भारत, Jan 14, 2026

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कई बार इंसान मेहनत भी करता है, अच्छा पैसा भी कमाता है, लेकिन फिर भी उसके जीवन में बरकत नहीं आती। कमाई होते ही खर्च निकल जाता है, कर्ज उतरने का नाम नहीं लेता और मन हमेशा तनाव में रहता है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या पैसा ही जीवन का सबसे बड़ा पैमाना बन गया है? आज के समय में इंसान को उसके ज्ञान या गुणों से नहीं, बल्कि उसके स्टेटस, गाड़ी और घर से आंका जाने लगा है। यही सोच धीरे-धीरे मानसिक अशांति और आर्थिक असंतुलन को जन्म देती है।
यह सच है कि पैसा आज की जरूरत है, लेकिन सुख और शांति का पूरा संबंध केवल धन से नहीं होता। सुंदरता, समझदारी और ज्ञान का सीधा रिश्ता पैसों से नहीं जुड़ा होता, फिर भी समाज ऐसा मानने लगा है कि जिसके पास पैसा है वही समझदार है। यही सोच इंसान को अंदर से खाली कर देती है और बरकत को रोक देती है।
शास्त्रों के अनुसार पैसों का लेन-देन करते समय समय का विशेष ध्यान रखना चाहिए। दोपहर 12:30 बजे के बाद पैसा देना शुभ माना जाता है, क्योंकि उस समय सूर्य पूरी तरह सक्रिय होते हैं। वहीं संध्या के समय, खासकर शाम 6 बजे से 7:30 बजे के बीच पैसा न तो मांगना चाहिए और न ही देना चाहिए। इससे आर्थिक रुकावटें बढ़ती हैं।
शनिवार के दिन धन का प्रदर्शन करना, जैसे महंगे गहने, मोबाइल या कैश दिखाना, कर्ज बढ़ने का कारण बन सकता है। धन को दिखाने के बजाय संभालकर रखना ही बरकत को बढ़ाता है।
अगर आप निवेश कर रहे हैं, जैसे जमीन, पॉलिसी या बैंक सेविंग, तो 9, 18 या 27 तारीख को निवेश करना शुभ माना जाता है। कर्ज लेते समय मन में 757 संख्या का 11 बार जाप करना और सुबह 12 बजे से पहले कर्ज लेना जल्दी मुक्ति दिलाता है।
सैलरी मिलने के बाद कुछ पैसे अलग रखकर महीने की 5 तारीख को बैंक में कैश जमा करना धन स्थिरता और समृद्धि बढ़ाता है। 5 अंक को प्रोस्पेरिटी और स्थिरता का नंबर माना जाता है।
शुक्रवार की रात पर्स में रखे पैसे घर के मंदिर में रखना और शनिवार सुबह कुछ पैसे वहीं छोड़कर बाकी वापस पर्स में रखना शुभ होता है। शनिवार को पीपल का पत्ता गंगाजल से धोकर उस पर चंदन से स्वास्तिक बनाकर पर्स में रखने से धन की कमी नहीं होती।
Updated on: 14 Jan 2026 02:57 pm

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