# लखनऊ

Lucknow News : समाजवादी पार्टी के पूर्व सांसद रिजवान जहीर के केस में दामाद रमीज नेमत का भी नाम, जानिए क्या था पूरा मामला

Rizwan Zaheer Firoz Pappu Case: यूपी के बाहुबली नेता और पूर्व सपा सांसद रिजवान जहीर और उनके दामाद रमीज नेमत पर लगे गैंगस्टर एक्ट को लेकर हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। जानिए क्या है यह पूरा मामला...

2 min read
समाजवादी पार्टी के पूर्व सांसद रिजवान जहीर | फोटो सोर्स- patrika.com

Rizwan Zaheer Firoz Pappu Case: समाजवादी पार्टी के पूर्व सांसद और इलाके के बड़े नेता रिजवान जहीर और उनके दामाद रमीज नेमत को लेकर कानूनी तौर पर एक बड़ा अपडेट आया है। साल 2022 के चर्चित फिरोज पप्पू मर्डर केस के बाद पुलिस ने इन दोनों पर जो गैंगस्टर एक्ट लगाया था, उस पर अब हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।

क्या था पूरा मामला?

यह बात जनवरी 2022 की है, जब यूपी में विधानसभा चुनाव का माहौल गरमाया हुआ था। 4 जनवरी 2022 को तुलसीपुर के पूर्व चेयरमैन फिरोज पप्पू की गला रेतकर बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। इस हाई-प्रोफाइल मर्डर से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी।
जब पुलिस ने इस मामले की जांच की, तो सामने आया कि इसके पीछे राजनीतिक दुश्मनी थी। पुलिस ने दावा किया कि इस हत्या की पूरी साजिश पूर्व सांसद रिजवान जहीर, उनकी बेटी जेबा रिजवान और उनके दामाद रमीज नेमत ने मिलकर रची थी। इस मामले में पुलिस ने हत्या करने वाले तीन शूटरों के साथ-साथ रिजवान जहीर और उनके परिवार को भी गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

गैंगस्टर एक्ट का वो मुकदमा जिसने बढ़ाई मुश्किलें

हत्या के इस मामले के बाद, साल 2024 में बलरामपुर पुलिस ने एक और बड़ा कदम उठाया। पुलिस ने तुलसीपुर थाने में रिजवान जहीर और उनके दामाद रमीज नेमत के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया। पुलिस द्वारा तैयार किए गए गैंग चार्ट में रमीज नेमत को इस कथित गिरोह का सरगना यानी लीडर बनाया गया था, जबकि पूर्व सांसद रिजवान जहीर को इस गैंग के एक्टिव मेंबर के रूप में दर्शाया गया था। इस सख्त कानून को लागू करने के लिए पुलिस ने दो पुराने आपराधिक मुकदमों को आधार बनाया था, जिसमें से एक मामले में दोनों आरोपी थे, जबकि दूसरे मर्डर केस में सिर्फ रमीज का नाम था।

हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई पर क्यों उठाए सवाल?

जब यह मामला अदालत में पहुंचा, तो हाईकोर्ट ने पुलिस और प्रशासन की इस कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। कोर्ट ने साफ कहा कि गैंगस्टर एक्ट जैसा कड़ा कानून बहुत सोच-समझकर लगाया जाना चाहिए, इसके लिए तय नियमों का पालन करना जरूरी है।
अदालत ने पुलिस की थ्योरी को खारिज करते हुए कहा कि सिर्फ इसलिए कि किसी व्यक्ति पर कुछ आपराधिक मामले दर्ज हैं, उस पर सीधे गैंगस्टर एक्ट नहीं लगाया जा सकता। इसके लिए कानून के तहत निर्धारित तथ्यों और परिस्थितियों का स्पष्ट रूप से मौजूद होना आवश्यक है और पुलिस को यह साबित करना होगा कि क्या वो शर्तें इस मामले में सच में लागू होती हैं।
अदालत के इस रुख से पुलिस की तैयारी पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं और रिजवान जहीर के परिवार को भी बड़ी राहत मिलती दिख रही है।