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इंदौर में ‘343 प्रॉपर्टी’ का गुपचुप तरीके से कर दिया नामांतरण, अब बनाई गई SOP

Indore Municipal Corporation: राजस्व विभाग में वित्तीय वर्ष की क्लोजिंग की आड़ में 48 घंटों के भीतर (30 और 31 मार्च को) नियमों को ताक पर रखकर 343 नोटरी वाली प्रॉपर्टी का गुपचुप तरीके से नामांतरण कर दिया गया।

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Indore Municipal Corporation: प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source- freepik)

Indore Municipal Corporation:एमपी के इंदौर शहर में नगर निगम के राजस्व विभाग मैं विभागीय स्तर पर सांठगांठ कर 343 नोटरी वाली प्रॉपर्टी का नियम विरुद्ध नामांतरण कर दिया गया था। अधिकारियों ने मामला तो पकड़ लिया, लेकिन दो माह बाद भी पता नहीं लगा सके कि इस गड़बड़ी में कौन शामिल है। आइटी विभाग से जानकारी मांगी, नहीं दी गई। पत्रिका ने इस मामले का खुलासा किया था, लेकिन अब अफसरों ने भविष्य में इस तरह की गड़बड़ी से बचने को एक आदर्श प्रक्रिया बना दी है। इसको अपना कर ही नामांतरण हो सकेगा। इसमें अफसरों की जवाबदेही भी तय होगी।

गुपचुप तरीके से नामांतरण कर दिया

मालूम हो कि राजस्व विभाग में वित्तीय वर्ष की क्लोजिंग की आड़ में 48 घंटों के भीतर (30 और 31 मार्च को) नियमों को ताक पर रखकर 343 नोटरी वाली प्रॉपर्टी का गुपचुप तरीके से नामांतरण कर दिया गया। इस चौंकाने वाले मामले की भनक निगम राजस्व विभाग के अधिकारियों सहित निगमायुक्त क्षितिज सिंघल तक भी पहुंची। उन्होंने जांच के आदेश दिए थे।

राजस्व विभाग के अफसरों ने पहले तो वो 343 खाते चिह्नित किए, जिनका नियम विरुद्ध नामांतरण किया गया, वहीं आइटी विभाग को पत्र लिखकर जानकारी मांगी, जिससे पता चल सके कि किस आइपी एड्रेस और किस समय पर इन खातों की नामांतरण प्रक्रिया की गई। दो माह बाद भी आइटी विभाग से ये जानकारी नहीं मिली है।

बड़ा गिरोह सक्रिय, कर्मचारियों की मिलीभगत

जानकारी के अनुसार, अफसरों को भनक लगी है कि नियम विरुद्ध जाकर नामांतरण करने वाला बड़ा गिरोह है और उसके हर स्तर पर कर्मचारियों की मिलीभगत है। इस पर लगाम लगाने को नए सिरे से नामांतरण की नई आदर्श प्रक्रिया जारी कर दी। इससे निचले स्तर के अधिकारी-कर्मचारी से लेकर वरिष्ठ स्तर के अफसर की जवाबदेही तय होगी। इसमें नामांतरण प्रक्रिया के लिए किस तरह के दस्तावेज लेना हैं और किस-किस स्तर पर क्या कार्रवाई होगी, ये सब तय किया गया है।

नामांतरण के लिए क्या जरूरी

-आवेदन, स्वयं आवेदक या अधिवक्ता द्वारा दस्तावेज देना है। ये रजिस्टर्ड होना जरूरी हैं।
-संपदा पोर्टल पर रजिस्टर्ड दस्तावेज चेक करना है, रिकॉर्ड मिलने पर ही प्रक्रिया आगे बढ़ाएं।
-नगर निगम के टैक्स पर नो ड्यूज।
-नामांतरणकर्ता और गृहिता दोनों के आधार कार्ड।
-सात दिवस की जाहिर सूचना।
-सम्पत्ति मालिक को सूचना पत्र।
-बिल कलेक्टर की जियो टैग फोटो के साथ मौका और कब्जा रिपोर्ट।
-सहायक राजस्व अधिकारी की टीप और अनुशंसा।
-उपायुक्त का अनुमोदन ।
-इसके साथ ही सम्पत्ति स्वामी के मृत्यु की स्थिति में वारिसाना नामांतरण को लेकर इसी तरह की आदर्श प्रक्रिया बनाई गई है।

कलेक्टर ने लगाई रोक, जादूगरों ने किया 'खेल'

कलेक्टर शिवम वर्मा ने नोटरी की सम्पत्ति पर नामांतरण पर रोक लगा रखी है लेकिन विभाग के कुछ जादूगरों ने इसमें भी खेल दिखा दिया। जिन प्रॉपर्टी का नामांतरण हुआ, उनमें से कुछ के सौदे होकर रजिस्ट्री भी हो गई है। अब बचाव के लिए विभाग ने इन खातों को रिवर्ट करवा दिया है। जिनकी रजिस्ट्री हो गई है, उनमें अब कुछ नहीं हो सकता। जो 343 खातों का नामांतरण हुआ है, उन्हें चिह्नित कर लिया है। मुख्यालय से सभी जोन के एआरओ को इनकी जानकारी दी गई है. ताकि उन खाताधारकों से पूछताछ कर पता लगाया जा सके कि उन्होंने नोटरी की सम्पति के नामांतरण के लिए किससे संपर्क किया था। किसी भी जोन के एआरओ एक भी खाते का पता नहीं लगा सके हैं।