Government Offices: छत्तीसगढ़ मंत्रालय में मोबाइल नेटवर्क बड़ा संकट बना हुआ है। अधिकारी-कर्मचारी कई बार केबिन से निकलकर गलियारों, खिड़कियों या भवन के खुले हिस्सों तक जाना पड़ रहा है।
Chhattisgarh News: प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक केंद्र मंत्रालय और संचालनालय भवन में इन दिनों अधिकारी-कर्मचारी एक अलग तरह की परेशानी से जूझ रहे हैं। करोड़ों रुपए की लागत से बने आधुनिक कार्यालयों में मोबाइल नेटवर्क की समस्या इतनी गंभीर हो गई है कि कई विभागों के कर्मचारी अपने केबिन के भीतर न तो ठीक से बात कर पा रहे हैं और न ही इंटरनेट आधारित कार्य सुचारु रूप से कर पा रहे हैं। स्थिति यह है कि फोन कॉल करने या प्राप्त करने के लिए कर्मचारियों को कई बार केबिन से निकलकर गलियारों, खिड़कियों या भवन के खुले हिस्सों तक जाना पड़ रहा है।
इस समस्या को लेकर कर्मचारी संगठनों ने भी आवाज उठानी शुरू कर दी है। मंत्रालयीन कर्मचारी संघ ने विभागीय वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखकर नेटवर्क व्यवस्था में सुधार की मांग की है। संघ का कहना है कि डिजिटल शासन और ई-ऑफिस व्यवस्था के दौर में संचार बाधित होने से कामकाज प्रभावित हो रहा है।
जानकारी के अनुसार, मंत्रालय और संचालनालय के कई ब्लॉकों में मोबाइल नेटवर्क बेहद कमजोर है। मोटी दीवारों, आधुनिक निर्माण सामग्री और बंद संरचना के कारण विभिन्न कंपनियों के मोबाइल नेटवर्क अंदर तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। कई बार अधिकारियों को महत्वपूर्ण कॉल ड्रॉप होने की समस्या का सामना करना पड़ता है, जबकि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, ऑनलाइन बैठक और तत्काल सूचना आदान-प्रदान में भी बाधा आती है।
पिछले दिनों एक विभाग में केंद्र सरकार की समयबद्ध समीक्षा बैठक से संबंधित दस्तावेजों पर अंतिम अनुमोदन लेना था। संबंधित अधिकारी अपने केबिन में मौजूद थे, लेकिन मोबाइल नेटवर्क नहीं मिलने के कारण उनसे संपर्क नहीं हो सका। कर्मचारियों ने कई बार फोन किया, लेकिन कॉल नहीं लगी। बाद में अधिकारी को ढूंढ़ने के लिए स्टाफ को दूसरे ब्लॉक तक जाना पड़ा। करीब आधे घंटे की देरी के बाद फाइल आगे बढ़ सकी। कर्मचारियों का कहना है कि ऐसी घटनाएं अब आम हो गई हैं।
राज्य शासन लगातार ई-गवर्नेंस, ऑनलाइन मॉनीटरिंग और पेपरलेस कार्यालय व्यवस्था को बढ़ावा दे रहा है। अधिकांश विभाग वॉट्सऐप समूहों, वीडियो कॉल और क्लाउड आधारित प्रणालियों के जरिए कार्य कर रहे हैं। ऐसे में नेटवर्क की खराब स्थिति प्रशासनिक दक्षता को प्रभावित कर रही है। कई कर्मचारियों का कहना है कि इंटरनेट आधारित एप्लीकेशन और ओटीपी आधारित प्रक्रियाओं में भी दिक्कतें आती हैं।
इधर, छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने भी भवनों के भीतर मोबाइल सिग्नल बढ़ाने के लिए इन-बिल्डिंग नेटवर्क सॉल्यूशन या सिग्नल बूस्टर जैसी तकनीकी व्यवस्था स्थापित करने की मांग की है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं किया गया तो डिजिटल कार्य संस्कृति पर इसका प्रतिकूल असर पड़ेगा।
छत्तीसगढ़ सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। दरअसल नौकरशाही के गलियारों में लंबे से चल रही लालफीता शाही परंपरा अब खत्म हो जाएगी। राज्य सरकार ने 1 जून से मंत्रालय में नई व्यवस्था लागू करने जा रही है। जिसके तहत अब ई-फाइल से अफसर काम स्वीकार करेंगे। इस बदलाव के कई मायने हैं। वहीं सबसे खास बात यह है कि अब कागजात को फाइलों में दबाकर रोक देना ये नहीं होगा। अब एक क्लिक में सभी जानकारी अफसरों तक पहुंच जाएगी।
1 जून से नई व्यवस्था के तहत सभी फाईलें ई माध्यम से ली जाएंगी। अफसर हार्ड कापी स्वीकार नहीं करेंगे। छत्तीसगढ़ सरकार ने अपने प्रशासनिक कामकाज में पारदर्शिता, जवाबदेही और गति लाने के उद्देश्य से एक बड़ा नीतिगत बदलाव किया है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी नए आदेशों के अनुसार, 1 जून 2026 से राज्य के सभी सरकारी कार्यालयों में फाइलों का संपादन केवल 'ई-ऑफिस' पोर्टल के माध्यम से ही किया जाएगा।