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सात गांवों की सरकारी स्कूलों के विलय का विरोध

-एआइडीएसओ और ग्रामीणों ने आदेश वापस लेने की मांग की अखिल भारतीय लोकतांत्रिक छात्र संगठन (एआइडीएसओ) की कर्नाटक राज्य समिति ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत होगनूर के कर्नाटक पब्लिक स्कूल (केपीएस) मैग्नेट स्कूल में सात गांवों की सरकारी स्कूलों को विलय कर बंद करने के निर्णय को वापस लेने की मांग की है। समिति AIDSO […]

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अखिल भारतीय लोकतांत्रिक छात्र संगठन

सरकारी स्कूलों को विलय कर बंद करने के निर्णय को वापस लेने की मांग

-एआइडीएसओ और ग्रामीणों ने आदेश वापस लेने की मांग की

अखिल भारतीय लोकतांत्रिक छात्र संगठन (एआइडीएसओ) की कर्नाटक राज्य समिति ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत होगनूर के कर्नाटक पब्लिक स्कूल (केपीएस) मैग्नेट स्कूल में सात गांवों की सरकारी स्कूलों को विलय कर बंद करने के निर्णय को वापस लेने की मांग की है।

समिति AIDSO ने कहा कि सरकार एक ओर यह दावा कर रही है कि एक भी सरकारी स्कूल बंद नहीं किया जाएगा, लेकिन चन्नपट्टण तालुक के होडिके होसहल्लि, कन्नीदोड्डी, अम्मल्लिदोड्डी, संतैमोगेनहल्लि और सुन्ना घट्टा गांवों की सरकारी स्कूलों को होगनूर केपीएस मैग्नेट स्कूल में विलय करने के लिए राज्य बजट के अगले ही दिन नोटिस जारी कर दिया गया। इन स्कूलों के विद्यार्थियों को होगनूर केपीएस मैग्नेट स्कूल भेजने के लिए शिक्षकों पर दबाव डाला जा रहा है। ऐसा नहीं करने पर बिना सूचना अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

शिक्षा अधिकारी से मुलाकात की

सरकार और शिक्षा विभाग की इस कथित अलोकतांत्रिक नीति के विरोध में एआइडीएसओ, स्कूल विकास निगरानी समिति, सार्वजनिक शिक्षा बचाओ समितियों, किसान संगठनों और कन्नड़ व प्रगतिशील संगठनों के नेताओं के साथ पांच गांवों के लोगों के प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को चन्नपट्टण के क्षेत्र शिक्षा अधिकारी से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने 7 मार्च को जारी नोटिस को तुरंत वापस लेने और किसी भी परिस्थिति में गांवों की सरकारी स्कूलों को बंद नहीं करने की मांग की।

उच्च अधिकारियों से चर्चा

क्षेत्र शिक्षा अधिकारी रामलिंगय्या ने ज्ञापन स्वीकार करते हुए कहा कि वे इस मामले में उच्च अधिकारियों से चर्चा कर उचित कदम उठाएंगे। प्रतिनिधिमंडल ने चेतावनी दी कि यदि सरकार और शिक्षा विभाग ने इस निर्णय को वापस नहीं लिया तो जनता के तीव्र विरोध का सामना करना पड़ेगा। इस दौरान एआइडीएसओ के राज्य अध्यक्ष अश्विनी के.एस., उपाध्यक्ष अपूर्वा, एसडीएमसी के राज्य अध्यक्ष उमेश, उपाध्यक्ष शंभू गौड़ा, सार्वजनिक शिक्षा बचाओ जिला समिति के अध्यक्ष मंजुनाथ सहित पांच गांवों के लोग मौजूद थे।