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Rajasthan Drinking Water : राजस्थान के 5 जिलों की जनता को मिलेगा और पीने का पानी, ब्राह्मणी-बीसलपुर लिंक DPR फाइनल

Rajasthan Drinking Water : ब्राह्मणी नदी से बीसलपुर बांध तक लाने की योजना की डीपीआर तैयार हुई। परियोजना पूरी होने पर जयपुर, अजमेर, टोंक, दौसा, सवाई माधोपुर समेत कई जिलों की पेयजल आपूर्ति बढ़ेगी।

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फाइल फोटो पत्रिका

Rajasthan Drinking Water : खुशखबर। राजस्थान में ब्राह्मणी नदी से बीसलपुर बांध तक लाने की योजना की डीपीआर तैयार हो गई है। करीब 7893 करोड़ रुपए की परियोजना के तहत भैंसरोड़गढ़ क्षेत्र से 125 किलोमीटर दूर बनास नदी तक पानी पहुंचाया जाएगा, जहां से यह बीसलपुर बांध में आएगा। अनुमान है कि मानसून के दौरान करीब 680 एमसीएम (मिलियन क्यूबिक मीटर) पानी बीसलपुर तक पहुंच सकेगा, जो बांध की कुल क्षमता का करीब 62 प्रतिशत है। परियोजना पूरी होने पर जयपुर, अजमेर, टोंक, दौसा और सवाई माधोपुर समेत कई जिलों की पेयजल आपूर्ति भी बढ़ेगी। योजना में ब्राह्मणी नदी पर बैराज निर्माण और वन्यजीव क्षेत्रों में सुरंग का निर्माण भी शामिल है। चित्तौड़गढ़ जिले के भैंसरोड़गढ़ क्षेत्र में 54 एमसीएम क्षमता का बैराज बनाया जाएगा।

4800 क्यूसेक अतिरिक्त जल आएगा

मानसून के दौरान ब्राह्मणी नदी में बड़ी मात्रा में पानी बहकर चंबल नदी और फिर कोटा बैराज तक पहुंच जाता है। परियोजना के तहत बारिश के समय बह जाने वाले करीब 4800 क्यूसेक अतिरिक्त पानी का उपयोग कर उसे बीसलपुर तक पहुंचेगा। राणा प्रताप सागर से भी पानी लिया जाएगा, जो बारिश में व्यर्थ बह जाता है। इसके लिए बांध से बैराज तक फीडर तैयार करेंगे।

वन्यजीव क्षेत्रों से होकर गुजरेगा अलाइनमेंट

कैनाल के प्रस्तावित अलाइनमेंट में तीन प्रमुख संरक्षित क्षेत्र आ रहे हैं। इनमें भैंसरोड़गढ़ वन्यजीव अभयारण्य, मुकुंदरा टाइगर रिजर्व और रामगढ़ विषधारी वन्यजीव अभयारण्य शामिल हैं। पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के लिए इन क्षेत्रों में लगभग 32 किलोमीटर लंबी सुरंग (टनल) बनाना प्रस्तावित है।

मुख्य अतिरिक्त फायदे

पेयजल सुरक्षा : जयपुर, अजमेर, टोंक, दौसा और सवाई माधोपुर आदि जिलों/क्षेत्रों में विश्वसनीय पेयजल आपूर्ति बढ़ेगी। अनुमानित 355 मिलियन घन मीटर अतिरिक्त जल हर मानसून में उपयोगी बनेगा, जिससे 2045 तक बढ़ती मांग (लगभग 1600 MLD) पूरी हो सकेगी।

सिंचाई और कृषि : डैम में अधिक पानी से आसपास के क्षेत्रों में सिंचाई सुविधा बढ़ेगी, फसल उत्पादन में सुधार होगा और किसानों की आय बढ़ेगी।

जल संरक्षण: बर्बाद होने वाला पानी (चंबल-यमुना होते हुए समुद्र में) उपयोगी बनेगा। ग्रेविटी फ्लो, टनल और चैनल से कुशल स्थानांतरण होगा।

आर्थिक-सामाजिक लाभ : रोजगार सृजन (निर्माण, रखरखाव), औद्योगिक विकास, शहरी विस्तार और स्वास्थ्य सुधार (स्वच्छ पानी से जलजनित बीमारियां कम)।

समग्र विकास : पूर्वी राजस्थान के जल ग्रिड (राम जल सेतु आदि) से जुड़कर सूखाग्रस्त क्षेत्रों में स्थायी जल सुरक्षा मिलेगी, जिससे प्रवासन कम होगा और अर्थव्यवस्था मजबूत बनेगी।

ब्राह्मणी नदी के बारे में जानें

ब्राह्मणी नदी मध्यप्रदेश से चित्तौड़गढ़ में प्रवेश करती है। वहीं इस नदी पर भैंसरोडगढ़ क्षेत्र में 54 मिलियन क्यूबिक मीटर क्षमता का बैराज बनेगा और यहां से लगभग 125 किलोमीटर दूरी तय करते हुए भीलवाड़ा से गुजर रही बनास नदी तक पानी लाया जाएगा। बनास नदी से पानी बीसलपुर बांध में पहुंचेगा। इसलिए भी बांध की भराव क्षमता बढ़ाई जा रही है। यहां से पानी की आपूर्ति जयपुर, अजमेर, टोंक, सवाईमाधोपुर, दौसा व अन्य जिलों में हो सकेगी।