West Bengal illegal migrants crackdown: पश्चिम बंगाल में बीजेपी की सरकार आने के बाद माहौल बदल गया है। बांग्लादेश के साथ लगते जिलों में अवैध प्रवासियों की भीड़ जमा हो रही है। आखिर वह कैसे भारत में दाखिल हुए, पढ़ें पूरी खबर...
West Bengal illegal migrants: पश्चिम बंगाल में बीजेपी की सरकार आने के बाद सीमावर्ती जिलों में हालात बदले बदले से दिख रहे हैं। बांग्लादेश सीमा के समीप लोगों की भीड़ दिखाई दे रही है। ये लोग सालों पहले अवैध प्रवासी के रूप में भारत में दाखिल हुए थे। अब उन्हें इस बात का डर सता रहा है कि राज्य की नई सरकार उन्हें होल्डिंग सेंटरों या डिटेंशन कैंप मे भेज देगी। लिहाजा, वह बांग्लादेश जाना चाहते हैं। इन लोगों में से कइयों ने मीडिया को बताया कि कैसे वह भारत में दाखिल हुए।
इंडिया टूडे ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया कि वे बांग्लादेश नागरिक जिन्होंने अपने जीवन के कई साल भारत के अलग-अलग हिस्सों में बिताए, अब वे आपस में इस बात की चर्चा कर रहे हैं कि कैसे वह अवैध रूप से भारत में दाखिल हुए। एक व्यक्ति ने कहा कि भारत में दाखिल होने के लिए उन्होंने नदिया पार की। जबकि, दूसरे ने बताया कि बॉर्डर पार करने के लिए कई रात सीमावर्ती इलाके में गुजारे। वहीं, एक व्यक्ति ने बताया कि बिचौलियों ने अंधेरे का फायदा उठाकर सीमा पार करवाने का इंतजाम किया।
बांग्लादेश बॉर्डर के पास भीड़ में मौजूद एक शख्स ने मीडिया से बातचीत के दौरान सनसनीखेज दावा किया। उसने बताया कि बॉर्डर पार करने के बाद उसकी मदद ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के एक कार्यकर्ता ने की। उन्होंने ABP न्यूज से बातचीत में बताया कि जब ममता की पार्टी सत्ता में थी, तब मैंने अपना वोटर कार्ड और राशन कार्ड बनवाया था। पार्टी के लोगों ने मुझे ये दस्तावेज हासिल करने में मदद की। मेरी पत्नी को लक्ष्मी भंडार योजना का लाभ मिला था, लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद अब सबकुछ बदल गया है। एक अन्य अवैध प्रवासी ने तो यहां तक दावा किया कि वह चुनाव के दौरान भारत में वोट भी डाल चुका है।
एक अवैध प्रवासी ने स्थानीय यूट्यूब चैनल से कहा कि बिचौलियों के एक नेटवर्क के जरिए वह बांग्लादेश के कुश्तिया से भारत में दाखिल हुए थे। उसने बताया कि वह केरल में काम कर चुका है, लेकिन अब हालात बदल गए हैं। लोग अब किराए पर कमरा देने के लिए वोटर आईडी कार्ड मांगते हैं। उसने कहा कि जब वह भारत में दाखिल हुआ था तब बिचौलिए ने हर व्यक्ति से करीब 7,000 से 8,000 रुपए लिए।
एक व्यक्ति ने मीडिया से बातचीत में बताया कि जो बिचौलिया सीमा पार करवाता था। वह उन्हें आधार कार्ड भी बनवाकर दे देता था। इसके बदले महज 2000 रुपए लिए जाते थे।
एक अवैध प्रवासी ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस शासन के दौरान किसी ने कुछ नहीं कहा। अब सरकार बदल गई है तो पुलिस हमारे पीछे पड़ गई है। मकान मालिक भी हमें मकान किराए पर देने से डरने लगे हैं। उन्हें डर है कि यदि किसी बांग्लादेशी को उन्होंने अपने यहां किराए पर मकान दी तो उन पर 2 लाख रुपये का जुर्माना लगेगा और उन्हें दो साल की जेल हो सकती है।
वहीं, पश्चिम बंगाल के सीएम शुभेन्दु अधिकारी ने कहा कि अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को न तो पनाह दी जानी चाहिए और न ही उन्हें अदालत में पेश किया जाना चाहिए, बल्कि उन्हें सीधे सीमा पर BSF के हवाले कर दिया जाना चाहिए। BJP सरकार ने यह भी कहा है कि बंगाल में अवैध प्रवासियों को मिलने वाले कल्याणकारी लाभों की पहचान की जा रही है और उन्हें बंद किया जा रहा है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सैकड़ों लोगों के बांग्लादेश जाने की खबरों का जिक्र करते हुए कहा कि चूंकि घुसपैठिये अपनी मर्जी से वापस जा रहे हैं। इसलिए सरकार उनके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं करेगी।
इधर, फेंसिंग को लेकर मेघायल के सीएम कोनराड संगमा ने कहा कि मेघालय में भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने का काम लगभग पूरा होने वाला है। कुल लंबाई में से अब सिर्फ 40-45 किलोमीटर का काम ही बाकी है। गृह मंत्रालय ने फरवरी 2025 में बताया कि भारत-बांग्लादेश की 4,096.7 किलोमीटर लंबी सीमा में से करीब 79% हिस्से पर बाड़ लगाई जा चुकी है, जिसमें से 3,232.218 किलोमीटर का काम पहले ही पूरा हो चुका है।