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Petrol-Diesel Price: राजस्थान में 14 से 15 रुपए प्रति लीटर तक सस्ता हो सकता है पेट्रोल-डीजल, जानें ‘फॉर्मूला’!

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भयंकर उबाल, 11 दिन में चौथी बार बढ़े दाम। अगर राजस्थान और केंद्र सरकार टैक्स में 30% की कटौती करें तो ₹15 तक सस्ता हो सकता है तेल। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

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Rajasthan Petrol Diesel Price Tax Cut Matter

राजस्थान के आम नागरिकों और वाहन चालकों की जेब पर इस समय महंगाई का एक बहुत बड़ा और असहनीय बोझ आन पड़ा है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल की कीमतों में लगातार आ रही गिरावट के बावजूद, घरेलू बाजार में आम जनता को राहत मिलने की बजाय लगातार झटके पर झटका लग रहा है। सोमवार को देश की प्रमुख तेल विपणन कंपनियों ने एक बार फिर आम जनता की कमर तोड़ते हुए पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बड़ी वृद्धि का ऐलान कर दिया। इस नए झटके के तहत तेल कंपनियों ने पेट्रोल में प्रति लीटर 2.61 रुपए और डीजल में 2.71 रुपए की भारी बढ़ोतरी की है। अगर पिछले 11 दिनों का रिकॉर्ड उठाकर देखा जाए, तो यह चौथी बार है जब आम जनता की जेब पर डाका डाला गया है। इन 11 दिनों के भीतर ही पेट्रोल अब तक कुल 7.50 रुपए प्रति लीटर और डीजल करीब 8 रुपए प्रति लीटर तक महंगा हो चुका है। ऐसे में राजस्थान समेत देश भर के लोग अब त्राहि-त्राहि कर रहे हैं क्योंकि जयपुर में पेट्रोल की कीमत 112.66 रुपए प्रति लीटर और डीजल की कीमत 97.78 रुपए प्रति लीटर के खौफनाक स्तर पर पहुंच चुकी है।

11 दिनों के भीतर 4 बड़े झटके: कब कितने बढ़े दाम?

Petrol Pump in Jaipur
तारीख पेट्रोल में बढ़ोतरी (प्रति लीटर)डीजल में बढ़ोतरी (प्रति लीटर)मुख्य कारण / प्रभाव
25 मई 2026₹2.82 की वृद्धि₹2.73 की वृद्धिसबसे बड़ा चौथा झटका; राजधानी में कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचीं।
23 मई 2026₹0.87 की वृद्धि (औसत ₹0.96)₹0.91 की वृद्धितीसरा झटका; वीकेंड पर आम जनता की जेब पर अतिरिक्त बोझ।
19 मई 2026₹0.94 की वृद्धि₹0.91 की वृद्धिदूसरा झटका; प्रदेश के कई जिलों में पेट्रोल ₹110 के पार पहुंचा।
15 मई 2026₹3.19 से ₹4.00 की वृद्धि₹3.14 की वृद्धि (औसत ₹3.00)पहला बड़ा झटका; मार्च 2024 के बाद तेल कंपनियों द्वारा एकमुश्त सबसे बड़ी बढ़ोतरी।

आम जनता के मन में यह सवाल बार-बार उठ रहा है कि आखिर इतने कम समय में तेल की कीमतें इस कदर आसमान कैसे छूने लगीं। तेल कंपनियों का तर्क है कि वे कच्चे तेल की आंतरिक लागतों और पिछले घाटे की भरपाई के लिए लगातार डीजल और पेट्रोल की कीमतों में आंशिक बढ़ोतरी करने के लिए मजबूर हैं, क्योंकि एक साथ बड़ी बढ़ोतरी करने से देश की अर्थव्यवस्था और माल ढुलाई पर सीधा और घातक असर पड़ता है।

वो 'जादुई फॉर्मूला', जिससे सीधे ₹15 तक कम हो सकते हैं दाम?

PM Modi and CM Bhajan Lal Sharma - File PIC

इस महंगाई के बीच देश के बड़े आर्थिक विश्लेषकों और पेट्रोलियम एक्सपर्ट्स ने सरकारों की नीति पर बड़े सवाल खड़े किए हैं। जानकारों का साफ़ कहना है कि भारत में पेट्रोल और डीजल के इतने महंगे होने की असली वजह कच्चा तेल नहीं है, बल्कि उस पर लगने वाला बेतहाशा टैक्स है। भारत में बिकने वाले ईंधन की कुल कीमत का करीब 35 से 50 फीसदी हिस्सा केवल टैक्स के रूप में सरकारों के खजाने में जाता है।

एक्सपर्ट्स ने गणना करके बताया है कि यदि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर इस टैक्स के ढांचे में केवल 30 फीसदी की कटौती कर दें, तो आम जनता को सीधे 14 से 15 रुपए प्रति लीटर की बहुत बड़ी राहत मिल सकती है। वर्तमान में पेट्रोलियम उत्पादों पर केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर न्यूनतम 5 फीसदी से लेकर अधिकतम 30 फीसदी तक अलग-अलग टैक्स वसूल रही हैं। यदि इस ऊंचे टैक्स स्लैब को नीचे लाया जाए, तो पेट्रोल की कीमतें तुरंत धड़ाम से नीचे गिरेंगी और बड़े शहरों पर जो वर्तमान में 19 से 20 रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है, वह घटकर सीधे 15 से 16 रुपए की राहत में बदल सकता है।

जानिए 1 लीटर पेट्रोल बिकने पर किसकी जेब में जाता है कितना पैसा?

