Chhattisgarh Cricket Team: पूर्व भारतीय क्रिकेटर और नए हेड कोच अमय खुरासिया ने छत्तीसगढ़ क्रिकेट टीम को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का रोडमैप तैयार किया है।
छत्तीसगढ़ क्रिकेट अब बदलाव के दौर में प्रवेश कर चुका है। रणजी ट्रॉफी में लगातार बेहतर प्रदर्शन की तलाश में जुटी छत्तीसगढ़ सीनियर क्रिकेट टीम को ऐसा कोच मिला है, जिसने न सिर्फ भारतीय क्रिकेट का ड्रेसिंग रूम देखा है, बल्कि मैदान और प्रशासन-दोनों दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है। पूर्व भारतीय क्रिकेटर और अनुभवी कोच अमय खुरासिया अब छत्तीसगढ़ क्रिकेट टीम के नए हेड कोच होंगे।
यह नियुक्ति सिर्फ कोच बदलने भर की कहानी नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ क्रिकेट के विजन, अनुशासन और भविष्य को नई दिशा देने की कोशिश मानी जा रही है। खास बात यह है कि अमय वही कोच हैं जिन्होंने आईपीएल स्टार रजत पाटीदार, वेकटेश अय्यर, आवेश खान और मोहम्मद अरशद खान जैसे खिलाड़ियों को निखारने में अहम भूमिका निभाई। अब उनकी नजर छत्तीसगढ़ की उस नई पीढ़ी पर है, जो बड़े मंच तक पहुंचने का सपना देख रही है।
‘पत्रिका’ से खास बातचीत में अमय खुरासिया ने साफ कहा कि छत्तीसगढ़ में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। उन्होंने बताया कि टीम में सीनियर खिलाड़ियों के अनुभव और युवा खिलाड़ियों की ऊर्जा का शानदार मिश्रण मौजूद है। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा— “मेरी नजर में कुछ ऐसे खिलाड़ी हैं जिनमें अलग तरह की चमक और स्पार्क है। अभी नाम लेना जल्दबाजी होगी, लेकिन सही मार्गदर्शन मिला तो ये खिलाड़ी बहुत आगे जा सकते हैं।” यही बयान इस बात का संकेत देता है कि नए कोच सिर्फ टीम संभालने नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ क्रिकेट का मजबूत टैलेंट सिस्टम तैयार करने आए हैं।
अमय खुरासिया का मानना है कि क्रिकेट में तकनीक से ज्यादा खिलाड़ी की सोच मायने रखती है। उन्होंने साफ कहा कि छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों को मानसिक रूप से मजबूत बनाना उनकी पहली प्राथमिकता होगी। अमय खुरासिया के मुताबिक, “जब खिलाड़ी खुद को बड़े स्तर के लिए तैयार मानने लगता है, तभी उसका प्रदर्शन बदलता है। मैं चाहता हूं कि छत्तीसगढ़ के खिलाड़ी सिर्फ घरेलू क्रिकेट तक सीमित न रहें, बल्कि टीम इंडिया के लिए खेलने का सपना देखें।” यानी अमय का विजन सिर्फ मैच जीतने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे छत्तीसगढ़ क्रिकेट की मानसिकता बदलना चाहते हैं।
पिछले सीजन में अमय खुरासिया ने केरल क्रिकेट टीम को उसके 74 साल के इतिहास में पहली बार रणजी ट्रॉफी फाइनल तक पहुंचाया था। सीमित संसाधनों वाली टीम को फाइनल तक ले जाने के बाद अब उनसे छत्तीसगढ़ में भी वैसी ही क्रांति की उम्मीद की जा रही है। छत्तीसगढ़ क्रिकेट एसोसिएशन के साथ लंबी चर्चा के बाद अमय ने टीम की संरचना, फिटनेस, बेंच स्ट्रेंथ और ग्रासरूट डेवलपमेंट पर काम शुरू करने का रोडमैप तैयार कर लिया है।
