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Jaipur: ‘अच्छा जीवनसाथी साबित होगा इसकी गारंटी नहीं’, बेटियों की खुशी के लिए कथावाचक जया किशोरी ने दिया अनोखा संदेश

Govind Dev Ji 3 Day Katha By Jaya Kishori: जयपुर के गोविंददेवजी मंदिर परिसर में आयोजित तीन दिवसीय नानी बाई रो मायरा कथा के पहले दिन कथावाचक जया किशोरी ने बेटियों की खुशियों और धार्मिक संस्कारों पर विशेष जोर दिया।

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कथा सुनाती जया किशोरी (फोटो: पत्रिका)

Jaipur News: जयपुर के गोविंददेवजी मंदिर परिसर स्थित सत्संग बुधवार को भक्ति और श्रद्धा के रंग में सराबोर नजर आया। कथावाचक जया किशोरी की तीन दिवसीय नानी बाई रो मायरा कथा के पहले दिन सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी। कथा स्थल पर भजनों की गूंज और जयकारों के बीच भक्त भावविभोर दिखाई दिए। हालांकि बढ़ती भीड़ के मुकाबले व्यवस्थाएं अपर्याप्त साबित हुईं। सत्संग भवन में सीमित क्षमता के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, खासकर बुजुर्गों को बाहर बैठकर कथा सुननी पड़ी।

इस बीच वीवीआईपी और विशेष पास जरूरत से ज्यादा संख्या में वितरित किए गए, जिससे आम भक्तों को कार्यक्रम स्थल पर प्रवेश करने और बैठने में परेशानी हुई। कई लोगों के पास होने के बावजूद उन्हें अंदर जगह नहीं मिल सकी। कथा स्थल पर उमस और गर्मी ने भी श्रद्धालुओं की मुश्किलें बढ़ा दीं। सत्संग भवन के भीतर क्षमता से अधिक भीड़ होने के कारण घुटन जैसा माहौल रहा। बाहर लगाए गए टेंट में गर्म फर्श और पर्याप्त पंखों की व्यवस्था नहीं थी। इसी दौरान बारिश होने से भी श्रद्धालुओं को असुविधा का सामना करना पड़ा।

जया किशोरी का अनोखा संदेश

  • बेटियों और शादी के संदर्भ में कहा कि बेटियों की खुशियों और इच्छाओं को केवल विवाह के बाद के लिए टालना उचित नहीं है। बेटी जब तक माता-पिता के साथ है, उसे खुलकर जीवन जीने और अपनी इच्छाएं पूरी करने का अवसर मिलना चाहिए। माता-पिता को बेटियों के वर्तमान को भी उतना ही महत्व देना चाहिए जितना उनके भविष्य को देते हैं। कहा कि आज के समय में केवल शिक्षित या अच्छा दिखने वाला व्यक्ति ही अच्छा जीवनसाथी साबित होगा, इसकी गारंटी नहीं होती। इसलिए बेटियों की छोटी-बड़ी इच्छाओं और खुशियों को वर्तमान में ही पूरा करने का प्रयास करना चाहिए।
  • कथा की शुरुआत नरसी जी के जन्म प्रसंग की व्याख्या से की।
  • माता-पिता से आग्रह किया कि बच्चों को बचपन से ही भगवान, उनकी लीलाओं और धार्मिक संस्कारों से परिचित कराएं ताकि देवी देवताओं का ज्ञान हो सकें।
  • भगवान की कथाएं सुनाने से बच्चों को मनोरंजन के साथ-साथ संस्कार और धार्मिक ज्ञान भी मिलेगा।

जयपुर के मालवीय नगर से कथा सुनने पहुंची पार्वती देवी, नौरतीदेवी सहित अन्य श्रद्धालुओं ने कहा कि वे जया किशोरी को नजदीक से सुनने और दर्शन करने की इच्छा लेकर आए थे, लेकिन अव्यवस्थाओं के कारण उन्हें निराश होना पड़ा। उनका कहना था कि इतने बड़े धार्मिक आयोजन के लिए अधिक विस्तृत और सुविधाजनक स्थान का चयन किया जाना चाहिए था। गुरुवार गुरुवार यानी आज का कथा का समय दोपहर 12 बजे से है।जयपुर केमालवीय नगर से कथा सुनने पहुंची पार्वती देवी, नौरतीदेवी सहित अन्य श्रद्धालुओं ने कहा कि वे जया किशोरी को नजदीक से सुनने और दर्शन करने की इच्छा लेकर आए थे, लेकिन अव्यवस्थाओं के कारण उन्हें निराश होना पड़ा। उनका कहना था कि इतने बड़े धार्मिक आयोजन के लिए अधिक विस्तृत और सुविधाजनक स्थान का चयन किया जाना चाहिए था। गुरुवार को भी कथा का समय दोपहर 12 बजे से है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान पहले से था, तो क्या व्यवस्थाएं उसी अनुरूप की गई थीं? क्या आम श्रद्धालुओं से अधिक प्राथमिकता वीआइपी पास धारकों को दी गई? क्या धार्मिक आयोजनों में आस्था से अधिक वीआईपी संस्कृति हावी होती जा रही है? अब देखने वाली बात यह होगी कि कथा के अगले दो दिनों में श्रद्धालुओं की परेशानियों को दूर करने के लिए क्या अतिरिक्त इंतजाम होते हैं

कथा के समय में किया बदलाव

महंत अंजन कुमार गोस्वामी के सान्निध्य में नानी बाई को मायरो कथा का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ आरती के साथ हुआ। जया किशोरी ने कथा की शुरुआत श्री राधे गोविंदा, मन भज ले हरि का प्यारा नाम है’ भजन से की। कथा का समय पहले दोपहर 1 बजे से शाम 4 बजे तक तय था, लेकिन मंदिर प्रशासन की आपत्ति के बाद इसे बदलकर दोपहर 12 बजे से 3 बजे कर दिया गया।