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जयपुर के रामगंज इलाके में गिराई गई 5 मंजिला इमारत, 10 मकान खाली कराकर चला बुलडोजर अभियान

Jaipur Building Demolition: गुरुवार सुबह नगर निगम की टीम ने पुलिस सुरक्षा के बीच कार्रवाई करते हुए इमारत को गिरा दिया। यह भवन शहर के अत्यंत घनी आबादी वाले इलाके में स्थित था, जहां दो कारों का एक साथ निकलना भी मुश्किल माना जाता है।

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जयपुर परकोटे में गिराई गई पांच मंजिला खतरनाक इमारत, तीन महीने से दहशत में थे लोग, फोटो - पत्रिका

Jaipur Wall City News: राजधानी के ऐतिहासिक परकोटा क्षेत्र में स्थित चौकड़ी रामचंद्र जी के जगन्नाथ शाह के रास्ते में आखिरकार उस पांच मंजिला भवन को ध्वस्त कर दिया गया, जिसने पिछले तीन महीनों से स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा रखी थी। भवन के एक हिस्से का पिलर क्षतिग्रस्त होने के बाद इसे खतरनाक घोषित कर दिया गया था। गुरुवार सुबह नगर निगम की टीम ने पुलिस सुरक्षा के बीच कार्रवाई करते हुए इमारत को गिरा दिया। यह भवन शहर के अत्यंत घनी आबादी वाले इलाके में स्थित था, जहां दो कारों का एक साथ निकलना भी मुश्किल माना जाता है। ऐसे क्षेत्र में पांच मंजिला भवन को गिराने की कार्रवाई को तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।

पिलर क्षतिग्रस्त होने के बाद बढ़ा था खतरा

जानकारी के अनुसार भवन के निचले हिस्से में स्थित दो दुकानों के बीच की दीवार हटाकर दोनों दुकानों को एक कर दिया गया था। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इसी बदलाव के कारण भवन की संरचना कमजोर हुई और बीच का पिलर क्षतिग्रस्त हो गया। इसके बाद भवन में दरारें दिखाई देने लगीं और संतुलन बिगड़ने की आशंका पैदा हो गई। नगर निगम ने एहतियात के तौर पर भवन को खाली करवा दिया था। इसमें रहने वाले करीब 8 से 10 परिवारों के लगभग 30 लोगों को दूसरी जगह शिफ्ट किया गया। आसपास के बाजार और दुकानों पर भी इसका असर पड़ा और कई दिनों तक रास्ता बंद रहा।

जांच के बाद लिया गया ध्वस्तीकरण का फैसला

नगर निगम ने भवन की स्थिति का आकलन करने के लिए तकनीकी जांच करवाई थी। जांच के बाद यह निष्कर्ष निकला कि भवन को सुरक्षित रखना संभव नहीं है। इसके बाद ध्वस्तीकरण का निर्णय लिया गया। कार्रवाई के दौरान आसपास के 10 से अधिक मकानों को भी सुरक्षा के मद्देनजर खाली कराया गया। पुलिस और निगम अधिकारियों की मौजूदगी में भवन को चरणबद्ध तरीके से गिराया गया। अब निगम की टीम मलबा हटाने के काम में जुटी हुई है। गनीमत ये रही कि भवन का अधिकांश टूटा हिस्सा नजदीक ही सालों पुराने एक पेड़ पर गिरा। इससे पेड़ का बड़ा हिस्सा टूटकर सड़क पर आ गिरा। भवन के सामने स्थित भवन में भी नुकसान होने की जानकारी सामने आई है।

स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली है, लेकिन इस घटना ने परकोटा क्षेत्र में पुराने और अवैध निर्माणों की सुरक्षा को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नागरिकों ने प्रशासन से ऐसे भवनों की नियमित जांच और समय रहते कार्रवाई की मांग की है।