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बांसवाड़ा, Jun 06, 2026

RGHS : राजस्थान में 6 माह से नहीं आ रहा आरजीएचएस बजट, हजारों पेंशनर एवं कार्मिक परेशान

RGHS : राजस्थान हेल्थ स्कीम (आरजीएचएस) के तहत लंबे समय से पंजीकृत मेडिकल स्टोर्स को दवाओं के मद में भुगतान ही नहीं किया जा रहा है। हजारों पेंशनर एवं कार्मिक परेशान हैं।

Banswara has not received RGHS budget for last 6 months pensioners and workers worried

RGHS : सहकारी समिति से पंजीकृत मेडिकल स्टोर पर दवा लेने पहुंचे बुजुर्ग। फोटो पत्रिका

RGHS : बांसवाड़ा जिले सहित प्रदेशभर के लाखों सरकारी कार्मिकों-अधिकारियों के साथ ही पेंशनरों एवं उनके आश्रितों की बीपी और शुगर सरकार की उधारी ने बढ़ा दी है। राजस्थान हेल्थ स्कीम (आरजीएचएस) के तहत लंबे समय से पंजीकृत मेडिकल स्टोर्स को दवाओं के मद में भुगतान ही नहीं किया जा रहा है। ऐसे में बुजुर्ग पेंशनर-कार्मिक दवा के दर पर रोज धक्के खा रहे हैं। पर, दवा विक्रेता लाखों की बाकियात बढ़ने से दवा नहीं दे रहे हैं। बात जिले की ही करें, तो जिले में पंजीकृत 19 मेडिकल स्टोर की सरकार के मत्थे करीब 8 करोड़ रुपए की उधारी चढ़ गई है। बजट के नाम पर मार्च में महज 4 फीसदी राशि मिली थी।

6 माह पहले आया था बजट

आरजीएचएस के तहत बांसवाड़ा जिले में सहकारी समिति के तहत कुल 10 तथा 9 अन्य मिलाकर कुल 19 मेडिकल स्टोर पंजीकृत हैं। इनमें सहकारी समिति के तहत पंजीकृत जिला अस्पताल में तीन और एक-एक मेडिकल स्टोर पृथ्वीगंज व हाउसिंग बोर्ड में हैं। शेष तलवाड़ा, परतापुर, बागीदोरा, गनोड़ा एवं घाटोल में हैं।

वहीं, निजी 9 मेडिकल स्टोर में अधिकांश जिला मुख्यालय पर है। इन 6 मेडिकल स्टोर को अंतिम बजट माह पूर्व दिया था। वह भी मांग की तुलना में काफी कम था। अप्रैल माह तक इन मेडिकल स्टोर की कुल बाकियात करीब 8 करोड़ रुपए के पार पहुंच गई है। इनमें सहकारी समिति के तहत पंजीकृत मेडिकल स्टोर की ही साढ़े 3 करोड़ रुपए की उधारी चढ़ी हुई है।

फैक्ट फाइल

09 प्राइ‌वेट मेडिकल स्टोर हैं पंजीकृत।
10 सहकारी समिति से पंजीकृत औषधि केन्द्र दे रहे हैं दवाएं ।
20 से 22 हजार पेंशनर और उनके आश्रित हो रहे हैं परेशान।
10 हजार से अधिक सरकारी कार्मिक भी दवाओं के लिए लगा रहे हैं चक्कर।
6 माह से नहीं मिला है बजट।
8 करोड़ रुपए से अधिक की है उधारी।

थोक विक्रेता नहीं दे रहे दवाएं

मेडिकल स्टोर संचालकों का कहना है कि वह अपनी पुरानी बाकियात ही चुका नहीं पा रहे हैं। ऐसे में थोक विक्रेताओं ने दवाएं देना बंद कर दिया है। थोक विक्रेता अब नकद पर ही दवाएं दे रहे हैं। इस पर कई मेडिकल स्टोर संचालक भी आरजीएसएस के तहत दवाएं लेने आ रहे कार्मिकों एवं पेंशनरों को नकद राशि देने पर ही दवाएं दे रहे हैं।

बजट नहीं मिल रहा है…

आरजीएचएस के तहत 10 मेडिकल स्टोर है और बजट काफी कम आ रहा है। अप्रेल 2026 तक ही 3 करोड 77 लाख 80 हजार 973 रुपए की बाकियात है। बजट मिल जाता है, तो दवा वितरण सुचारु हो पाएगा।
योगेन्द्रसिंह सिसोदिया, उप रजिस्ट्रार, सहकारी समिति, बांसवाड़ा

सरकार को तत्काल बजट देना चाहिए

जिले में 9 प्राइवेट मेडिकल स्टोर पंजीकृत हैं और वह दवाएं देने के बाद अपना मूल फंसाकर बैठे हैं। बीसियों बार ज्ञापन आदि देने के बावजूद सरकार रुपए नहीं दे रही है। सरकार को तत्काल बजट देना चाहिए।
पवनकुमार शाह, अध्यक्ष जिला केमिस्ट एसोसिएशन, बांसवाड़ा

कलक्टर-सीएमएचओ को दे चुके कई ज्ञापन


कलक्टर, सीएमएचओ, एसडीएम सभी को ज्ञापन दे-देकर थक गए हैं। पर, सरकार आगे से बजट ही नहीं दे रही है। मेडिकल स्टोर दवाएं नहीं दे रहे हैं। पेंशनर 60 साल से अधिक उम्र के हैं और उन्हें रोज बीपी-शुगर, थॉइराइड, घटिया-रोग आदि की दवाएं लेनी पड़ती है। स्थितियां ये हैं कि पेंशनर खुद अपनी पेंशन से दवाएं खरीद रहे हैं।
जगदीश भावसार, कार्यवाहक अध्यक्ष, पेंशनर समाज

सरकारी खैरात नहीं

आरजीएचएस के तहत सरकार पेंशनरों को दवाएं दे रही है। वह कोई खैरात नहीं है। कार्मिकों ने अपनी सेवावधि आरपीएमएफ में राशि कटवाई है। वह लाखों रुपए हैं। वहीं, कार्यरत कार्मिकों की भी हर माह राशि कटौती की जा रही है। सरकार को कार्मिकों-पेंशनरों का ही रुपए वापस देने है।
मदन मोहन भट्ट, वरिष्ठ पेंशनर

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