Rajasthan Politics: राजस्थान भाजपा को नया संगठन महामंत्री मिल गया है। अजेय कुमार की नियुक्ति को आगामी चुनावों से पहले संगठन को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
जयपुर। राजस्थान भाजपा को करीब ढाई साल बाद नया संगठन महामंत्री मिल गया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के निर्देश पर राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह ने अजेय कुमार को प्रदेश संगठन महामंत्री नियुक्त किया है। पंचायत और निकाय चुनावों से पहले हुई इस नियुक्ति को संगठनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लंबे समय से रिक्त पड़े इस पद पर नियुक्ति के साथ ही भाजपा ने आगामी चुनावी तैयारियों को गति देने का संकेत दिया है। राजस्थान में संगठन महामंत्री का पद जनवरी 2024 से खाली था।
तत्कालीन संगठन महामंत्री चंद्रशेखर को तेलंगाना भेजे जाने के बाद से इस पद पर किसी की नियुक्ति नहीं हुई थी। ऐसे में संगठन और चुनावी गतिविधियों के बीच समन्वय बनाए रखने के लिए नए चेहरे का इंतजार किया जा रहा था। अजेय कुमार संगठनात्मक कार्यों के अनुभवी माने जाते हैं। वे वर्तमान में उत्तराखंड भाजपा में प्रदेश महामंत्री (संगठन) की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उत्तराखंड में उनके कार्यकाल के दौरान संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल देखने को मिला। सदस्यता अभियान, संगठन विस्तार और चुनावी रणनीति जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उनकी सक्रिय भूमिका रही है।
भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संगठनात्मक ढांचे में अजेय कुमार लंबे समय से सक्रिय हैं। उन्होंने उत्तराखंड में जिला प्रचारक और विभाग प्रचारक के रूप में भी कार्य किया है। इसके अलावा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मेरठ, बिजनौर और मुरादाबाद जैसे क्षेत्रों में संगठन को मजबूत बनाने की जिम्मेदारी संभाली। बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने, कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करने और चुनावी नेटवर्क विकसित करने में उनकी विशेष पहचान रही है। बता दें कि अजेय कुमार मूल रूप से बिहार के निवासी हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों में काम करने का अनुभव राजस्थान में उनके लिए उपयोगी साबित हो सकता है। प्रदेश में भाजपा आगामी चुनावी चुनौतियों के साथ संगठनात्मक विस्तार की तैयारियों में जुटी हुई है। ऐसे समय में अजेय कुमार की नियुक्ति को पार्टी की रणनीतिक तैयारी का हिस्सा माना जा रहा है। राजस्थान भाजपा के लिए यह नियुक्ति केवल एक संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि आगामी राजनीतिक अभियानों और चुनावी प्रबंधन को नई दिशा देने वाला कदम भी मानी जा रही है।