बलोदा बाज़ार, May 19, 2026

अमित बघेल की जमानत याचिका रद्द (photo source- Patrika)
Amit Baghel Bail Rejected: अमित बघेल को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय से बड़ा झटका लगा है। बलौदाबाजार कलेक्ट्रेट परिसर में 10 जून 2024 को हुई हिंसा, आगजनी और तोड़फोड़ मामले में उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई है। कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए फिलहाल राहत देने से इनकार किया है। इस फैसले के बाद आरोपियों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। जांच एजेंसियों का दावा है कि गवाहों के बयान, सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर उनकी भूमिका सामने आई है।
मामले में बलौदाबाजार सिटी कोतवाली थाना में अमित बघेल और उनके सहयोगियों के खिलाफ चार अलग-अलग एफआईआर दर्ज हैं। जांच के दौरान पुलिस ने गवाहों के बयान, घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल्स और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की संलिप्तता पाई। कोर्ट में प्रस्तुत केस डायरी के अनुसार घटना के दौरान अमित बघेल, अजय यादव और दिनेश कुमार वर्मा की घटनास्थल पर मौजूदगी तथा भीड़ को उकसाने में सक्रिय भूमिका प्रथम दृष्टया सामने आई है।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जांच में पर्याप्त सामग्री उपलब्ध है, जिससे आरोपियों की कथित साजिश में केंद्रीय भूमिका का संकेत मिलता है। अदालत ने माना कि यह मामला सामान्य अपराध न होकर सार्वजनिक व्यवस्था और राज्य की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला है, इसलिए यूएपीए सहित विशेष कानूनों के तहत जमानत देने के लिए निर्धारित वैधानिक मानदंड लागू होंगे।
कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि अमित बघेल के खिलाफ 17, अजय यादव के खिलाफ 13 तथा दिनेश कुमार वर्मा के खिलाफ एक अन्य मामला लंबित है। ऐसे में अन्य आरोपियों को मिली जमानत के आधार पर समानता का दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता।
हालांकि अदालत ने यह स्पष्ट किया कि यदि संरक्षित गवाहों की गवाही पूरी हो जाती है अथवा आदेश की तारीख से एक वर्ष की अवधि पूरी हो जाती है, तो आरोपी पुनः जमानत याचिका दायर कर सकते हैं। इस फैसले के बाद बलौदाबाजार हिंसा प्रकरण एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक चर्चाओं के केंद्र में आ गया है।
बलौदाबाजार में 10 जून 2024 को कलेक्ट्रेट परिसर में हुई हिंसा, आगजनी और तोड़फोड़ की घटना ने पूरे राज्य में हड़कंप मचा दिया था। इस मामले में अमित बघेल को पुलिस ने गिरफ्तार किया था और उनके खिलाफ चार अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई थीं। जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज, गवाहों के बयान और कॉल डिटेल्स के आधार पर उनकी भूमिका सामने आने का दावा किया गया।
मामला गंभीर मानते हुए इसे कानून-व्यवस्था और राज्य सुरक्षा से जुड़ा बताया गया, जिसके चलते छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट का कहना है कि पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं और मामला संगीन प्रकृति का है, इसलिए फिलहाल राहत नहीं दी जा सकती।
Published on: 19 May 2026 04:44 pm

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