
बालोद जिले के एकमात्र दंतेश्वरी मईया सहकारी शक्कर कारखाना में गन्ने की कमी के चलते गन्ना पेराई बंद हो गई है। कारखाना प्रबंधन ने इस पेराई सत्र में 65 हजार मीट्रिक टन गन्ना पेराई करने का लक्ष्य रखा था लेकिन इस बार लक्ष्य पूरा नहीं हुआ। इस साल मात्र 36 हजार 718 मीट्रिक टन गन्ना की पेराई हुई है। जबकि बीते साल 65 हजार मीट्रिक टन गन्ना पेराई हुआ था पर इस साल सबसे ज्यादा बुरी स्थिति है। दिसंबर माह के अंतिम सप्ताह में कारखाना में गन्ना पेराई शुरू हुआ था लेकिन 20 फऱवरी को पेराई बंद हो गई। कहा जाए तो इस साल मात्र दो माह ही गन्ना की पेराई कर पाए।
शक्कर कारखाना में गन्ना पेराई के बाद लगभग 37 हजार 339 क्विंटल शक्कर उत्पादन किया है। इस साल गन्ने की कमी अब जिले के इस शक्कर कारखाना के लिए अब चिंता का कारण बना हुआ है। अगर गन्ने की कमी जारी रही और गन्ना किसानों को उपेक्षा का शिकार होना पड़ता रहे तो शक्कर कारखाना के भविष्य खतरे में दिखाई दे रहा है।
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कारखाना प्रबंधन ने पड़ोसी जिला दुर्ग, बेमेतरा, कवर्धा से भी लगभग 15 से 20 हजार मीट्रिक टन गन्ना आने की उम्मीद लगा रहे थे। लेकिन पड़ोसी जिले से गन्ना नाम मात्र का आया, जिससे शक्कर कारखाना में गन्ना पेराई प्रभावित हुई।
जानकारी के मुताबिक दंतेश्वरी मईया सहकारी शक्कर कारखाना में इस गन्ना पेराई सत्र में 750 किसानों ने गन्ना बेचा चुके है। पर इस सत्र तो बेचे गए गन्ना के बदले गन्ने का भुगतान काफी देर से किया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक शक्कर कारखाना में उत्पादित शक्कर की बिक्री के भुगतान के बाद ही किसानों के खाते में राशि डाली जाएगी।
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गन्ना उत्पादक किसान लोकेन्द्र व गन्ना उत्पादक किसान के संरक्षक छगन देशमुख ने कहा कि गन्ना उत्पादक किसानों के लिए भी शासन-प्रशासन को योजना बनानी चाहिए। जैसे धान खरीदी केंद्रों में बेचने के कुछ दिन बाद धान की राशि किसानों के खाते में आ जाती है, ठीक वैसे ही सुविधा गन्ना किसानों के लिए भी हो। किसान गन्ना बेचे और कुछ दिन में भी उसकी राशि उनके खाते में आ जाए।
गन्ना उत्पादक किसान संघ के संरक्षक छगन देशमुख ने कहा विगत पांच साल से गन्ना का समर्थन मूल्य बढ़ा ही नहीं है। सिर्फ बोनस की राशि ही बढ़ रहा है पर उसका भी भुगतान समय पर नहीं होता। हर हाल में बढ़ाएं। सरकार व कारखाना प्रबंधन की कार्यप्रणाली समझ से परे हैं। अगर ऐसा ही चलता रहा तो जिले के शक्कर कारखाना में संकट के बादल छाने लगेगा क्योंकि गन्ना उत्पादक किसान काफ़ी नाराज है। किसानों ने कहा समय रहते गन्ना किसानों की भी सुध सरकार ले।
जिले में गन्ना की खेती के फायदे को लेकर कृषि विभाग, शक्कर कारखाना विभाग जरूर किसानों को बता रहा है और किसानों को प्रोत्साहित कर रहे हैं। लेकिन किसानों का रुझान गन्ने में कम व धान में ज्यादा होता दिखाई दे रहा है। मिली जानकारी के मुताबिक तीन साल पहले धान का रकबा जिले भर में लगभग 13 सौ हेक्टेयर में था जो बीते साल घटकर 11 सौ हेक्टेयर में हो गया। हालांकि, शक्कर कारखाना प्रबंधन की माने तो इस साल 1219 हेक्टेयर में किसानों ने गन्ने की खेती की है।
दंतेश्वरी मईया सहकारी शक्कर कारखाना के अधिकारी राजेंद्र राठिया ने बताया कि शक्कर कारखाना में गन्ना पेराई गन्ना की आवक कम होने की वजह से अब गन्ना पेराई बंद हो चुकी है। इस साल 37 हजार 339 मीट्रिक टन गन्ना की खरीदी व पेराई हुई है। वहीं किसानों के खाते में बेचे गए गन्ने के बदले बारी-बारी से राशि डाली जा रही है।
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Published on:
28 Feb 2026 11:21 pm
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