Yogi Government Tourism Policy: उत्तर प्रदेश में बाबा नीम करोली सर्किट, बुंदेलखंड फोर्ट सर्किट और नैमिषारण्य के विकास को नई गति मिलेगी। सीएम योगी ने पर्यटन, विरासत संरक्षण और सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के निर्देश दिए।
Yogi Government will Develop Neem Karoli Circuit: उत्तर प्रदेश को देश और दुनिया के प्रमुख आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और विरासत पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में योगी सरकार ने एक और बड़ा कदम बढ़ाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट कहा है कि उत्तर प्रदेश केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना, आध्यात्मिक परंपरा और ज्ञान विरासत का प्रतिनिधि प्रदेश है। ऐसे में पर्यटन विकास को केवल सड़क, भवन और बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं रखा जा सकता, बल्कि इसे सांस्कृतिक पुनर्जागरण, स्थानीय अर्थव्यवस्था, रोजगार सृजन और वैश्विक पहचान से जोड़कर आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
CM योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को पर्यटन विभाग की समीक्षा बैठक की। इस बैठक में पर्यटन विभाग और विभिन्न सांस्कृतिक परियोजनाओं की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कई महत्वाकांक्षी योजनाओं की प्रगति का आकलन किया। इस दौरान बाबा नीम करोली सर्किट, बुंदेलखंड फोर्ट सर्किट, नैमिषारण्य विकास परियोजना, मिर्जापुर-विंध्याचल मास्टर प्लान, ज्ञान भारतम् मिशन और विभिन्न संग्रहालयों के निर्माण कार्यों को लेकर विस्तृत चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पर्यटन केवल यात्रियों के आगमन तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह प्रदेश की सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था को गति देने का सशक्त माध्यम बन सकता है। उन्होंने कहा कि पर्यटन के विस्तार से स्थानीय हस्तशिल्प, पारंपरिक कला, क्षेत्रीय खानपान, लोक संस्कृति और सेवा क्षेत्र को व्यापक अवसर प्राप्त होंगे। मुख्यमंत्री का मानना है कि यदि पर्यटन को सही दिशा में विकसित किया जाए तो यह लाखों युवाओं के लिए रोजगार का स्रोत बन सकता है। साथ ही प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान भी मिलेगी।
बैठक में पर्यटन नीति-2022 में प्रस्तावित संशोधनों की समीक्षा के दौरान बाबा नीम करोली सर्किट और बुंदेलखंड फोर्ट सर्किट के विकास पर विशेष चर्चा हुई। सरकार की योजना बाबा नीम करोली महाराज से जुड़े धार्मिक और आध्यात्मिक स्थलों को एक समेकित पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित करने की है, जिससे देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
इसी प्रकार बुंदेलखंड क्षेत्र के ऐतिहासिक किलों और विरासत स्थलों को जोड़कर बुंदेलखंड फोर्ट सर्किट विकसित किया जाएगा। इससे न केवल क्षेत्रीय पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि बुंदेलखंड की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत को भी नई पहचान मिलेगी।
बैठक में “परंपरा” विरासत अनुभव केंद्र, कृषि पर्यटन और वाइनयार्ड पर्यटन जैसी नई अवधारणाओं पर भी चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन का स्वरूप लगातार बदल रहा है और आधुनिक पर्यटक केवल दर्शनीय स्थलों तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि वह स्थानीय संस्कृति और जीवनशैली का अनुभव भी करना चाहता है। ऐसे में कृषि आधारित पर्यटन, पारंपरिक जीवनशैली और सांस्कृतिक अनुभवों को पर्यटन से जोड़ना समय की आवश्यकता है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण से जुड़े “ज्ञान भारतम् मिशन” की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन पांडुलिपियां हमारी सभ्यता, दर्शन, विज्ञान और सांस्कृतिक चेतना की अमूल्य धरोहर हैं। इनका संरक्षण केवल दस्तावेज सुरक्षित रखने का कार्य नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का माध्यम भी है। बैठक में बताया गया कि अब तक 13 लाख 70 हजार से अधिक पांडुलिपियों का सर्वेक्षण, डिजिटलीकरण और संरक्षण किया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने इस कार्य को और गति देने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने लखनऊ में नव लोकार्पित नौसेना शौर्य वाटिका और निर्माणाधीन आईएनएस गोमती शौर्य संग्रहालय की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि यह परियोजना भारत की समुद्री विरासत, सैन्य गौरव और राष्ट्रभक्ति की भावना को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी।