अमय खुरासिया की कहानी युवाओं के लिए प्रेरणा भी है। बहुत कम लोग जानते हैं कि उन्होंने भारतीय टीम में डेब्यू करने से पहले ही देश की सबसे कठिन परीक्षा UPSC पास कर ली थी। एक तरफ क्रिकेट मैदान में संघर्ष और दूसरी तरफ पढ़ाई में अनुशासन—इसी संतुलन ने उन्हें अलग पहचान दिलाई। बाद में उन्होंने भारतीय टीम के लिए 12 वनडे मैच खेले और 1999 वर्ल्ड कप टीम का हिस्सा रहे। श्रीलंका के खिलाफ अपने डेब्यू मैच में 45 गेंदों पर 57 रन की तेज पारी खेलकर उन्होंने क्रिकेट जगत का ध्यान खींचा था। उस दौर में वे सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली और राहुल द्रविड़ जैसे दिग्गजों के साथ भारतीय ड्रेसिंग रूम साझा कर चुके हैं।
छत्तीसगढ़ लंबे समय से घरेलू क्रिकेट में अपनी मजबूत पहचान बनाने की कोशिश कर रहा है। प्रतिभा होने के बावजूद टीम को लगातार प्रदर्शन, मजबूत क्रिकेटिंग संस्कृति और बड़े मैचों में आत्मविश्वास की कमी महसूस होती रही है। ऐसे में अमय खुरासिया जैसे अनुभवी कोच का आना सिर्फ तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि क्रिकेटिंग संस्कृति बदलने की शुरुआत माना जा रहा है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि IPL और टीम इंडिया तक खिलाड़ियों को पहुंचाने वाले यह कोच छत्तीसगढ़ क्रिकेट को कितनी तेजी से नई ऊंचाइयों तक ले जाते हैं। लेकिन इतना तय है कि आने वाला रणजी सीजन अब पहले से ज्यादा दिलचस्प होने वाला है।
अमय खुरासिया का क्रिकेट सफर बाकी खिलाड़ियों से काफी अलग और प्रेरणादायक रहा है। मध्यप्रदेश से आने वाले अमय बचपन से ही क्रिकेट के प्रति जुनूनी थे। घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के दम पर उन्होंने जल्द ही अपनी अलग पहचान बना ली। लेकिन अमय सिर्फ मैदान तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने क्रिकेट के साथ पढ़ाई को भी उतनी ही गंभीरता से लिया और भारतीय टीम में डेब्यू करने से पहले ही UPSC जैसी कठिन परीक्षा पास कर ली। यही वजह है कि उन्हें क्रिकेट और प्रशासनिक समझ का बेहतरीन मिश्रण माना जाता है।
अमय खुरासिया मध्यप्रदेश क्रिकेट टीम के भरोसेमंद बल्लेबाजों में गिने जाते थे। घरेलू क्रिकेट में उन्होंने लगातार रन बनाए और अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा। उनकी बल्लेबाजी की सबसे बड़ी खासियत थी—तेज रन गति, सकारात्मक सोच और दबाव में खेलने की क्षमता। इसी प्रदर्शन के दम पर उन्हें भारतीय टीम में जगह मिली।
क्रिकेट से संन्यास के बाद अमय ने कोचिंग को अपना मिशन बनाया। वे पिछले करीब दो दशकों से खिलाड़ियों को ट्रेनिंग दे रहे हैं। वे बीसीसीआई के लेवल-सी सर्टिफाइड कोच हैं और इंडिया जूनियर टीम के साथ भी काम कर चुके हैं। मध्यप्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के साथ लंबे समय तक जुड़े रहते हुए उन्होंने कई युवा खिलाड़ियों को तैयार किया। रजत पाटीदार, वेकटेश अय्यर और आवेश खान जैसे खिलाड़ी आज जिस स्तर पर हैं, उसमें अमय की कोचिंग का बड़ा योगदान माना जाता है।