Hindu Rashtra Controversy: RSS चीफ मोहन भागवत ने भारत को बताया था ‘हिंदू राष्ट्र’, अब उसी पर प्रतिक्रिया देते हुए असम से ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के MLA रफीकुल इस्लाम ने पलटवार किया है।
Mohan Bhagwat- Rafiqul Islam Controversy: हिंदू राष्ट्र को लेकर एक बार फिर सियासत गरमा गई है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के चीफ मोहन भागवत के ‘भारत हिंदू राष्ट्र है’ वाले कथित बयान पर अब असम से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है।
असम से ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) के MLA रफीकुल इस्लाम ने इस बयान पर सीधा पलटवार करते हुए कहा कि भारत कभी भी किसी एक धर्म का राष्ट्र नहीं रहा। उनका कहना है कि देश की असली पहचान उसकी विविधता और सेक्युलर मूल्यों में है, जिसे संविधान भी स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत हर धर्म, हर समुदाय और हर नागरिक का समान रूप से अधिकार है, ऐसे में इसे किसी एक पहचान तक सीमित नहीं किया जा सकता। इस बयान के बाद ‘हिंदू राष्ट्र’ बनाम ‘सेक्युलर भारत’ की बहस एक बार फिर तेज हो गई है, जिससे राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा शुरू हो गई है।
AIUDF नेता इस्लाम ने साफ कहा कि भारत सिर्फ हिंदुओं, मुसलमानों या ईसाइयों का नहीं, बल्कि सभी धर्मों के लोगों का देश है। उन्होंने मोहन भागवत के बयान को गुमराह करने वाला बताया और कहा कि भारत की असली पहचान हमेशा से सबको साथ लेकर चलने की रही है।
इतिहास का हवाला देते हुए उन्होंने आगे कहा कि जब मुगलों ने लंबे समय तक शासन किया, तब भी भारत मुस्लिम देश नहीं बना, अंग्रेजों के राज में भी यह ईसाई राष्ट्र नहीं बना।
उन्होंने यह भी कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले कई सालों में भी भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की कोई कोशिश नहीं हुई है। इस्लाम ने उम्मीद जताई कि देश आगे भी सभी धर्मों के लोगों का रहेगा।
दरअसल, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने हाल ही में नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान राम मंदिर और देश की पहचान पर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण सिर्फ सरकार की वजह से नहीं, बल्कि पूरे देश के लोगों के सहयोग से संभव हुआ। इसे समझाने के लिए उन्होंने भगवान कृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने की कहानी का उदाहरण दिया। उनका कहना था कि कि कृष्ण ने पर्वत उठाया, लेकिन उसमें सभी का योगदान था।
‘हिंदू राष्ट्र’ को लेकर उन्होंने कहा कि यह तो पहले से ही एक सच्चाई है। जैसे सूरज के उगने को बताने की जरूरत नहीं होती, वैसे ही भारत की पहचान भी खुद स्पष्ट है।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि देश का पुनरुत्थान 1857 से ही शुरू हो गया था और अब भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। उनके अनुसार, अब समय है कि हम देश को और मजबूत और समृद्ध बनाने के लिए मिलकर काम करें।