पेट्रोल-डीजल के दाम फिर बढ़े (AI PIC)

आम आदमी को हमेशा यह भ्रम रहता है कि पेट्रोल की पूरी कीमत तेल कंपनियों या डीलर के पास जाती है। लेकिन अगर हम राजधानी दिल्ली के बेस रेट यानी 102 रुपए प्रति लीटर के उदाहरण से इस पूरे खेल को समझें, तो टैक्स की असली हैवानियत सामने आ जाती है।

जब आप अपनी गाड़ी में एक लीटर पेट्रोल डलवाते हैं, तो उसके 102 रुपए का विभाजन कुछ इस प्रकार होता है:

तेल कंपनियां (कच्चा तेल और रिफाइनिंग लागत): एक लीटर पेट्रोल को तैयार करने और उसे भारत तक लाने की मूल लागत महज 56 रुपए आती है।

केंद्र सरकार (एक्साइज ड्यूटी / उत्पाद शुल्क): इस 56 रुपए के तेल पर केंद्र सरकार सीधे 22 रुपए का टैक्स ठोक देती है।

राज्य सरकार (वैट और स्थानीय सेस): इसके बाद बची-कुची कसर राज्य सरकारें अपना वैट (VAT) और सेस लगाकर पूरी करती हैं, जो औसतन 20 रुपए प्रति लीटर बैठता है।

डीलर कमीशन: पेट्रोल पंप मालिक यानी डीलर को दिन-रात मेहनत करने और पंप चलाने के बदले में महज 4 रुपए का कमीशन मिलता है।

कुल योग: इस तरह 56 रुपए का मूल तेल आम आदमी की टंकी तक पहुंचते-पहुंचते 102 रुपए का हो जाता है। राजस्थान में तो वैट की दरें और भी ऊंची होने के कारण यह आंकड़ा 112 रुपए के पार निकल जाता है।

जानिए आपके शहर में आज क्या हैं पेट्रोल-डीजल के भाव

Petrol Pump (Patrika PIC)

टैक्स की दरें अलग-अलग राज्यों में वहां की सरकारों के अनुसार तय होती हैं, यही वजह है कि भारत के प्रमुख महानगरों और बड़े शहरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बड़ा अंतर देखने को मिलता है। सोमवार को हुई ताजा बढ़ोतरी के बाद देश के प्रमुख शहरों की स्थिति काफी गंभीर हो गई है।

यदि प्रमुख शहरों के दामों पर नजर डाली जाए तो स्थिति कुछ इस प्रकार है:

जयपुर (राजस्थान): मरुधरा की राजधानी में पेट्रोल पर 2.82 रुपए और डीजल पर 2.73 रुपए की सबसे बड़ी स्थानीय मार पड़ी है, जिससे यहाँ पेट्रोल 112.66 रुपए और डीजल 97.78 रुपए प्रति लीटर के ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गया है।

चेन्नई: दक्षिण के इस महानगर में पेट्रोल की कीमत 113.51 रुपए (2.67 रुपए की बढ़ोतरी) और डीजल 99.82 रुपए प्रति लीटर पर बिक रहा है।

मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी में पेट्रोल 111.21 रुपए और डीजल 97.83 रुपए प्रति लीटर के स्तर को छू चुका है।

बेंगलुरु: आईटी सिटी में पेट्रोल 107.77 रुपए और डीजल 99.55 रुपए प्रति लीटर पर दर्ज किया गया है।

पटना: बिहार की राजधानी में पेट्रोल 102.12 रुपए और डीजल 95.20 रुपए प्रति लीटर पर पहुंच गया है।

कब मिलेगी टैक्स से राजस्थान को 'मुक्ति'?

पेट्रोल और डीजल की कीमतों का यह 11 दिन में 4 बार बढ़ना इस बात का साफ संकेत है कि आने वाले दिनों में देश के भीतर माल ढुलाई महंगी होने से आम उपभोग की वस्तुएं, फल, सब्जियां और दूध भी महंगे हो सकते हैं। यदि राजस्थान की भजनलाल सरकार और केंद्र की मोदी सरकार सचमुच आम आदमी को राहत देना चाहती हैं, तो उन्हें एक्सपर्ट्स के इस 30 फीसदी टैक्स कटौती के फॉर्मूले पर गंभीरता से विचार करना होगा। जब तक टैक्स की दरों को युक्तिसंगत नहीं बनाया जाएगा, तब तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के सस्ते होने का कोई भी लाभ भारत के आम आदमी की रसोई और वाहन तक नहीं पहुंच पाएगा।