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चीन का नया शोध: युद्ध के हालात में खुद फैसले ले सकेंगे एल्गोरिदम ड्रोन स्वार्म

Battlefield Technology, Drone Operations: चीन के शोधकर्ताओं ने HG-STR एल्गोरिदम विकसित किया है, जो ड्रोन स्वार्म को बेहतर समन्वय, त्वरित निर्णय और जैमिंग की स्थिति में भी प्रभावी ढंग से मिशन पूरा करने में सक्षम बना सकता है।

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Drone (File Photo- IANS)

China Drone Technology: चीन की शोध टीम ने एक नया एल्गोरिदम विकसित किया है, जिसे एचजी-एसटीआर (हेटरोजीनियस ग्राफ स्पेशियो-टेम्पोरल रीजनिंग) नाम दिया गया है। यह एल्गोरिदम ड्रोन स्वार्म यानी कई ड्रोन के समूह को एक साथ मिलकर काम करने की क्षमता देने के लिए बनाया गया है। इस उन्नत तकनीक को लेकर दावा है कि यह भविष्य में युद्ध के तरीके बदल सकती है, खासकर उन परिस्थितियों में जहां दुश्मन इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग कर रहा हो और ड्रोन की संचार तथा देखने की क्षमता बाधित हो रही हो।

यह शोध शीआन की नॉर्थवेस्टर्न पॉलिटेक्निकल यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर झांग डोंग की टीम ने किया है। मौजूदा समय में अधिकतर ड्रोन ऑपरेशन इंसानों द्वारा नियंत्रित होते हैं। लेकिन इस नई तकनीक का उद्देश्य ऐसे हालात में भी काम करना है, जहां ड्रोन को मानव नियंत्रण की आवश्यकता न हो और वे खुद ही निर्णय ले सकें।

दोस्त-दुश्मन की पहचान करने में कारगर

शोधकर्ताओं के अनुसार, पारंपरिक सिस्टम सभी जानकारी को एक जैसी मानते हैं, जैसे दोस्त, दुश्मन और जमीन की स्थिति। इससे भ्रम की स्थिति बन सकती है। लेकिन इस एल्गोरिदम से ऐसी संरचना बनाई गई है, जिसमें हर चीज (दोस्त, दुश्मन और प्राथमिकता) को उसकी सही पहचान के साथ अलग-अलग श्रेणी दी जा सके।

चीन की इस नई तकनीक को सैन्य विशेषज्ञ भविष्य के नेटवर्क-केंद्रित युद्ध की दिशा में बड़ा कदम मान रहे हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि एचजी-एसटीआर एल्गोरिदम जटिल और तेजी से बदलते युद्धक्षेत्र में ड्रोन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करता है। इससे मिशन की सफलता दर बढ़ सकती है और मानव हस्तक्षेप पर निर्भरता काफी कम हो सकती है।

युद्ध के मैदान त्वरित निर्णय लेने में सक्षम

  • एचजी-एसटीआर एल्गोरिदम की सबसे बड़ी खासियत इसकी गति है, जो केवल 6.6 मिली सेकंड में निर्णय ले सकता है।
  • हर एक ड्रोन को 'मेमोरी' दी गई है। संपर्क टूटने पर मेमोरी मॉड्यूल की मदद से ड्रोन अपने साथी और दुश्मन की लोकेशन ध्यान रख सकता है।
  • स्तरीय ढांचे में बना यह सिस्टम, पहले तय करता है कि खोज करनी है या हमला। फिर भ्रम की स्थिति से बचने के लिए विशिष्ट लक्ष्य चुनकर क्रमबद्ध तरीके से काम करता है।
  • संचार की सीमा कम होने पर भी लक्ष्यों को 100 प्रतिशत तक खत्म करने के लिए निर्देशित करने में सक्षम।