International News: वाशिंगटन में इजरायल और लेबनान के बीच युद्धविराम पर सहमति बनने के तुरंत बाद एक गाड़ी पर इजरायली ड्रोन हमला हुआ है, जिसमें कई लोग घायल हो गए। इस हमले ने शांति समझौते की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
US-Iran conflict : पश्चिम एशिया से इस वक्त एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। वाशिंगटन में इजरायल और लेबनान के शीर्ष अधिकारियों के बीच लंबे दौर की बैठक के बाद आखिरकार युद्ध पर विराम लगाने की सहमति बन गई थी। दोनों ही पक्ष युद्धविराम के लिए तैयार नजर आ रहे थे, लेकिन इस बीच अचानक हुए एक ड्रोन हमले ने शांति के दावों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। संघर्ष विराम की घोषणा के कुछ ही देर बाद लेबनान में एक वाहन को निशाना बनाकर इजरायली ड्रोन से हमला किया गया, जिसमें कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। इस घटना के बाद से क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है।
सुत्रों के मुताबिक, अमेरिका की मध्यस्थता में वाशिंगटन डीसी में दोनों देशों के राजनयिकों के बीच कई महत्वपूर्ण बैठकें हुईं। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य महीनों से चल रहे खूनी संघर्ष को रोकना और नागरिकों की सुरक्षा तय करना था। जब दोनों देशों के अधिकारी युद्ध रोकने का मन बना चुके थे, ठीक उसी वक्त जमीन पर हालात बिल्कुल उलट नजर आए। लेबनान के स्थानीय मीडिया के अनुसार, एक संदिग्ध वाहन को इजरायली ड्रोन ने निशाना बनाया। इस हमले की चपेट में आने से कई आम नागरिक और राहगीर बुरी तरह जख्मी हो गए, जिन्हें नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
इस सीजफायर की औपचारिक घोषणा और ड्रोन स्ट्राइक से ठीक पहले, लेबनान के सशस्त्र संगठन हिजबुल्लाह की तरफ से भी बड़ी कार्रवाई की गई थी। हिजबुल्लाह ने दावा किया था कि उसने दक्षिणी लेबनान के कंतारा इलाके में मौजूद इजरायली सैनिकों को निशाना बनाते हुए 'रॉकेटों की बौछार' की थी। इसके साथ ही सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण 'ब्यूफोर्ट कैसल' के पास तैनात इजरायली टुकड़ियों पर हिजबुल्लाह ने कई आत्मघाती ड्रोन से भी हमला बोला था। जानकारों का मानना है कि इजरायल का ताजा ड्रोन हमला हिजबुल्लाह के इसी एक्शन का जवाबी पलटवार हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि लेबनान में हिजबुल्लाह को सीधे तौर पर ईरान का समर्थन प्राप्त है। ऐसे में लेबनान और इजरायल के बीच छिड़ी यह जंग असल में ईरान बनाम इजरायल के बड़े क्षेत्रीय युद्ध का हिस्सा है। सीजफायर की मेज पर सहमति बनने के बाद भी अगर इस तरह के घातक हमले जारी रहे, तो शांति समझौता कागजों तक ही सीमित रह जाएगा। वाशिंगटन में हुए समझौते के भविष्य पर अब संशय के बादल मंडराने लगे हैं और आने वाले घंटे इस पूरे क्षेत्र की दशा और दिशा तय करेंगे।
इस घटना पर अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक हलकों में गहरी चिंता व्यक्त की जा रही है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि वे इस हमले की रिपोर्टों की जांच कर रहे हैं और दोनों पक्षों से सीजफायर की शर्तों का पूरी तरह पालन करने की अपील की गई है। वहीं, लेबनान के स्थानीय प्रशासन ने इसे इजरायल की तरफ से धोखेबाजी करार दिया है।
आने वाले समय में यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि क्या इस ड्रोन हमले के बाद हिजबुल्लाह अपनी तरफ से रॉकेट हमलों की तीव्रता और बढ़ाता है या नहीं। साथ ही, इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से इस हमले के सैन्य कारणों को लेकर आधिकारिक बयान आना अभी बाकी है।
इस पूरे घटनाक्रम का एक मानवीय पहलू यह भी है कि महीनों बाद लेबनान और उत्तरी इजरायल के सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लाखों विस्थापित नागरिकों को अपने घर लौटने की उम्मीद जागी थी। सीजफायर की खबर से जो लोग जश्न मना रहे थे, वे इस ताजा हमले के बाद एक बार फिर बंकरों में छिपने के लिए मजबूर हो गए हैं।