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‘राग रंग’ में कल्पनाओं के पंख लगा मौन ने की बातें, संवेदनाएं हुयी जीवंत

-अपनी पेंटिंग्स के जरिये दिल की बेचैनी बयां करती हूं- निर्मला-जेकेके की अलंकार आर्ट गैलरी में राग-रंग प्रदर्शनी का आयोजन

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'राग रंग' में कल्पनाओं के पंख लगा मौन ने की बातें, संवेदनाएं हुयी जीवंत

जयपुर। कलाकार का मन अपने आस-पास घट रही हर छोटी-बड़ी घटना के प्रति बेहद संवेदनशील होता है। विधा कोई भी हो कलाकार की भावुक सृजन शक्ति उसे समाज और मानव व्यवहार में हो रहे बदलाव को अपनी कला के जरिये दुनिया को दिखाने की कल्पना रचने की क्षमता देती है। जवाहर कला केन्द्र की अलंकार गैलरी में रविवार से शुरू हुई 'राग-रंग' कला प्रदर्शनी में आर्टिस्ट डॉ. निर्मला सिंह ने इन्हीं बदलावों से मन के भीतर उपजे विचारों को अपनी अमूर्त कला से कैनवास पर जीवंत किया है। प्रख्यात मूर्तिशिल्पी हिम्मत शाह ने प्रदर्शनी का लोकार्पण किया।

रंगों से लिखी दिल की बात
निर्मला ने बताया कि उन्होंने अपनी 110 पेंटिंग्स को 'रांग-रंग' नाम दिया है, जो प्रेम को दर्शाती हैं। आपसी सौहार्द, आत्मीयता, असमानता, सद्भावना और बदलते मानव चरित्र से उनके भीतर के कलाकार को जो पीड़ा होती है, उस पीड़ा को उन्होंने रंगों की मदद से गीतों के रूप में कैनवास पर उकेरा है। हिम्मतशाह ने उनकी पेंटिंग्स की प्रशंसा करते हुए कहा कि निर्मला की इन कलाकृतियों में उनकी साधना और संवदेनशलीता नजर आती है। शाह ने कहा कि निर्मला ने जिस तरह अलग-अलग भावों को रंगों से परिभाषित किया है, वह सराहनीय है। दिल्ली से खास उनकी प्रदर्शनी देखने आए कवि और गद्यकार प्रयाग शुक्ल ने कहा कि निर्मला के चित्रों में उभरा उजास बहुत महत्वपूर्ण है।

शुक्ल ने कहा कि बतौर कलाकार निर्मला मूर्त में अमूर्त और अमूर्त में मूर्त को जीवंत करने वाली वर्तमान की बेहतरीन कलाकारों में से एक हैं। वहीं, कवि और कला समालोचक डॉ. राजेश कुमार व्यास ने कहा कि 'राग-रंग' में उन्होंने ब्रश से दिल को दू लेने वाले कलात्मक छंद हैं। कैनवास पर उनका मौन जहां बतियाता है वहीं कुछ कलाकृतियों में उनकी स्मृतियां खिलखिलाती हुई देखने वालों को आकर्षित करती हैं।