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समंदर में ईरान की बादशाहत! होर्मुज में ‘नो एंट्री’ के खौफ के बीच 24 घंटे में निकले 25 जहाज,आखिर ऐसा कैसे हुआ ?

IRGC: ईरान की आईआरजीसी नौसेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य में अपनी निगरानी सख्त कर दी है। पिछले 24 घंटों में 25 व्यापारिक और तेल जहाजों को कड़ी सुरक्षा के बीच यहां से सुरक्षित निकाला गया है।

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होर्मुज जलडमरूमध्य से 25 जहाज गुजर चुके हैं। ( फोटो: ANI)

Strait of Hormuz: दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक, होर्मुज जलडमरूमध्य से पिछले 24 घंटों के अंदर कम से कम 25 जहाजों ने सुरक्षित यात्रा की है। ग्लोबल शिपिंग के लिहाज से यह मार्ग बेहद अहम है। इन जहाजों में बड़े तेल टैंकर और वाणिज्यिक कंटेनर शामिल हैं। ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी 'फार्स' के अनुसार, इस्लामिक रिवोल्युशनरी गार्ड कोर की नौसेना ने कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल के बीच इन जहाजों को सफलतापूर्वक पार कराया है।

समुद्री चैनल पर आंकड़ों में लगातार उतार-चढ़ाव

इस अहम समुद्री चैनल पर जहाजों की आवाजाही के आंकड़ों में हर दिन बदलाव देखने को मिल रहा है। आईआरजीसी नौसेना के अनुसार, शुक्रवार को 35 जहाजों ने उनकी सीधी सुरक्षा और समन्वय में इस मार्ग को पार किया था। वहीं, गुरुवार को यह संख्या 31 थी, जबकि सप्ताह के शुरुआती दिनों में 26 वाणिज्यिक जहाज यहां से गुजरे थे। इसका सीधा अर्थ यह है कि ईरान इस इलाके में अपनी कठोर परिचालन शक्ति दिखा रहा है। अब बिना आधिकारिक परमिट और सुरक्षा मंजूरी के किसी भी जहाज का इस रास्ते से गुजरना असंभव हो गया है।

युद्ध के बाद ईरान का कड़ा कंट्रोल

अमेरिका और इजरायल के साथ हुए संघर्ष के बाद इस इलाके के भू-राजनीतिक हालात पूरी तरह बदल गए हैं। युद्धविराम की घोषणा के बावजूद, तेहरान ने इस जलमार्ग पर अपना दबदबा और भी मजबूत कर लिया है। ईरान की सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने दुश्मन देशों के जहाजों को इस चैनल में घुसने नहीं देगी। इसके अलावा, जो भी अन्य विदेशी जहाज इस रास्ते से सुरक्षित निकलना चाहते हैं, उन पर ईरान ने पारगमन शुल्क लगाने की नीति लागू कर दी है।

वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर असर

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का वह 'चोकपॉइंट' है, जहां से वैश्विक पेट्रोलियम व्यापार का लगभग एक-चौथाई हिस्सा और तरलीकृत प्राकृतिक गैस का 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। इस मार्ग पर ईरान की इस सख्ती का असर सीधे दुनिया भर के देशों की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ता है। रोजाना जारी होने वाले ये जहाजों की आवाजाही के आंकड़े महज रिपोर्ट नहीं हैं, बल्कि यह साबित करते हैं कि सैन्य और कूटनीतिक तनाव के बीच भी ईरान दुनिया के ऊर्जा बाजार को प्रभावित करने की अपनी ताकत का खुलकर प्रदर्शन कर रहा है। (इनपुट: ANI)