जेईई एडवांस्ड 2026 के नतीजों ने कोटा को एक बार फिर देशभर में गौरवान्वित किया, लेकिन इन चमकती रैंक के पीछे कुछ ऐसी मांओं की कहानियां भी हैं, जिनकी आंखों में बरसों का इंतजार, त्याग, संघर्ष और भरोसा एक साथ छलक पड़ा।
Kota success story JEE toppers : कोटा। जेईई एडवांस्ड 2026 के नतीजों ने कोटा को एक बार फिर देशभर में गौरवान्वित किया, लेकिन इन चमकती रैंक के पीछे कुछ ऐसी मांओं की कहानियां भी हैं, जिनकी आंखों में बरसों का इंतजार, त्याग, संघर्ष और भरोसा एक साथ छलक पड़ा। जेईई की इस कामयाबी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि जब मां अपने बच्चे के सपनों के साथ खड़ी हो जाए, तो मंजिलें भी छोटी पड़ जाती हैं। ऑल इंडिया रैंक-1 हासिल करने वाले शुभम कुमार और एआइआर-2 पाने वाले कबीर की सफलता सिर्फ दो छात्रों की उपलब्धि नहीं है, बल्कि उन मांओं की जीत भी है, जिन्होंने अपने बच्चों के सपनों को खुद की जिंदगी बना लिया।
किसी ने सीमित संसाधनों में उम्मीदों का दिया जलाए रखा, तो किसी ने बेटे के भविष्य के लिए अपना शहर, अपनी जिंदगी तक बदल दी। इन सफलताओं ने फिर साबित कर दिया कि बच्चे जब मंजिल तक पहुंचते हैं, तो उनके पीछे मां की अनगिनत जागी रातें, अधूरी इच्छाएं, अनकहे त्याग और हर हार में दिया गया हौसला भी साथ चलता है।
गया के एक साधारण परिवार से आने वाले शुभम कुमार ने जेईई एडवांस्ड में देशभर में पहला स्थान हासिल कर अपने परिवार की जिंदगी ही बदल दी। पिता हार्डवेयर की छोटी-सी दुकान चलाते हैं और मां कंचन देवी गृहिणी हैं। सीमित साधनों के बावजूद परिवार ने कभी बच्चों की पढ़ाई के सामने परिस्थितियों को आड़े नहीं आने दिया। बड़ी बहन पहले से आइआइटी पटना में पढ़ रही है और उसने भी शुभम को हर कदम पर मार्गदर्शन दिया।
शुभम की मां कंचन देवी भावुक होकर कहती हैं, ‘हम हमेशा से साधारण लोग रहे हैं, लेकिन आज शुभम ने हमें असाधारण बना दिया। अब लोग हमें हमारे नाम से नहीं, बल्कि शुभम के मम्मी-पापा के रूप में पहचानते हैं। इससे बड़ी खुशी जिंदगी में और क्या हो सकती है।’ उनकी आंखों में खुशी के साथ उन वर्षों की थकान भी साफ दिखाई देती है, जब उन्होंने अपने बेटे के सपनों को टूटने नहीं दिया। उनके लिए यह केवल एक रैंक नहीं, बल्कि विश्वास, धैर्य और संघर्ष की सबसे बड़ी जीत है।
एआइआर-2 हासिल करने वाले कबीर की सफलता के पीछे भी मां का समर्पण किसी प्रेरणा से कम नहीं है। पेशे से शिक्षिका प्रियंका छिल्लर मुस्कुराते हुए कहती हैं, ‘कबीर ने तो मुझे ही सेलेब्रिटी बना दिया। सुबह से लगातार फोन आ रहे हैं, लोग बधाइयां दे रहे हैं। मां होने के नाते इससे बड़ी खुशी कुछ नहीं हो सकती।’ प्रियंका बताती हैं कि कबीर पढ़ाई के साथ जिंदगी को भी खुलकर जीने वाला बच्चा है।
यही संतुलन उसे सबसे अलग बनाता है। दिल्ली छोड़कर कोटा आना परिवार के लिए आसान फैसला नहीं था। नई जगह, नई परिस्थितियां और बेटे के सपनों का दबाव…लेकिन हर चुनौती को मुस्कुराकर स्वीकार किया। आज जब बेटा देश के टॉप रैंकर्स में शामिल है, तो प्रियंका को लगता है कि बेटे के भविष्य के लिए उठाया गया हर कदम सार्थक हो गया।