विश्व पर्यावरण दिवस पर संस्थानों में सामूहिक पौधरोपण कर पर्यावरण बचाने का संकल्प लिया है। पौधरोपण के दौरान वक्ताओं ने कहा कि आज का पौधरोपण आने वाली पीढ़ी के लिए ऑक्सीजन का काम करेगा। इसलिए अधिक से अधिक पौधे रोपे जाएं । और उनकी सुरक्षा का संकल्प किया जाए, तभी भावी पीढ़ी सुरक्षित होगी।
विश्व पर्यावरण दिवस पर सरकारी गैर सरकारी संस्थानों में पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किए गए। शहर में महापौर, विधायक ने पौधे रोपे, कलेक्टर ने छात्रों को सीड बॉल बनाने को प्रेरित करते हुए जल संरक्षण की शपथ दिलाई है।
विश्व पर्यावरण दिवस पर संस्थानों में सामूहिक पौधरोपण कर पर्यावरण बचाने का संकल्प लिया है। पौधरोपण के दौरान वक्ताओं ने कहा कि आज का पौधरोपण आने वाली पीढ़ी के लिए ऑक्सीजन का काम करेगा। इसलिए अधिक से अधिक पौधे रोपे जाएं । और उनकी सुरक्षा का संकल्प किया जाए, तभी भावी पीढ़ी सुरक्षित होगी। जिला मुख्यालय पर मोतीलाल नेहरू स्कूल में कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने पौधरोपण किया। उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी पीएस सोलंकी से कहा कि स्कूल खुलते ही हर विद्यार्थी से 50-50 सीड बॉल बनवाएं और बरसात होने पर इनका उपयोग पौधरोपण के लिए करें।
कलेक्टर ने विद्यार्थियों के साथ बैठकर सीड बॉल बनाईं और उनका महत्त्व समझाया। नगर निगम ने ‘ एक पेड़ मां के नाम ’ अभियान के तहत झीलों उद्यान परिसर में पौधरोपण कर जल स्रोतों को बचाने का संकल्प किया। महापौर अमृता अमर यादव की अध्यक्षता में 100 पौधे रोपे गए। यहां 500 पौधों का लक्ष्य तय किया गया है। नमो वन परिसर में 400 पौधे रोपे गए।
महापौर अमृता यादव ने नमोवन में पौध रोपण कर कहा कि नमो वन क्षेत्र में 1 लाख 23 हजार पौधों का लक्ष्य है, जो वर्षा ऋतु के आगमन पर चरणबद्ध रूप से रोपे जाएंगे। विधायक कंचन तनवे ने भी पौधरोपण कर पर्यावरण बचाने का संदेश दिया। इस अवसर पर एमआईसी सदस्यों के साथ कलेक्टर और क्षेत्रीय प्रतिनिधि मौजूद रहे।
एक्सपर्ट व्यू : डॉ बीपी सिंह
पर्यावरण विद डॉ बीपी सिंह का कहना है कि वर्तमान में तेजी से बढ़ रहे प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन मानव जीवन के लिए गंभीर चुनौती बन गया है। पर्यावरण को संतुलित रखने में पेड़-पौधों की भूमिका अपूर्व है, क्योंकि वे ऑक्सीजन का उत्पादन करते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करते हैं। जल स्रोतों का संरक्षण भी उतना ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि स्वच्छ जल जीवन का आधार है। सामूहिक प्रयास और जागरूकता ही हमें इस संकट से उबार सकती है, जिससे भावी पीढ़ी को एक सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण मिल सके।