Bus Fare Hike: छत्तीसगढ़ में बस किराया बढ़ने की अटकलों के बीच परिवहन विभाग ने बस मालिकों को सख्त चेतावनी दी है। विभाग ने साफ किया है कि बिना अनुमति किराया बढ़ाने पर बस जब्त करने से लेकर परमिट निरस्त करने तक की कार्रवाई की जा सकती है।
रायपुर@अश्वनी कुमार प्रभात। Chhattisgarh Bus Fare Hike: यात्री बसों का किराया बिना इजाजत बढ़ाने पर वाहन जब्त कर चालान के साथ परमिट निरस्त होगा। किराया बढ़ाने की जानकारी मिलने पर परिवहन विभाग ने कड़ी कार्रवाई करने की चेतावनी दी है। इस संबंध में बस मालिकों की बैठक लेकर किराए बढ़ाने पर चर्चा की गई। इस दौरान बस मालिकों ने बताया कि राज्य द्वारा 2021 में किराया बढ़ाया गया था। 6 साल बाद डीजल की कीमत बढ़ने पर किराए में बढ़ाने की मांग की।
परिवहन आयुक्त डी रविशंकर ने आश्वासन दिया कि अन्य राज्यों के दरों का तुलनात्मक अध्ययन कर जल्द ही निर्णय लिया जाएगा। लेकिन, इसके पहले बिना अनुमति यात्रियों से मनमर्जी का किराया वसूल न करें।
अखिल भारतीय पर्यटक परमिट का स्टेज कैरिज के रूप में संचालन किए जाने की शिकायत पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। जांच के दौरान पकड़े जाने पर 10 गुना जुर्माना और परमिट को हमेशा के लिए निरस्त कर दिया जाएगा। साथ ही 2 साल तक का इसका रिकॉर्ड सुरक्षित रखना होगा।
राज्य के भीतर स्टेज कैरिज वाले परमिट में चलने वाली यात्री बसों में क्षमता के अनुसार 25 फीसदी महिला यात्रियों के लिए आरक्षित कर बोर्ड स्पष्ट रूप से सूची लगानी होगी। वहीं, दिव्यांगजनों के लिए न्यूनतम 3 सीटें आरक्षित रखते हुए उनके चढ़ने-उतरने की सुविधा उपलब्ध कराना होगा। बस चालक एवं परिचालक की पहचान के लिए पहचान पत्र जरूरी होंगे। इसमें नाम, पता, फोटो, लाइसेंस, बैज क्रमांक, परमिट विवरण एवं वैधता अंकित रहेगी।
रायपुर यातायात महासंघ के पूर्व संरक्षक एवं पूर्व महापौर प्रमोद दुबे ने परिवहन मंत्री केदार कश्यप को पत्र लिखकर ऑटो मोड में किराया बढ़ाने की मांग की है। डीजल की कीमतें बढ़ने पर इसके अनुरूप ऑटोमेटिक उतने प्रतिशत यात्री किराए में इजाफा किया जाना चाहिए। दुबे ने मुख्यमंत्री से इसका स्थाई हल निकालने की मांग की है।
महासंघ का तर्क है कि प्रदेश में यात्री किराए में आखिरी बार संशोधन साल 2021 में किया गया था। पिछले तीन सालों में वाहनों के रखरखाव और संचालन का खर्च भी लगातार बढ़ता जा रहा है। संगठन के मुताबिक, किराए में उस अनुपात में बढ़ोतरी नहीं हुई है, जिससे अब बस संचालन आर्थिक रूप से कठिन हो गया है।