Clerk Bribe: आदिम जाति कल्याण विभाग में पदस्थ एक बाबू को रीवा लोकायुक्त पुलिस ने चपरासी से रिश्वत लेते हुए रंगेहाथों पकड़ा।
Singrauli Lokayukta Trap: मध्यप्रदेश में रिश्वतखोर अधिकारी-कर्मचारियों पर कार्रवाई का सिलसिला लगातार जारी है। लगभग हर दूसरे दिन कहीं न कहीं लोकायुक्त टीम रिश्वतखोर अधिकारी-कर्मचारियों को रिश्वत लेते हुए रंगेहाथों पकड़ रही है लेकिन इसके बावजूद रिश्वतखोर बाज आते नजर नहीं आ रहे हैं। ताजा मामला सिंगरौली जिले का है जहां आदिम जाति कल्याण विभाग में पदस्थ बाबू को लोकायुक्त रीवा की टीम ने चपरासी से रिश्वत लेते हुए रंगेहाथों पकड़ा है।
सिंगरौली जिले की देवसर तहसील के नौढिया वीरान गांव के रहने वाले श्रवण तिवारी ने लोकायुक्त कार्यालय रीवा में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में फरियादी ने बताया कि वो आदिवासी विकास परियोजना देवसर में साल 2020 भृत्य के पद पर कार्यरत है। उसकी वर्ष 2024 से 2026 तक वेतन वृद्धि नहीं लगी है। जब वो अपनी वेतन वृद्धि लगवाने एवं एरियर की राशि निकलवाने के लिए सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग सिंगरौली के बाबू मुन्नालाल वर्मा के पास पहुंचा और आवेदन दिया तो उससे बाबू ने 7 हजार रुपये रिश्वत की मांग की।
फरियादी श्रवण तिवारी की शिकायत की लोकायुक्त टीम ने जांच की और शिकायत सही पाए जाने पर शुक्रवार को फरियादी श्रवण तिवारी को रिश्वत के 5 हजार रुपये देने के लिए भेजा। रिश्वतखोर बाबू मुन्नालाल वर्मा ने रिश्वत की रकम देने के लिए फरियादी को अपने कार्यालय में बुलाया। यहां पहले से ही सादे कपड़ों में लोकायुक्त के सदस्य मौजूद थे, जैसे ही बाबू ने रिश्वत के पैसे फरियादी से लिए तो लोकायुक्त की टीम ने उसे रंगेहाथों पकड़ लिया। आरोपी के विरुद्ध धारा 7 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 संशोधन अधिनियम 2018 के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध किया गया । ट्रैप दल में अधिकारी एस राम मरावी निरीक्षक, संदीप भदोरिया निरीक्षक विपुस्था लोकायुक्त कार्यालय रीवा शामिल रहे।
इधर शुक्रवार को ही मध्यप्रदेश के इंदौर में लोकायुक्त टीम ने शासकीय हायर सेकेंडरी विद्यालय बालक क्रमांक-1 के प्राचार्य और नोडल अधिकारी राजकुमार चेलानी को 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा है। प्राचार्य के खिलाफ द इंटरनेशनल कॉन्वेंट स्कूल के संचालक रवि जायसवाल ने लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में फरियादी ने शिकायत में बताया था कि स्कूल के खिलाफ हुई एक शिकायत के निराकरण के लिए जब वो संकुल प्राचार्य राजकुमार सेलानी के पास पहुंचा तो उन्होंने 10 हजार रुपये रिश्वत की मांग की। लोकायुक्त टीम ने जब रिश्वतखोर प्राचार्य को रंगेहाथों पकड़ा तो वो मीडिया को देखकर मुंह छिपाते नजर आया।