# इंदौर

World Environment Day से पहले सुकून देने वाली खबर, देशभर के लिए मिसाल बनी इंदौर की ये कॉलोनी

World Environment Day: जल संकट से लेकर बढ़ते कचरे और प्रदूषण की चुनौतियां अकेले इंदौर की कहानी नहीं है, बल्कि देशभर के ज्यादातर शहर ऐसी ही समस्या से जूझ रहे हैैं। 5 जून को दुनियाभर में वर्ल्ड एन्वायरमेंट डे मनाया जाएगा। अवेयरनेस के लिए शुरू की गई इस पहल का उदाहरण बन गई है मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर की परमाणु नगर कॉलोनी, जानें कैसे बन रही देशभर के लिए एक मिसाल?

3 min read
world environment day 2026 heartening news (photo: patrika)

World Environment Day 2026: जल संकट, बढ़ते कचरे और प्रदूषण जैसी चुनौतियों के बीच शहर की परमाणु नगर कॉलोनी एक ऐसी मिसाल बनकर उभरी है, जहां पर्यावरण संरक्षण केवल चर्चा का विषय नहीं, बल्कि दैनिक जीवन का हिस्सा है। 68 परिवारों वाली इस कॉलोनी ने सामूहिक प्रयासों से खुद को एक 'ग्रीन मॉडल' और 'जीरो वेस्ट कॉलोनी' के रूप में विकसित किया है। कॉलोनी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां उत्पन्न होने वाले अधिकांश कचरे का निपटान कॉलोनी परिसर में ही कर लिया जाता है। World Environment Day से पहले Indore की यह खबर जहां सुकून देने वाली है कि लोग जागरूक हो रहे हैं, वहीं देशवासियों के लिए प्रेरणा बनकर सवाल पूछ रही है क्या आप भी हुए हैं Aware?

कचरे को लेकर गंभीर हैं रहवासी, बदली लाइफस्टाइल

रहवासी न केवल कचरा पृथक्करण को गंभीरता से अपनाते हैं, बल्कि जैविक खाद निर्माण, सौर ऊर्जा उपयोग, वर्षा जल संचयन और हरित क्षेत्र संरक्षण जैसे उपायों को भी अपनी जीवनशैली में शामिल कर चुके हैं।

छह श्रेणियों में अलग होता है कचरा

परमाणु नगर (Parmanu Nagar Colony) इंदौर में गीले और सूखे कचरे के पृथक्करण से आगे बढ़कर घरेलू कचरे को छह अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया जाता है। प्रत्येक प्रकार के कचरे का अलग संग्रहण और वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन किया जाता है। पुनर्चक्रण योग्य सामग्री अधिकृत विक्रेताओं को भेजी जाती है, जबकि जैविक कचरे को स्थानीय स्तर पर प्रोसेस कर उपयोगी संसाधनों में बदला जाता है। इससे न केवल लैंडफिल में जाने वाले कचरे की मात्रा कम होती है, बल्कि पर्यावरणीय प्रदूषण पर भी प्रभावी नियंत्रण (World Environment Day 2026) रहता है।

parmanu Nagar Indore: इस तरह अलग-अलग क्षेणी में बांटा गया है कॉलोनी का सारा कचरा (photo:patrika)

कचरे से खाद, खाद से हरियाली

कॉलोनी में निकलने वाले गीले और जैविक कचरे से उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद तैयार की जाती है। इस खाद का उपयोग कॉलोनी के उद्यानों और हरित क्षेत्रों में किया जाता है। इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और पौधों का विकास बेहतर होता है। कचरे को संसाधन में बदलने का यह मॉडल अन्य कॉलोनियों के लिए भी प्रेरणादायक बन गया है।

सिंगल यूज प्लास्टिक नहीं

पर्यावरण संरक्षण (World Environment Day) के संकल्प को मजबूत करने के लिए कॉलोनी ने सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग पूरी तरह बंद कर दिया है। इसके लिए यहां एक 'बर्तन बैंक' भी स्थापित किया गया है। पारिवारिक, सामाजिक और सामुदायिक आयोजनों में रहवासी बर्तन बैंक से पुन: उपयोग योग्य बर्तन लेते हैं। इससे डिस्पोजेबल प्लास्टिक और थर्माकोल उत्पादों के उपयोग पर पूर्ण रोक लग गई है और कचरे की मात्रा में उल्लेखनीय कमी आई है।

हर घर में जल संरक्षण

परमाणु नगर में 100 फीसदी घरों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग और वाटर रिचार्जिंग सिस्टम स्थापित हैं। वर्षा जल को संरक्षित कर भूजल स्तर बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। रहवासी मानते हैं कि जल संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं है।

एक नजर में मॉडल कॉलोनी

  • कुल परिवार : 68
  • रेन वाटर हार्वेस्टिंग : 100 फीसदी घरों में
  • सोलर वाटर हीटर : 90 फीसदी घरों में
  • सिंगल यूज प्लास्टिक : पूरी तरह प्रतिबंधित
  • बर्तन बैंक : सामुदायिक आयोजनों के लिए रहते हैं उपलब्ध
  • जैविक कचरे से : खाद निर्माण
  • लक्ष्य : जीरो वेस्ट और पर्यावरण और अनुकूल जीवनशैली
parmanu nagar Indore Eco friendly colony (photo:patrika)

क्यों है खास?

- घर-घर वर्षा जल संचयन-कचरे का स्थानीय स्तर पर निपटान

- जैविक खाद से हरियाली को बढ़ावा

- प्लास्टिक मुक्त सामुदायिक आयोजन

- सौर ऊर्जा का व्यापक उपयोग

- पर्यावरण संरक्षण में सामूहिक भागीदारी

सौर ऊर्जा से घट रही बिजली पर निर्भरता

स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए कॉलोनी में बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा (Solar Energy)का उपयोग किया जा रहा है। लगभग 90 प्रतिशत घरों में सोलर वाटर हीटर लगाए गए हैं, जबकि कई घरों में अन्य सौर ऊर्जा आधारित व्यवस्थाएं भी संचालित हैं। इससे पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम हुई है और बिजली की खपत में भी कमी आई है।