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बिहार विधान परिषद चुनाव: NDA में विधान परिषद सीटों को लेकर घमासान, सहयोगी दलों ने बढ़ाई हिस्सेदारी की मांग

बिहार विधान परिषद चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद एनडीए में सीटों के बंटवारे को लेकर हलचल तेज हो गई है। जेडीयू और भाजपा संभावित उम्मीदवारों के नामों पर मंथन कर रही हैं। वहीं, सहयोगी दल भी अपनी हिस्सेदारी की मांग कर रहे हैं।

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बिहार विधान परिषद (फाइल फोटो)

बिहार विधान परिषद चुनाव की अधिसूचना जारी होने के साथ ही राज्य का सियासी पारा चढ़ गया है। पटना से लेकर दिल्ली तक बैठकों का दौर शुरू हो गया है। जेडीयू में संभावित उम्मीदवारों के नामों पर मंथन जारी है, वहीं भाजपा ने भी संभावित नामों की सूची केंद्रीय नेतृत्व को भेज दी है। सूत्रों के अनुसार, भाजपा की ओर से उम्मीदवारों के चयन को लेकर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन (Nitin Nabin) स्वयं सक्रिय हैं। वे 3 जून को पटना पहुंच रहे हैं। बताया जा रहा है कि पटना प्रवास के दौरान वे पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे। हालांकि, उम्मीदवारों के नामों पर अंतिम फैसला दिल्ली में शीर्ष नेतृत्व के साथ होने वाली बैठक में लिया जाएगा। दरअसल, विधान परिषद की ये सीटें सिर्फ चुनावी मुकाबले तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनके जरिए एनडीए के भीतर ताकत, हिस्सेदारी और राजनीतिक प्रभाव की भी परीक्षा होने वाली है।

मांझी ने मांगी एक सीट

एनडीए में सीटों के बंटवारे को लेकर सबसे बड़ी चुनौती सहयोगी दलों की मांग को लेकर है। Jitan Ram Manjhi की पार्टी HAM पहले ही विधान परिषद की एक सीट पर अपना दावा जता चुकी है। इस मुद्दे को लेकर मांझी, सीएम सम्राट चौधरी से भी मुलाकात कर चुके हैं। मांझी का तर्क है कि महादलित समाज में उनकी मजबूत पकड़ है और इसका राजनीतिक लाभ एनडीए को मिलता रहा है। ऐसे में उनकी पार्टी को विधान परिषद में भी प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। मांझी के बेटे संतोष कुमार सुमन पहले से विधान परिषद के सदस्य हैं और बिहार सरकार में मंत्री भी हैं। इसके बावजूद मांझी इस मुद्दे को लगातार उठाते रहे हैं और खुलकर अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं।

NDA में हिस्सेदारी की होड़

दूसरी ओर, चिराग पासवान भी एनडीए में अपनी हिस्सेदारी मजबूत करना चाहते हैं। लोकसभा और विधानसभा चुनावों में बेहतर प्रदर्शन के बाद गठबंधन में उनका राजनीतिक कद बढ़ा है। ऐसे में उनकी पार्टी विधान परिषद चुनाव में भी सम्मानजनक भागीदारी की उम्मीद कर रही है। हालांकि, चिराग पासवान ने सार्वजनिक रूप से इस मुद्दे पर ज्यादा दबाव नहीं बनाया है, लेकिन एनडीए के भीतर उन्होंने अपनी दावेदारी को गंभीरता से रखा है।

वहीं, उपेंद्र कुशवाहा भी अपनी पार्टी के लिए प्रतिनिधित्व की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि पिछड़ा वर्ग, विशेषकर कुशवाहा समाज में उनकी मजबूत राजनीतिक पकड़ है। इसी आधार पर वे एनडीए में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश में जुटे हैं। इन सब की बीच सबसे ज्यादा चर्चा स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार और पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को लेकर हो रही है। दोनों मंत्री फिलहाल विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नहीं हैं।