बैठक में बताया गया कि संग्रहालय में भारतीय नौसेना के गौरवशाली इतिहास, नौसैनिक अभियानों, आईएनएस गोमती की यात्रा और समुद्री शक्ति को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा।इंटरैक्टिव गैलरी, सिम्युलेटर, युवा कैडेट एरीना और अनुभवात्मक प्रदर्शनों के जरिए युवाओं को नौसेना के इतिहास और योगदान से परिचित कराया जाएगा।
आगरा में निर्माणाधीन छत्रपति शिवाजी महाराज संग्रहालय की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्र नायकों की प्रेरक गाथाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना राष्ट्रीय दायित्व है। इस संग्रहालय में शिवाजी महाराज के जीवन, स्वराज्य स्थापना, आगरा आगमन, औरंगजेब के दरबार में उनके साहस, आगरा से ऐतिहासिक प्रस्थान और हिंदवी स्वराज्य की अवधारणा को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि संग्रहालय में मराठा साम्राज्य और उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक संबंधों, अहिल्याबाई होल्कर के योगदान, काशी विश्वनाथ मंदिर के पुनरुद्धार और स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंगों को भी प्रमुखता से स्थान दिया जाए।
मुख्यमंत्री ने नैमिषारण्य के समग्र विकास कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि यह केवल एक तीर्थ स्थल नहीं, बल्कि भारत की वैदिक ज्ञान परंपरा और आध्यात्मिक साधना का जीवंत केंद्र है। उन्होंने निर्देश दिए कि यहां धार्मिक आस्था, पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक सुविधाओं के बीच संतुलन बनाए रखते हुए विकास कार्य किए जाएं। समग्र मास्टर प्लान के अंतर्गत वेद विज्ञान केंद्र, वैदिक थीम पार्क, वेलनेस सेंटर, राजघाट रिवरफ्रंट, व्यास गद्दी, सूत गद्दी, हनुमानगढ़ी, देवदेवेश्वर मंदिर परिसर, नैमिष हाट, तीर्थयात्री आवास और आधुनिक पर्यटन सुविधाओं का विकास किया जाएगा।
बैठक में बताया गया कि प्रस्तावित इंटरप्रिटेशन सेंटर में नैमिषारण्य को वेदों की जन्मस्थली के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। यहां प्रोजेक्शन मैपिंग, लेजर शो, दशावतार विजुअलाइजेशन और पारंपरिक ग्राम्य जीवन की झलक दिखाने वाली आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इस परियोजना को मिशन मोड में आगे बढ़ाया जाए ताकि देश और विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को विश्वस्तरीय अनुभव मिल सके।
मिर्जापुर-विंध्याचल क्षेत्र के लिए तैयार किए जा रहे इंटीग्रेटेड मास्टर प्लान की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि मां विंध्यवासिनी धाम देश के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है। यहां भविष्य में बढ़ने वाली श्रद्धालुओं की संख्या को ध्यान में रखते हुए सुविधाओं का विकास किया जाना चाहिए।
बैठक में त्रिकोण परिक्रमा क्षेत्र के विकास और शक्तिपीठों के इतिहास को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत करने की योजना पर भी चर्चा हुई। वहीं चित्रकूट स्थित प्राचीन सोमनाथ मंदिर के संरक्षण और संवर्धन कार्यों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण हमारी साझा जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विकास कार्यों के दौरान ऐतिहासिक प्रामाणिकता और मूल स्थापत्य स्वरूप को अक्षुण्ण रखना बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के लिए विरासत संरक्षण और आधुनिक विकास के बीच संतुलन बनाना होगा। सरकार की इन महत्वाकांक्षी योजनाओं से स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश को केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक विरासत के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में व्यापक रणनीति पर काम किया जा रहा है।