# श्री गंगानगर

एमएसपी का मेगा मिशन: 58 केंद्रों पर 4.90 लाख टन गेहूं खरीद, किसान को सीधा फायदा

श्रीगंगानगर.प्रदेश के सबसे बड़े गेहूं उत्पादक जिलों में शामिल श्रीगंगानगर में इस बार गेहूं खरीद को लेकर मेगा मिशन शुरू किया गया है। जिले में 58 खरीद केंद्रों के जरिए 4.90 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य तय किया गया है। किसानों को 2585 रुपए एमएसपी के साथ 150 रुपए बोनस मिलाकर कुल 2735 […]

2 min read

श्रीगंगानगर.प्रदेश के सबसे बड़े गेहूं उत्पादक जिलों में शामिल श्रीगंगानगर में इस बार गेहूं खरीद को लेकर मेगा मिशन शुरू किया गया है। जिले में 58 खरीद केंद्रों के जरिए 4.90 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य तय किया गया है। किसानों को 2585 रुपए एमएसपी के साथ 150 रुपए बोनस मिलाकर कुल 2735 रुपए प्रति क्विंटल का भुगतान सीधे जनआधार लिंक बैंक खाते में किया जाएगा।16 मार्च से शुरू हुई खरीद प्रक्रिया 30 जून तक चलेगी। जिले में एफसीआई, तिलम संघ, आरएसएफसीएससी, एनएएफडीडी और एफसीसीएफ जैसी एजेंसियां सक्रिय हैं। एफसीआई 24 केंद्रों पर सबसे ज्यादा खरीद करेगा, जबकि तिलम संघ और आरएसएफसीएससी भी बड़ी भूमिका निभाएंगे।

सीमित ऑन-स्पॉट टोकन की सुविधा

इस बार खरीद प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाया गया है। किसानों को स्लॉट बुकिंग की सुविधा दी गई है, जिससे वे 6 अप्रेल से 31 मई के बीच अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी सप्ताह में फसल बेच सकते हैं। बायोमेट्रिक सत्यापन के जरिए खरीद होगी, जिससे गड़बड़ी की संभावना कम होगी। बिना टोकन आने वाले किसानों के लिए भी सीमित ऑन-स्पॉट टोकन की सुविधा रखी गई है। वहीं 70 वर्ष से अधिक उम्र के किसान अपने प्रतिनिधि के माध्यम से भी उपज बेच सकेंगे।

गिरदावरी के आधार पर खरीद तय होगी

गिरदावरी के आधार पर खरीद तय होगी, लेकिन केंद्र संचालक को 5 प्रतिशत अतिरिक्त खरीद की छूट दी गई है। यदि किसी किसान की फसल गुणवत्ता कारणों से रिजेक्ट होती है, तो उसे दोबारा पंजीकरण का मौका भी मिलेगा।

श्रीगंगानगर जिला एक नजर में

  • कुल लक्ष्य: 4,90,684 मीट्रिक टन
  • कुल केंद्र: 58 (27 मंडी, 31 फोकल)
  • एफसीआई : 24 केंद्र, 2,01,256 मीट्रिक टन
  • तिलम संघ: 21 केंद्र, 1,27,090 मीट्रिक टन
  • आरएसएफसीएससी: 7 केंद्र, 1,56,392 मीट्रिक टन
  • अन्य एजेंसियां भी खरीद में शामिल

अन्य एजेंसियां भी खरीद में शामिल

इस वर्ष गेहूं खरीद प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी, सुगम और तकनीक आधारित बनाया गया है। बायोमेट्रिक सत्यापन,स्लॉट बुकिंग और सीधे खाते में भुगतान जैसी व्यवस्थाएं लागू की गई हैं। सभी केंद्रों पर मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित कर किसानों को बिना परेशानी समय पर उपज बेचने और भुगतान पाने की सुविधा दी जा रही है।

कविता सिहाग, जिला रसद अधिकारी, श्रीगंगानगर