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बीना-कोटा रेल लाइन पर फेल हुआ इंजन, थमे ट्रेनों के पहिए; बूंद-बूंद पानी को तरसे यात्री

MP News: मध्य प्रदेश के अशोकनगर में उस वक्त ट्रेन के पहिए थम गए, जब बीना-कोटा रेलवे ट्रैक पर इंजन फेल हो गया।

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MP News: मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले में सोमवार की दोपहर बीना-कोटा रेलवे ट्रैक पर सिस्टम की खामी और बदइंतजामी की दोहरी मार यात्रियों पर पड़ी। गुन्हेरू बामोरी से पिपरई के बीच ट्रैक की चढ़ाई चढ़ते वक्त एक लोडेड मालगाड़ी का इंजन जवाब दे गया। नतीजा यह हुआ कि पीछे आ रही बीना-ग्वालियर पैसेंजर ट्रेन को गुन्हेरू बामोरी स्टेशन पर रोक दिया गया। करीब1 घंटे 50 मिनट तक ट्रेन खड़ी रही, लेकिन असली मुसीबत ट्रेन का रुकना नहीं, बल्कि स्टेशन पर पानी का अकाल था। दोपहर की गर्मी में प्यास से परेशान यात्री प्लेटफार्म पर इधर-उधर भटकते रहे, लेकिन प्यास बुझाने कोई इंतजाम नहीं।

दरअसल, पूरा मामला सोमवार की दोपहर का बताया जा रहा है। जब एक लोडेड मालगाड़ी गुन्हेरू बामोरी से पिपरई की तरफ बढ़ रही थी। इस सेक्शन में ट्रैक पर ऊंचाई होने के कारण मालगाड़ी का इंजन लोड नहीं खींच पाया और बीच रास्ते में ही फेल हो गया। मालगाड़ी के खड़े होते ही पीछे का पूरा ट्रैफिक जाम हो गया। इसके चलते दोपहर 1:30 बजे गुन्हेरू बामोरी पहुंची बीना-ग्वालियर पैसेंजर को वहीं रोक दिया गया।

हैंडपंप से निकला लाल पानी

ट्रेन रूकते ही यात्री पानी की तलाश में नीचे उतरे, लेकिन स्टेशन में पानी की कोई व्यवस्था नहीं थी। स्टेशन पर दोनों नल सिर्फ शोपीस के लिए थे। हताश यात्री खाली बोतलें लेकर जान जोखिम में डालते हुए पटरी पार कर प्लेटफॉर्म क्रमांक-1 की तरफ दौड़े, लेकिन वहां भी निराशा हाथ लगी। प्लेटफॉर्म क्रमांक-2 के पास एक हैंडपंप दिखा, जिस पर भीड़ टूट पड़ी। यात्रियों ने करीब 10 मिनट तक लगातार हैंडल चलाया, तब जाकर थोड़ा पानी आया। लेकिन किस्मत यहां भी खराब रही। कुछ ही देर में हैंडपंप से मटमैला और लाल रंग का पानी निकलने लगा, जिसे पीकर प्यास बुझाना संभव नहीं था।

इस छोटे से स्टेशन पर पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधा न होने से सैकड़ों यात्री 1 घंटे 50 मिनट तक गला गीला करने के लिए तरसते रहे।

इंजन आने के बाद ट्रैक खुला

काफी मशक्कत के बाद रेलवे प्रशासन ने अशोकनगर से दूसरा इंजन मंगवाया। इस इंजन ने गुन्हेरू बामोरी पहुंचकर मालगाड़ी को पीछे से धक्का दिया और उसे पिपरई स्टेशन तक पहुंचाया। ट्रैक क्लियर होने के बाद दोपहर 3:20 बजे बीना-ग्वालियर पैसेंजर को हरी झंडी मिली। तब जाकर यात्रियों ने राहत की सांस ली।

यात्रियों का कहना है कि यह घटना रेलवे के उन दावों की पोल खोलती है। जिनमें छोटे स्टेशनों पर भी अमृत भारत जैसी सुविधाओं की बात कही जाती है। इंजन का फेल होना एक तकनीकी खामी हो सकती है, लेकिन प्लेटफॉर्म पर पीने का साफ पानी न होना सिस्टम की विफलता है।