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फर्जी IAS अपने पांच साथियों के साथ गिरफ्तार, सिर्फ एक सवाल ने खोल दी पूरी पोल?

लाल-नीली बत्ती, हुटर और अफसरों वाला रौब… लेकिन बॉर्डर पर एक सवाल ने पूरी पोल खोल दी। फर्जी IAS, नकदी और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के साथ कैसे पकड़े गए आरोपी? जानिए पूरी कहानी?

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पकड़े गए आरोपी फोटो सोर्स पुलिस ट्विटर अकाउंट

पकड़े गए आरोपी फोटो सोर्स पुलिस ट्विटर अकाउंट

भारत नेपाल बॉर्डर पर रुपईडीहा चेक पोस्ट के पास पुलिस और एसएसबी ने बड़ी कार्रवाई की। लाल-नीली बत्ती और हुटर लगी लग्जरी कार से नेपाल जाने की कोशिश कर रहे पांच लोगों को पकड़ लिया गया। आरोपी खुद को बड़े अफसर बताकर सीमा पार करना चाहते थे।

बहराइच जिले के इंडो नेपाल बॉर्डर स्थित रुपईडीहा एसएसबी चेक पोस्ट पर उस समय हड़कंप मच गया। जब पुलिस और एसएसबी की संयुक्त टीम ने एक संदिग्ध इनोवा क्रिस्टा कार को रोक लिया। यह कार लाल-नीली बत्ती और हुटर के साथ हाई-प्रोफाइल अंदाज में सीमा की ओर बढ़ रही थी। कार में सवार लोग खुद को सचिवालय का वरिष्ठ अधिकारी बताते हुए बिना जांच के निकलने की कोशिश कर रहे थे।

पुलिस पूछताछ के दौरान खुली पोल

एसएसबी 42वीं वाहिनी के अधिकारियों के अनुसार, सहायक कमांडेंट अमित कटियार और प्रभारी निरीक्षक रमेश सिंह रावत के नेतृत्व में टीम ने दोपहर बाद वाहन को रोका। पूछताछ के दौरान संतोषजनक जवाब न मिलने पर जब तलाशी ली गई। तो कई चौंकाने वाली चीजें सामने आईं। कार से एक इलेक्ट्रॉनिक चिप डिवाइस, दो लाख से ज्यादा नकद रुपये, कई महंगे मोबाइल फोन और अन्य सामान बरामद हुआ।

कुछ के खिलाफ पहले से भी केस दर्ज

इसके बाद सभी पांचों लोगों को हिरासत में लेकर थाना रुपईडीहा लाया गया। पूछताछ में उनकी पहचान धर्मेंद्र सिंह, शुभम बाजपेई, अनमोल यादव, सचिन सिंह और स्वपनिल सहाय के रूप में हुई। जो सभी लखनऊ के अलग-अलग इलाकों के रहने वाले बताई जा रहे हैं पुलिस रिकॉर्ड खंगालने पर सामने आया कि इनमें से कुछ आरोपियों के खिलाफ पहले से भी अलग-अलग थानों में मुकदमे दर्ज हैं।

सुरक्षा एजेंसियां जांच में जुटी

फिलहाल पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रही हैं। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि फर्जी पहचान, सरकारी रुतबे का दिखावा और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का इस्तेमाल आखिर किस मकसद से किया जा रहा था। थाना रुपईडीहा में आवश्यक धाराओं में मुकदमा दर्ज कर सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया। जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।