राजस्थान के कई जिलों में लम्बे समय से आर्थिक मजबूरी का फायदा उठाकर कई गरीब परिवारों की अबोध बालिकाओं की खरीद फरोख्त का खेल चल रहा है। झालावाड़, बूंदी, सवाई माधोपुर, टोंक और भीलवाड़ा जिले में पूर्व में भी इस तरह की शिकायतें आई।
झालावाड़। राजस्थान के कई जिलों में लम्बे समय से आर्थिक मजबूरी का फायदा उठाकर कई गरीब परिवारों की अबोध बालिकाओं की खरीद फरोख्त का खेल चल रहा है। झालावाड़, बूंदी, सवाई माधोपुर, टोंक और भीलवाड़ा जिले में पूर्व में भी इस तरह की शिकायतें आई। स्थानीय पुलिस ने उस समय फौरी कार्रवाई कर मामले की इतिश्री कर ली। वर्ष 2022 में भीलवाड़ा जिले में इस तरह की शिकायत पर राष्ट्रीय महिला आयोग की टीम ने यहां का दौरा किया था। बूंदी में पूर्व में कई बार कार्रवाई हो चुकी है, लेकिन गिरोह के लोग बेखौफ मानव तस्करी में लिप्त है। झालावाड़ पुलिस ने गिरोह के छह सदस्यों को गिरफ्तार कर उनसे पूछताछ की तो कई चौंकाने वाले खुलासे हुए।
सूत्रों के अनुसार इन लड़कियों की खरीद फरोख्त के लिए बकायदा स्टाम्पपेपर पर इकरारनामा तैयार किए गए है। इसमें लडक़ी को एक साल से लेकर आठ साल तक नाच-गाने के नाम पर लीज [गिरवी रखना] पर लिया गया है। गिरोह ने एक लड़की का मध्यप्रदेश के व्यक्ति से एक साल के लिए 3 लाख 40 हजार और आठ साल के लिए 27 लाख 20 हजार रुपए में सौदा हुआ।
इकरारनामे में यह राशि उसके पिता पर भारी कर्ज और आर्थिक स्थिति खराब होने का हवाला देते हुए देना लिखा गया। साथ ही प्रथम किस्त के रूप में 13 लाख 20 हजार रुपए देना बताया गया। इस सौदे में जमानती रामकन्या बाई बनाई गई। एक लड़की का सौदा 16 लाख रुपए में किया गया। इकरारनामे में कई तरह की शर्ते भी रखी गई है। जिनमें लड़की के भागने पर परिजनों से पूरा खर्च वसूलना शामिल है। यदि लड़की खुदकुशी कर लेती है तो उसके परिजन खरीदार से किसी तरह का झगड़ा राशि नहीं लेगे।
झालावाड़ पुलिस की पूछताछ में सामने आया है कि दलाल गरीब परिवार की लड़कियों पर छोटी उम्र से ही नजर रखने लग जाते है। स्थानीय दलाल इन लड़कियों को चार से आठ साल तक उम्र में ही खरीदकर बूंदी या अन्य शहरों में गिरोह के सदस्यों को बेच देते है। ये लोग कुछ साल तक लड़कियों को अपने पास रखकर ट्रेंड करते है। फिर ये लड़कियां मुम्बई और अन्य महानगरों में बड़े गिरोह को देह व्यापार के लिए बेच दी जाती है।