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पत्नी के कहने पर सगे चाचा ने 9 साल के मासूम भतीजे को ईट से कूचकर मार डाला… शव नदी में फेंका, खुद जाकर गुमशुदगी दर्ज कराई

बलिया में रिश्तों की हैवानियत ने इंसानियत को शर्मसार कर दिया। पत्नी के कहने पर सगे चाचा ने 9 साल के मासूम को बेरहमी से मार डाला। इसके बाद शव नदी में फेंका दिया। और खुद गुमशुदगी दर्ज कराई—पूरी कहानी रुला देगी।

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पकड़े गए आरोपी फोटो सोर्स विभाग

पकड़े गए आरोपी फोटो सोर्स विभाग

बलिया जिले से मानवता को झकझोर देने वाली वारदात सामने आई है। पारिवारिक तानों और भीतर सुलगती नफरत ने एक मासूम की जिंदगी छीन ली। सिर्फ 9 साल का अभिषेक, जो स्कूल से लौटकर घर आया था। उसे अपने ही चाचा-चाची की क्रूर साजिश का शिकार होना पड़ा। यह कहानी रिश्तों के टूटने और संवेदनाओं के मरने की दर्दनाक मिसाल है।

सहतवार थाना क्षेत्र के सिंगही गांव का है। यहां 25 जनवरी को अभिषेक अचानक लापता हो गया। घरवालों ने पहले आसपास तलाश की। लेकिन जब कोई सुराग नहीं मिला तो थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई गई। छह दिन तक उम्मीद और डर के बीच परिवार बच्चे की राह देखता रहा। 31 जनवरी की शाम सरयू नदी में एक शव उतराने की सूचना मिली। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव की पहचान अभिषेक के रूप में की। यह खबर सुनते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।

सीसीटीवी कैमरा ने खोला, हत्या का राज

जांच में जो सच सामने आया, उसने हर किसी को सन्न कर दिया। पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। एक वीडियो में अभिषेक अपने चाचा गणेश के साथ जाता दिखा। इसी सुराग के आधार पर पुलिस ने चाचा और उसकी पत्नी अमृता को हिरासत में लिया। पूछताछ में दोनों टूट गए। उन्होंने अपना जुर्म कबूल कर लिया। पुलिस के मुताबिक, अमृता को निःसंतान होने को लेकर जेठानी के ताने लंबे समय से चुभ रहे थे। यही कसक धीरे-धीरे नफरत में बदल गई। उसने पति से कहा कि जो दर्द उसे दिया गया। वही दर्द दूसरी को भी महसूस कराया जाए। इसी सोच ने एक मासूम की हत्या की साजिश को जन्म दिया। 23 जनवरी को योजना बनी, 24 को कोशिश नाकाम रही और 25 जनवरी को अभिषेक को मौत के घाट उतार दिया गया।

बहाने से ले गया नदी के किनारे, फिर तड़पा- तड़पा कर मार डाला

गणेश ने बहाने से बच्चे को नदी की ओर ले जाकर ईंट से सिर कुचल दिया। इसके बाद दोनों ने शव को सरयू में फेंक दिया और ऐसे घर लौट आए, मानो कुछ हुआ ही न हो। हैरानी की बात यह कि गणेश खुद थाने पहुंचकर बच्चे के गायब होने की रिपोर्ट भी दर्ज कराता रहा। ताकि किसी को शक न हो।

मां बोली- जिस तरह बेटे को तड़पा कर मरा, उसी तरह दोषी को सजा मिले

अभिषेक के पिता बाहर प्राइवेट नौकरी करते हैं। बेटे की मौत की खबर ने उन्हें भीतर से तोड़ दिया। मां आशा देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। उनका कहना है कि जिस तरह उनके बेटे को तड़पाकर मारा गया। दोषियों को वैसी ही सख्त सजा मिलनी चाहिए।