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Nocturia Affects Night Sleep : रात में बार-बार पेशाब आना नोक्टुरिया के लक्षण, यूरोलॉजिस्ट से जानिए जांच और इलाज के बारे में

Nocturia: क्या आपकी नींद भी हर रात बार-बार पेशाब आने के कारण टूटती है? डॉ.सोनी से जानिए यह बढ़ती उम्र का असर है या शरीर में पनप रही किसी बड़ी बीमारी का शुरुआती अलार्म।

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यूरिन का ये पैटर्न है चिंता का संकेत ! (Photo : AI Generated)

क्या आपकी नींद भी हर रात बार-बार पेशाब आने की वजह से टूटती है? क्या आप रात को ठीक से सो नहीं पाते और सुबह उठने पर दिनभर थकान, चिड़चिड़ाहट और सुस्ती महसूस होती है? अगर ऐसा है, तो इसे केवल 'बढ़ती उम्र का तकाजा' या 'ज्यादा पानी पीने का नतीजा' समझकर नजरअंदाज करने की गलती बिल्कुल न करें।

10 वर्ष के अनुभवी डॉ. अमित सोनी (यूरोलॉजिस्ट) ने बताया, मेडिकल साइंस में रात में बार-बार यूरिन आने की इस समस्या को नोक्टुरिया (Nocturia) कहा जाता है। यह कोई साधारण समस्या नहीं है, बल्कि आपके शरीर के भीतर पनप रही किसी गंभीर बीमारी का शुरुआती अलार्म हो सकता है। आइए विस्तार से समझते है से नोक्टुरिया कब खतरनाक रूप ले लेता है, और इससे राहत पाने के लिए आपको क्या कदम उठाने चाहिए।

What is Nocturia: नोक्टुरिया क्या है और यह कब असामान्य?

आमतौर पर, जब हम सोते हैं, तो हमारा शरीर ऐसे हार्मोन (जैसे एंटीडाययूरेटिक हार्मोन (ADH) रिलीज करता है, जो रात के समय यूरिन के प्रोडक्शन को धीमा कर देते हैं। इससे इंसान बिना रुके 6 से 8 घंटे की गहरी नींद ले पाता है। लेकिन, नोक्टुरिया से पीड़ित व्यक्ति का यह नेचुरल क्लॉक (Body Clock) बिगड़ जाता है।

  • सामान्य स्थिति: रात में सोते समय एक बार उठना या कभी-कभार फ्लूइड इंटेक ज्यादा होने पर उठना सामान्य माना जा सकता है।
  • असामान्य स्थिति: अगर आप हर रात लगातार 2, 3 या उससे ज्यादा बार यूरिन पास करने के लिए उठ रहे हैं, तो आप नोक्टुरिया के शिकार हैं।

Prevention & Lifestyle Tips: नोक्टुरिया से राहत पाने के व्यावहारिक उपाय

  • फ्लूइड इंटेक का समय बदलें (Fluid Management) : दिनभर में खूब पानी पिएं, लेकिन सोने से ठीक 3 घंटे पहले पानी, जूस या सूप जैसी चीजों का सेवन बेहद सीमित कर दें। अगर दवा खानी हो, तो सिर्फ दो घूंट पानी का इस्तेमाल करें।
  • कैफीन और अल्कोहल पर लगाएं लगाम : चाय, कॉफी, कोला और शराब 'ड्यूरेटिक्स' की तरह काम करते हैं। ये सीधे तौर पर ब्लैडर को इरिटेट करते हैं और शरीर में यूरिन के प्रोडक्शन को बढ़ा देते हैं। शाम 4 बजे के बाद कैफीनयुक्त चीजों का सेवन बिल्कुल बंद कर दें।
  • दवाइयां लेने का सही समय (Medication Timing) : अगर आप हाई ब्लड प्रेशर या दिल की बीमारी के लिए 'वॉटर पिल्स' (Diuretics जैसे कि Lasix या Torasemide) लेते हैं, तो इन्हें कभी भी रात को न खाएं। डॉक्टर से सलाह लेकर इन दवाइयों को सुबह या दोपहर 4 बजे से पहले खा लें, ताकि इनका असर रात होने से पहले खत्म हो जाए।
  • पैरों को शाम को एलिवेट (ऊपर) रखें : अगर आपके पैरों में सूजन रहती है या आप दिनभर खड़े रहते हैं, तो दोपहर या शाम के समय 1-2 घंटे के लिए तकिए के ऊपर पैर रखकर लेटें। इससे पैरों में जमा फ्लूइड दिन में ही री-सर्कुलेट होकर यूरिन के जरिए बाहर निकल जाएगा और आपकी रात की नींद खराब नहीं होगी।

