Chhattisgarh Urban Local Bodies: प्रदेश के 194 नगरीय निकायों में ढाई साल से खाली पड़े एल्डरमैन (मनोनीत पार्षद) पदों पर नियुक्ति की उम्मीद फिर से जगी है। उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव के बयान के बाद संकेत मिले हैं कि नियुक्ति प्रक्रिया तेज हो गई है और जल्द ही सूची जारी की जा सकती है।
Chhattisgarh Alderman Appointment 2026: भाजपा सरकार के ढाई साल बाद भी नगरीय निकायों में एल्डरमैन की नियुक्ति नहीं की गई है। एल्डरमैन बनने का ख्वाब संजोए भाजपा पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं ने तो आस ही छोड़ दी थी, क्योंकि निकायों में सरकार बनने के छह माह में ही एल्डरमैनों की नियुक्ति की परंपरा थी। लेकिन इस सरकार ने ढाई साल बाद भी नियुक्ति नहीं की है।
चूंकि अब फिर से इस मामले काे लेकर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री और विभागीय मंत्री अरुण साव ने बयान दिया है कि निकायों में एल्डरमैनों की नियुक्ति की प्रक्रिया तेजी से चल रही है, तो भाजपाइयों में फिर से उम्मीद जगी है। प्रदेश के नगरीय निकायों में एल्डरमैन (मनोनीत पार्षद) नियुक्ति का मामला एक बार फिर चर्चा आ गया है।
प्रदेश में वर्तमान में 194 नगरीय निकाय हैं, जिनमें नगर निगम, नगर पालिका परिषद और नगर पंचायत शामिल हैं। नगरीय निकाय अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार नगर निगमों में अधिकतम 10 तथा नगर पालिका और नगर पंचायतों में निर्धारित संख्या के अनुसार एल्डरमैन नियुक्त किए जा सकते हैं। ऐसे में अनुमान है कि प्रदेशभर में 700 से अधिक एल्डरमैन पदों पर नियुक्ति की जा सकती है, जो भाजपा संगठन के लिए भी महत्वपूर्ण राजनीतिक अवसर माना जा रहा है।
साय सरकार के गठन को ढाई वर्ष पूरे होने जा रहे हैं, लेकिन निकायों में मनोनीत पार्षदों की नियुक्ति अब तक नहीं हो पाई है। भाजपा के अनेक वरिष्ठ और जमीनी कार्यकर्ता लंबे समय से इस सूची का इंतजार कर रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि एल्डरमैन नियुक्ति के माध्यम से संगठन उन कार्यकर्ताओं को सम्मानित कर सकता है जिन्होंने चुनाव और संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई है।
सूत्रों के अनुसार सरकार पहले चरण में नगर निगमों और बड़ी नगर पालिकाओं में नियुक्तियां कर सकती है। इसके बाद नगर पंचायतों में सूची जारी होने की संभावना है। पिछले कुछ महीनों से नगरीय प्रशासन विभाग स्तर पर नामों को लेकर मंथन चलता रहा है, लेकिन अंतिम निर्णय नहीं हो सका था।
एल्डरमैन को परिषद की बैठकों में भाग लेने और विभिन्न समितियों में भूमिका निभाने का अवसर मिलता है। यद्यपि उन्हें मतदान का अधिकार नहीं होता, लेकिन स्थानीय विकास योजनाओं और नीतिगत निर्णयों में उनकी महत्वपूर्ण भागीदारी रहती है। इसी कारण यह पद राजनीतिक दृष्टि से भी काफी अहम माना जाता है।