राजस्थान से राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने के बाद डॉ अलका गुर्जर अचानक राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गई हैं। राजस्थान प्रशासनिक सेवा की नौकरी छोड़ने वाली अलका ने आखिर राजनीति का रास्ता क्यों चुना? एक विधायक से भाजपा की राष्ट्रीय सचिव बनने तक उनका सफर कैसा रहा और पार्टी ने उन्हें इस अहम मौके के लिए क्यों चुना? जानिए उस महिला नेता की पूरी कहानी, जिस पर भाजपा ने राज्यसभा के लिए बड़ा दांव खेला है।
जयपुर। राज्यसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं। बीजेपी ने राजस्थान से पार्टी के वरिष्ठ नेता सतीश पूनिया और पार्टी की राष्ट्रीय सचिव डॉ अलका गुर्जर को राज्यसभा भेजने का फैसला किया है। डॉ अलका गुर्जर के नाम की घोषणा के साथ ही प्रदेश की राजनीति में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। माना जा रहा है कि भाजपा ने इस फैसले के जरिए महिला नेतृत्व को बढ़ावा देने के साथ-साथ पूर्वी राजस्थान और गुर्जर समुदाय को मजबूत राजनीतिक संदेश देने की रणनीति अपनाई है।
डॉ अलका गुर्जर लंबे समय से भाजपा संगठन में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। उनका राजनीतिक सफर संगठन से शुरू होकर विधानसभा और राष्ट्रीय राजनीति तक पहुंचा है। वर्तमान में वह भाजपा की राष्ट्रीय सचिव हैं और पार्टी के कई महत्वपूर्ण संगठनात्मक दायित्व संभाल चुकी हैं। राजस्थान के अलावा अन्य राज्यों में भी चुनावी और संगठनात्मक जिम्मेदारियों का निर्वहन कर चुकी हैं।
21 फरवरी 1961 को टोंक जिले के मालपुरा में जन्मी अलका गुर्जर उच्च शिक्षित नेता हैं। उन्होंने एमए, एलएलएम और पीएचडी की डिग्री हासिल की है। दिलचस्प बात यह है कि उनका चयन राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) के लिए भी हुआ था और उन्होंने प्रशिक्षण भी पूरा किया था, लेकिन सरकारी नौकरी जॉइन करने के बजाय उन्होंने सार्वजनिक जीवन और राजनीति को अपना करियर बनाया।
डॉ अलका गुर्जर का परिवार भी लंबे समय से भाजपा से जुड़ा रहा है। उनके पति डॉ नाथू सिंह गुर्जर राजस्थान सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं और भाजपा संगठन में भी कई महत्वपूर्ण पदों पर जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में इस परिवार की मजबूत पहचान रही है। दूसरी तरफ पार्टी आला कमान की तरफ से राजस्थान के इन दो नेताओं के राज्यसभा उम्मीदवार घोषित किए जाने पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बधाई दी है।
वर्ष 2013 में अलका गुर्जर ने दौसा जिले की बांदीकुई विधानसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीतकर पहली बार विधानसभा में प्रवेश किया। विधायक रहने के दौरान उन्होंने क्षेत्रीय मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाया। इसके अलावा वह भाजपा की प्रदेश प्रवक्ता, प्रदेश उपाध्यक्ष और महिला मोर्चा में भी कई अहम जिम्मेदारियां संभाल चुकी हैं।
भाजपा नेतृत्व ने अलका को राष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण भूमिका सौंपी। सितंबर 2020 में उन्हें राष्ट्रीय सचिव बनाया गया। इसके बाद उन्होंने विभिन्न राज्यों में संगठन विस्तार और चुनावी रणनीति में सक्रिय योगदान दिया। पश्चिम बंगाल, असम, दिल्ली और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में भी पार्टी की जिम्मेदारियां संभाल चुकी हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यसभा के लिए अलका गुर्जर को उम्मीदवार बनाकर भाजपा ने महिला नेतृत्व, ओबीसी वर्ग और गुर्जर समाज के बीच अपने राजनीतिक आधार को और मजबूत करने का प्रयास किया है। उनके नाम की घोषणा को आगामी राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दरअसल, राजस्थान से राज्यसभा की तीन सीटों पर वर्तमान सदस्यों का कार्यकाल 21 जून 2026 को समाप्त होने जा रहा है। इनमें केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू, भाजपा के राजेंद्र गहलोत और कांग्रेस के नीरज डांगी शामिल हैं। कार्यकाल समाप्त होने के साथ ही इन सीटों पर नए प्रतिनिधियों के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है। निर्वाचन आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार 18 जून को मतदान कराया जाएगा और उसी दिन मतगणना के बाद परिणाम भी घोषित कर दिए जाएंगे।
राज्यसभा चुनाव के लिए भाजपा ने इस बार डॉ अलका गुर्जर के साथ वरिष्ठ नेता सतीश पूनिया को उम्मीदवार बनाया है। सतीश पूनिया का नाम पहले से ही संभावित दावेदारों में माना जा रहा था, जबकि अलका गुर्जर को मौका देकर पार्टी ने महिला नेतृत्व और सामाजिक प्रतिनिधित्व को महत्व देने का संदेश दिया है। उम्मीदवारों की घोषणा के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों में उत्साह का माहौल देखने को मिल रहा है।