नोक्टुरिया से जुड़े कुछ जरूरी सवालों के जवाब डॉ. सोनी (यूरोलॉजी) ने दिया है-

सवाल-आमतौर पर लोग बार-बार पेशाब आने का संबंध सिर्फ किडनी या ब्लैडर से जोड़ते हैं। लेकिन रिसर्च कहती है कि इसका कनेक्शन कमजोर दिल (Heart Failure) और स्लीप एपेनिया (Sleep Apnea) से भी है। इसके पीछे का वैज्ञानिक संबंध समझाइए।

डॉक्टर का जवाब-

  • कमजोर दिल (Heart Failure): दिन के समय जब मरीज खड़ा रहता है, तो गुरुत्वाकर्षण के कारण अतिरिक्त फ्लूइड (तरल पदार्थ) उसके पैरों और टखनों में जमा हो जाता है। रात को जब वह बिस्तर पर सीधा लेटता है, तो यह फ्लूइड वापस ब्लड सर्कुलेशन में आ जाता है। किडनियां इस बढ़े हुए फ्लूइड को छानने के लिए तेजी से काम करती हैं, जिससे रात में यूरिन ज्यादा बनता है।
  • स्लीप एपेनिया (Sleep Apnea): नींद में सांस रुकने पर फेफड़ों और छाती पर भारी दबाव बनता है। इससे भ्रमित होकर दिल को लगता है कि शरीर में फ्लूइड बढ़ गया है। प्रतिक्रिया में दिल ANP (Atrial Natriuretic Peptide) नामक हार्मोन रिलीज करता है, जो किडनियों को रात में ही तेजी से यूरिन बनाने का सिग्नल देता है।

सवाल-आपके पास आने वाले मरीजों में इस समस्या को लेकर सबसे बड़ा भ्रम या 'मिथक' (Myth) क्या देखने को मिलता है?

डॉक्टर का जवाब- मरीजों में सबसे बड़ा भ्रम यह है कि वे इसे बीमारी नहीं, बल्कि "बढ़ती उम्र का सामान्य असर" या "रात को ज्यादा पानी पीना" मान लेते हैं। लोग सोचते हैं कि उम्र बढ़ने पर रात में 3-4 बार उठना नॉर्मल है और वे इसके साथ समझौता कर लेते हैं। वे यह नहीं समझ पाते कि यह शरीर के भीतर छिपी किसी गंभीर बीमारी जैसे प्रोस्टेट, अनियंत्रित डायबिटीज या कमजोर दिल का शुरुआती अलार्म (रेड फ्लैग) हो सकता है।

सवाल-कई लोग सवाल करते हैं कि दिन में तो सब कुछ ठीक रहता है, लेकिन बिस्तर पर लेटते ही बार-बार वॉशरुम क्यों भागना पड़ता है?

  • नोक्टर्नल पॉलीयुरिया (Nocturnal Polyuria) : इसमें व्यक्ति का शरीर दिन के मुकाबले रात में बहुत अधिक मात्रा में यूरिन बनाने लगता है। यानी 24 घंटे के कुल यूरिन का 33% से अधिक हिस्सा रात में ही बनता है।
  • लो ब्लैडर कैपेसिटी (Low Bladder Capacity): इसमें यूरिन तो सामान्य मात्रा में बनता है, लेकिन मरीज का ब्लैडर (मूत्रशय) उसे ज्यादा देर तक होल्ड नहीं कर पाता। थोड़ा सा यूरिन जमा होते ही दिमाग को सिग्नल मिल जाता है कि ब्लैडर भर चुका है।

सवाल- क्या पुरुषों और महिलाओं में इस बीमारी के होने की दर (Ratio) और इसके कारण अलग-अलग होते हैं?

