के मार्ग को लेकर गांव में तनाव पैदा हो गया था। उस समय पुलिस ने हस्तक्षेप कर प्रभात फेरी को दूसरे रास्ते से निकलवाया था। अब लाठीचार्ज में घायल हुए लोगों के परिजन दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

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