राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनावों को लेकर सस्पेंस लगातार बना हुआ है। आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया और OBC आयोग की रिपोर्ट में देरी के चलते चुनाव कार्यक्रम की घोषणा अटकी हुई है।
Rajasthan Panchayat Election Update: राजस्थान में पंचायत और नगर निकाय चुनावों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां भले ही तेज हो रही हों, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर अभी तक जमीनी तैयारियां शुरू नहीं हो सकी हैं। चुनाव प्रक्रिया फिलहाल विभागों और आयोगों के बीच पत्राचार तक ही सीमित नजर आ रही है। इससे चुनाव कार्यक्रम की घोषणा को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है। आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया के चलते चुनाव की अधिसूचना जारी होने में भी देरी हो रही है। हालांकि हाईकोर्ट ने 22 मई के आदेश में राजस्थान सरकार को 31 जुलाई तक पंचायत और निकाय चुनाव कराने के निर्देश दिए थे। अब इस समय सीमा में बेहद कम समय शेष रह गया है ऐसे में चुनावों को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
राज्य निर्वाचन आयोग ने इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए पंचायत राज विभाग और स्वायत्त शासन विभाग को पत्र भेजकर एससी, एसटी, ओबीसी और महिला वर्ग के आरक्षण का निर्धारण कर शीघ्र सूचित करने को कहा है ताकि चुनाव कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा की जा सके। आयोग का कहना है कि आरक्षण तय होने के बाद ही सीटों का अंतिम स्वरूप स्पष्ट किया जा सकेगा।
आयोग के पत्र के बाद दोनों विभागों ने राज्य ओबीसी आयोग से संपर्क की प्रक्रिया तेज कर दी है। सूत्रों के अनुसार एससी, एसटी और महिला आरक्षण को अंतिम रूप देने से पहले ओबीसी आरक्षण का निर्धारण अनिवार्य है, क्योंकि इसके आधार पर ही अन्य आरक्षित वर्गों की सीटों का वितरण तय होगा। इस पूरी प्रक्रिया में तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर समन्वय की आवश्यकता बनी हुई है, जिसके कारण निर्णय लेने में अतिरिक्त समय लग रहा है।
वहीं राज्य ओबीसी आयोग के अधिकारियों का कहना है कि उन्हें एससी और एसटी आरक्षण से संबंधित अधिकांश आवश्यक आंकड़े प्राप्त हो चुके हैं, लेकिन अभी भी कुछ पंचायतों के आंकड़े उपलब्ध नहीं हो पाए हैं। आयोग को पंचायत राज विभाग की ओर से 400 से अधिक पंचायतों की आबादी से जुड़ी जानकारी नहीं मिलने के कारण पूरी रिपोर्ट तैयार करने में लगातार बाधा आ रही है। इसके अलावा कई जिलों से भेजे गए डेटा में भी असंगतियां पाई गई हैं, जिनके सुधार के लिए पुनः पत्राचार किया जा रहा है, जिससे पूरी रिपोर्ट को अंतिम रूप देने में और अधिक समय लग सकता है और चुनाव प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।