डॉक्टर का जवाब- हां, पुरुषों और महिलाओं में नोक्टुरिया की दर उम्र के हिसाब से बदलती है। यह समस्या महिलाओं में अधिक देखी जाती है (अक्सर यूटीआई या गर्भावस्था के कारण)। लेकिन 50-60 की उम्र के बाद यह पुरुषों में ज्यादा आम हो जाती है।दोनों में इसके मुख्य कारण भी अलग हैं:

  • पुरुषों में: इसका सबसे बड़ा कारण प्रोस्टेट ग्रंथि का बढ़ना (BPH) है, जो मूत्र मार्ग को दबाता है और ब्लैडर को पूरी तरह खाली नहीं होने देता।
  • महिलाओं में: मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन की कमी से ब्लैडर कमजोर होना, पेल्विक ऑर्गन प्रोलैप्स (अंगों का खिसकना) और ओवरएक्टिव ब्लैडर मुख्य कारण हैं।

सवाल- अगर किसी युवा (Young Adult) को यह समस्या अचानक शुरू हो जाए, तो सबसे पहले किन बीमारियों की आशंका होती है?

डॉक्टर का जवाब- अगर किसी युवा (20-40 वर्ष) को रात में बार-बार पेशाब आने की समस्या अचानक शुरू हो जाए, तो सबसे पहले इन तीन बीमारियों की आशंका होती हैं।

  • यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI): युवाओं में, खासकर महिलाओं में, यह सबसे आम कारण है। इन्फेक्शन के कारण ब्लैडर में सूजन आ जाती है, जिससे बार-बार और तुरंत पेशाब आने का अहसास होता है।
  • शुरुआती या अनियंत्रित डायबिटीज: अचानक नोक्टुरिया होना टाइप-1 या टाइप-2 डायबिटीज का पहला बड़ा संकेत हो सकता है। खून में बढ़ती शुगर को बाहर निकालने के लिए किडनियां रात में ज्यादा यूरिन बनाने लगती हैं।
  • ओवरएक्टिव ब्लैडर (OAB) या अत्यधिक तनाव: मानसिक तनाव, एंग्जायटी या कैफीन (चाय/कॉफी) का अत्यधिक सेवन ब्लैडर की मांसपेशियों को संकुचित कर देता है, जिससे रात में बार-बार प्रेशर बनता है।

सवाल- पुरुषों में प्रोस्टेट (BPH) के बढ़ने पर पेशाब बार-बार क्यों आता है, जबकि यूरिन का फ्लो कमजोर हो जाता है?

डॉक्टर का जवाब - प्रोस्टेट ग्रंथि पुरुषों के मूत्र मार्ग (Urethra) के चारों ओर होती है। जब इसका आकार बढ़ता है (BPH), तो यह इस नली को चारों तरफ से दबा देती है, जिससे रास्ता संकरा हो जाता है। इसी संकरे रास्ते के कारण यूरिन का फ्लो बहुत कमजोर या रुक-रुक कर आता है।नली दबने की वजह से ब्लैडर (मूत्रशय) एक बार में पूरी तरह खाली नहीं हो पाता और उसमें हमेशा कुछ यूरिन बचा रह जाता है। इसके परिणामस्वरूप, ब्लैडर बहुत जल्दी दोबारा भर जाता है और दिमाग को तुरंत सिग्नल भेजता है। यही कारण है कि मरीज को बार-बार पेशाब आने का अहसास होता है।

सवाल-जब कोई मरीज इस शिकायत के साथ आपके पास आता है, तो आप कौन से शुरुआती टेस्ट करवाने की सलाह देते हैं?

  • डॉक्टर का जवाब - यूरिन रूटीन और कल्चर (Urinalysis & Culture): इससे पेशाब में इन्फेक्शन (UTI), पस सेल्स, या खून (Hematuria) की मौजूदगी का पता चलता है।
  • फास्टिंग और पीपी ब्लड शुगर (HbA1c): यह जांचने के लिए कि कहीं अनियंत्रित डायबिटीज या प्री-डायबिटीज की वजह से तो रात में ज्यादा यूरिन नहीं बन रहा।
  • KFT (किडनी फंक्शन टेस्ट): ब्लड यूरिया और क्रिएटिनिन के जरिए किडनियों की कार्यक्षमता और उनके डैमेज होने की शुरुआती स्टेज को आंका जाता है।
  • अल्ट्रासाउंड (USG KUB): पेट के निचले हिस्से के इस स्कैन से पुरुषों में प्रोस्टेट का साइज और Post-Void Residual (PVR) यूरिन (पेशाब करने के बाद ब्लैडर में कितना यूरिन बच गया) मापा जाता है।

सवाल- क्या कीगल एक्सरसाइज (Kegel Exercises) या पेल्विक फ्लोर थेरेपी वाकई नोक्टुरिया में मददगार साबित होती है, या इसके लिए केवल दवाइयां ही एकमात्र इलाज हैं?

डॉक्टर का जवाब - कीगल एक्सरसाइज (Kegel Exercises) और पेल्विक फ्लोर थेरेपी नोक्टुरिया में बेहद असरदार साबित होती हैं। हर मामले में दवाइयां ही एकमात्र इलाज नहीं हैं। कीगल एक्सरसाइज ब्लैडर (मूत्रशय) को सपोर्ट करने वाली पेल्विक फ्लोर मांसपेशियों को मजबूत बनाती हैं। जब ये मांसपेशियां मजबूत होती हैं, तो ब्लैडर की यूरिन होल्ड करने की क्षमता बढ़ जाती है और अचानक उठने वाला पेशाब का प्रेशर कम होता है। यह खासकर उन महिलाओं और पुरुषों के लिए रामबाण है जिन्हें ओवरएक्टिव ब्लैडर (OAB) या मांसपेशियों की कमजोरी की वजह से नोक्टुरिया होता है। अगर समस्या प्रोस्टेट या डायबिटीज जैसी बड़ी बीमारी के कारण है, तो दवाइयों के साथ कीगल एक्सरसाइज करने से रिकवरी दोगुनी तेजी से होती है।

सवाल- हर रात नींद टूटने का मरीज के मानसिक स्वास्थ्य और दिनभर की कार्यक्षमता पर क्या असर पड़ता है? क्या इससे डिप्रेशन का खतरा भी बढ़ता है?

डॉक्टर का जवाब -

  • डिप्रेशन और एंग्जायटी का खतरा: इससे डिप्रेशन का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। जब रात की गहरी नींद (Deep Sleep) बार-बार बाधित होती है, तो दिमाग में मूड को नियंत्रित करने वाले न्यूरोट्रांसमीटर (जैसे सेरोटोनिन) का संतुलन बिगड़ जाता है। इससे मरीज में चिड़चिड़ाहट, मानसिक तनाव और डिप्रेशन के लक्षण पनपने लगते हैं।
  • कार्यक्षमता पर असर (Brain Fog): अधूरी नींद के कारण सुबह उठने पर ताजगी महसूस नहीं होती। दिनभर सुस्ती छाई रहती है, याददाश्त कमजोर होने लगती है और एकाग्रता (Focus) में भारी कमी आती है।
  • दुर्घटनाओं का जोखिम: इसके कारण बुजुर्गों में रात को अंधेरे में गिरने और फ्रैक्चर होने का जोखिम तो बढ़ता ही है, साथ ही युवाओं में दिन के समय ड्राइविंग या मशीनरी पर काम करते समय ध्यान भटकने से गंभीर दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है।